भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने गुरुवार को अडाणी समूह और इसके चेयरमैन गौतम अडाणी को अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए शेयर बाजार हेरफेर और संबंधित पक्ष लेनदेन (RPT) के आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया। SEBI ने अपने 44 पेज के अंतिम आदेश में कहा कि हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए आरोप "स्थापित नहीं हो सके" और इसलिए कोई जुर्माना या निर्देश जारी नहीं किया जाएगा।
जनवरी 2023 में हिंडनबर्ग रिसर्च ने अपनी एक रिपोर्ट में अडाणी समूह पर गंभीर आरोप लगाए थे। इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अडाणी समूह ने अडिकॉर्प एंटरप्राइजेज, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवर इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसी संस्थाओं के माध्यम से फंड्स को राउट करके संबंधित पक्ष लेनदेन को छिपाया और शेयर बाजार में हेरफेर किया।
हिंडनबर्ग ने इसे "कॉरपोरेट इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला" करार दिया था। इस रिपोर्ट के बाद अडाणी समूह की कंपनियों, जैसे अडाणी एंटरप्राइजेज, अडाणी पोर्ट्स और अडाणी पावर के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई, जिससे समूह का मार्केट कैपिटलाइजेशन 125 बिलियन डॉलर तक कम हो गया।
SEBI ने इन आरोपों की गहन जांच शुरू की थी, जिसमें अडाणी समूह की कंपनियों और उनके प्रमोटरों, गौतम अडाणी, राजेश अडाणी और CFO जुगेशिंदर सिंह के खिलाफ लेनदेन की जांच शामिल थी। हिंडनबर्ग ने आरोप लगाया था कि अडाणी समूह ने लिस्टिंग समझौते और SEBI (LODR) नियमों का उल्लंघन करते हुए फंड्स को राउट किया।
SEBI का अंतिम आदेश
18 सितंबर 2025 को जारी अपने दो अलग-अलग आदेशों में, SEBI के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश सी. वार्ष्णेय ने स्पष्ट किया कि जांच में कोई अनियमितता नहीं पाई गई। आदेश में कहा गया, "नोटिस प्राप्तकर्ताओं के खिलाफ लगाए गए आरोप स्थापित नहीं हो सके। इसलिए, इन कार्यवाहियों को बिना किसी निर्देश के समाप्त किया जाता है।" SEBI ने यह भी नोट किया कि अडाणी पावर ने माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स को ऋण चुकाया था, जिसे बाद में ब्याज सहित अडाणी पोर्ट्स को वापस किया गया। इस प्रकार, जांच अवधि के दौरान ऋण विभिन्न किश्तों में दिए और चुकाए गए।
SEBI ने पाया कि अडिकॉर्प एंटरप्राइजेज, माइलस्टोन ट्रेडलिंक्स और रेहवर इन्फ्रास्ट्रक्चर के बीच लेनदेन संबंधित पक्ष लेनदेन (RPT) की श्रेणी में नहीं आते, जैसा कि तत्कालीन लिस्टिंग समझौते और SEBI (LODR) नियमों के तहत परिभाषित है। इसके अलावा, हिंडनबर्ग द्वारा लगाए गए धोखाधड़ी और शेयर बाजार हेरफेर (PFUTP) के आरोपों में भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला।
सुप्रीम कोर्ट और अन्य जांच
इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ पैनल ने मई 2023 में अपनी रिपोर्ट में अडाणी समूह को क्लीन चिट दी थी, जिसमें कहा गया था कि SEBI की ओर से कोई नियामक विफलता नहीं हुई और न ही अडाणी समूह द्वारा शेयर मूल्य हेरफेर का कोई सबूत मिला। सुप्रीम कोर्ट ने 3 जनवरी 2024 को अपने फैसले में SEBI की जांच को विश्वसनीय माना और हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को "संदिग्ध" करार देते हुए इसे जांच का आधार बनाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने SEBI को बाकी दो लंबित मामलों की जांच तीन महीने में पूरी करने का निर्देश दिया था।
अडाणी समूह की प्रतिक्रिया
अडाणी समूह ने SEBI के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे अपनी पारदर्शिता और नियामक अनुपालन के प्रति प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। समूह ने कहा कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट "बुरी नीयत" से प्रेरित थी और इसका उद्देश्य समूह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना था। समूह ने निवेशकों का विश्वास बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए, जिनमें कर्ज कम करना और नए निवेश को आकर्षित करना शामिल है।
हिंडनबर्ग और पूर्व SEBI प्रमुख पर आरोप
हिंडनबर्ग ने अगस्त 2024 में एक अन्य रिपोर्ट में SEBI की पूर्व प्रमुख माधबी पुरी बुच पर भी आरोप लगाए थे, जिसमें दावा किया गया था कि उनके और उनके पति के पास अडाणी समूह से जुड़े ऑफशोर फंड्स में हिस्सेदारी थी। हालांकि, लोकपाल ने मई 2025 में इन आरोपों को "आधारहीन" और "राजनीति से प्रेरित" बताते हुए खारिज कर दिया। लोकपाल ने कहा कि माधबी पुरी बुच ने अपनी नियुक्ति से पहले ही संबंधित निवेशों को भुना लिया था और कोई भ्रष्टाचार या हितों का टकराव नहीं पाया गया।



