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ChatGPT Atlas लॉन्च के बाद गूगल की मार्केट वैल्यू धड़ाम, निवेशकों में मचा हड़कंप

ChatGPT Atlas लॉन्च के बाद गूगल की मार्केट वैल्यू धड़ाम, निवेशकों में मचा हड़कंप

टेक इंडस्ट्री में एक बार फिर बड़ा धमाका हुआ है। अमेरिकी स्टार्टअप ओपनएआई ने मंगलवार को अपना नया एआई-पावर्ड वेब ब्राउजर 'चैटजीपीटी एटलस' लॉन्च कर दिया, जो सीधे गूगल क्रोम को चुनौती दे रहा है। इस लॉन्च के ऐलान के साथ ही गूगल की पैरेंट कंपनी अल्फाबेट के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे कंपनी की मार्केट वैल्यू एक ही दिन में करीब 150 अरब डॉलर (लगभग ₹13.15 लाख करोड़) घट गई।

ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन ने लॉन्च इवेंट के दौरान इसे "एक दशक में दुर्लभ अवसर" करार दिया, जो ब्राउजर की परिभाषा को फिर से सोचने का मौका देता है। एटलस ब्राउजर को चैटजीपीटी के कोर पर बनाया गया है, जो यूजर्स को वेब ब्राउजिंग के दौरान एआई असिस्टेंस प्रदान करता है। यह ब्राउजर पारंपरिक यूआरएल बार की जगह चैटबॉट इंटरफेस को प्राथमिकता देता है, जहां यूजर सवाल पूछ सकते हैं या टास्क असाइन कर सकते हैं। कंपनी के मुताबिक, एटलस वर्तमान में मैकओएस पर ग्लोबली उपलब्ध है, जबकि विंडोज, आईओएस और एंड्रॉइड वर्जन जल्द ही रिलीज होंगे। फ्री, प्लस, प्रो और गो यूजर्स इसे डाउनलोड कर सकते हैं, जबकि बिजनेस यूजर्स के लिए बीटा वर्जन उपलब्ध है।

एटलस की मुख्य विशेषताओं में एकीकृत चैटजीपीटी असिस्टेंस शामिल है, जो यूजर के मौजूदा पेज, कंटेक्स्ट और गोल्स को समझता है। इससे यूजर्स को कॉपी-पेस्ट या पेज स्विच करने की जरूरत नहीं पड़ती। ब्राउजर मेमोरीज फीचर वैकल्पिक है, जो विजिटेड साइट्स से कंटेक्स्ट याद रखता है—जैसे जॉब पोस्टिंग्स का सारांश या इंडस्ट्री ट्रेंड्स—ताकि स्मार्ट सुझाव दिए जा सकें। यूजर्स सेटिंग्स से इसे कंट्रोल कर सकते हैं, मेमोरीज देख सकते हैं, आर्काइव कर सकते हैं या डिलीट कर सकते हैं। ब्राउजिंग हिस्ट्री डिलीट करने पर जुड़ी मेमोरीज भी मिट जाती हैं।

एक और हाइलाइट है 'एजेंट मोड', जो प्रीमियम फीचर के रूप में उपलब्ध है। यह मोड चैटजीपीटी को रिसर्च, एनालिसिस, टास्क ऑटोमेशन, इवेंट प्लानिंग या अपॉइंटमेंट बुकिंग जैसे काम करने की अनुमति देता है। उदाहरण के तौर पर, यह इंस्टाकार्ट में ग्रॉसरी आइटम्स ऐड कर सकता है या डॉक्यूमेंट्स से टीम इनसाइट्स कंपाइल कर सकता है। हालांकि, यह अभी प्रीव्यू स्टेज में है और कॉम्प्लेक्स वर्कफ्लोज में गलतियां कर सकता है। एजेंट मोड ब्राउजर कंटेक्स्ट का इस्तेमाल तेजी से करता है, लेकिन सेफ्टी के लिए कोड रन नहीं कर सकता, फाइल्स डाउनलोड नहीं कर सकता या एक्सटेंशन्स इंस्टॉल नहीं कर सकता। संवेदनशील साइट्स (जैसे फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस) पर यह पॉज हो जाता है।

न्यू टैब पेज सर्च बार के साथ शुरू होता है, जहां यूजर सवाल या यूआरएल टाइप कर सकते हैं। यह ऑटोकम्पलीट ऑफर करता है और सर्च लिंक्स, इमेजेस, वीडियोज और न्यूज के लिए टैब्स दिखाता है। पास्ट एक्सप्लोरेशन के आधार पर सुझाव देता है, जैसे पेजेस पर वापस लौटना या टास्क ऑटोमेट करना। प्राइवेसी पर फोकस करते हुए, यूजर्स स्पेसिफिक पेजेस, पूरी हिस्ट्री क्लियर कर सकते हैं या इंकॉग्निटो मोड यूज कर सकते हैं। ब्राउजिंग कंटेंट को डिफॉल्ट रूप से मॉडल ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाता; ऑप्ट-इन ऑप्शन उपलब्ध है। पेरेंटल कंट्रोल्स चैटजीपीटी से कैरी ओवर होते हैं, साथ ही ब्राउजर मेमोरीज और एजेंट मोड को डिसेबल करने के नए ऑप्शंस हैं।

ओपनएआई का यह कदम गूगल क्रोम के लिए सीधी चुनौती है, जो दुनिया भर में 3 अरब यूजर्स के साथ ब्राउजर मार्केट का दबदबा रखता है। गूगल ने सितंबर में अपने जेमिनी मॉडल को क्रोम में इंटीग्रेट किया था, जो वेबपेज कंटेंट समझने, टैब्स क्रॉस वर्क करने या मीटिंग शेड्यूलिंग जैसे फीचर्स ऑफर करता है। लेकिन एटलस के लॉन्च ने निवेशकों को चिंतित कर दिया। मंगलवार को अल्फाबेट के शेयर 3% गिरे, जिससे मार्केट कैप में 150 अरब डॉलर की कमी आई। न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज पर दोपहर 11 बजे शेयर प्राइस 252.68 डॉलर था, जो 15 मिनट में 246.15 डॉलर पर लुढ़क गया।

एनालिस्ट्स का मानना है कि यह गिरावट ओपनएआई के बढ़ते प्रभाव को दिखाती है। फोररेस्टर के एनालिस्ट पैडी हैरिंगटन ने कहा, "गूगल जैसे जायंट से मुकाबला करना बड़ी चुनौती है, जिसके पास रिडिकुलस मार्केट शेयर है।" ओपनएआई के पास पहले से 800 मिलियन से ज्यादा चैटजीपीटी यूजर्स हैं, जिनमें से कई फ्री एक्सेस यूज करते हैं। कंपनी ब्राउजर के जरिए इंटरनेट ट्रैफिक और डिजिटल ऐडवरटाइजिंग रेवेन्यू बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ओपनएआई अभी घाटे में चल रही है और प्रॉफिट के लिए पेड सब्सक्रिप्शंस पर निर्भर है।

यह लॉन्च अमेरिकी एंटीट्रस्ट केस के बीच आया है, जहां ओपनएआई ने गूगल क्रोम खरीदने में रुचि जताई थी, लेकिन जज अमित मेहता ने इसे खारिज कर दिया। उनका कहना था कि एआई इंडस्ट्री के एडवांसमेंट्स कॉम्पिटिशन को रीशेप कर रहे हैं। गूगल ने पिछले साल सर्च रिजल्ट्स के टॉप पर एआई-जनरेटेड रिस्पॉन्सेस शुरू किए थे। एक सर्वे के मुताबिक, अमेरिका में 60% लोग (और 30 साल से कम उम्र के 74%) कभी न कभी एआई का इस्तेमाल इंफॉर्मेशन के लिए करते हैं। लेकिन चिंताएं भी हैं—एआई 'हैलुसिनेशन' (गलत इंफॉर्मेशन confidently देना) और पब्लिशर्स पर असर। न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी आउटलेट्स ने कॉपीराइट उल्लंघन के लिए मुकदमे दायर किए हैं, जबकि एसोसिएटेड प्रेस जैसे कुछ लाइसेंसिंग डील्स पर सहमत हुए हैं। यूरोपियन ब्रॉडकास्टिंग यूनियन के एक स्टडी में पाया गया कि चैटजीपीटी और जेमिनी जैसे एआई असिस्टेंट्स के जवाबों में से लगभग आधे हाई-क्वालिटी जर्नलिज्म स्टैंडर्ड्स से कमतर थे।

एटलस के लॉन्च से पहले ओपनएआई ने रेड-टीमिंग (सिक्योरिटी टेस्टिंग) की है और एजेंट मोड पर लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। शुरुआती टेस्टर योग्या कलरा, एक कॉलेज स्टूडेंट, ने कहा, "लेक्चर्स के दौरान मैं प्रैक्टिस क्वेश्चंस और रियल-वर्ल्ड एग्जांपल्स यूज करता हूं। पहले स्लाइड्स और चैटजीपीटी के बीच स्विच करता था, स्क्रीनशॉट लेकर सवाल पूछता था। अब चैटजीपीटी इंस्टेंटली समझ जाता है कि मैं क्या देख रहा हूं, जिससे मेरा नॉलेज चेक बेहतर हो गया।"

यह ब्राउजर न सिर्फ यूजर एक्सपीरियंस को बदल सकता है, बल्कि इंटरनेट की पूरी इकोसिस्टम को प्रभावित कर सकता है। सैम ऑल्टमैन का मानना है कि चैटबॉट इंटरफेस भविष्य में इंटरनेट यूज का सेंटर बनेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या ओपनएआई गूगल के 3 अरब यूजर्स वाले साम्राज्य को हिला पाएगी? या यह सिर्फ एक और एआई हाइप होगा? टेक वॉचर्स का इंतजार है कि एटलस के एडॉप्शन रेट्स क्या कहानी सुनाएंगे।

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