प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के सबसे बड़े ग्रीनफील्ड कॉरिडोर गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर दिया है। मेरठ से प्रयागराज तक फैला यह 594 किमी लंबा एक्सप्रेसवे अब आम जनता के लिए खुल चुका है। यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़क नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के विकास का नया नक्शा माना जा रहा है, जो पश्चिम से पूर्वांचल तक सीधा कनेक्शन तैयार करता है।
सफर हुआ आसान और तेज
इस एक्सप्रेसवे की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है। पहले मेरठ से प्रयागराज पहुंचने में 12 से 13 घंटे लगते थे, लेकिन अब यही सफर सिर्फ 6 से 7 घंटे में पूरा होगा। 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड से वाहन फर्राटा भरेंगे। इससे न केवल समय बचेगा बल्कि ईंधन की लागत भी कम होगी और लोगों की यात्रा पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी।
उद्योग और रोजगार को बड़ा बूस्ट
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के कई जिलों को जोड़ते हुए उद्योग और निवेश के नए दरवाजे खोल रहा है। एक्सप्रेसवे के किनारे औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं, जिससे हजारों युवाओं को रोजगार मिलेगा। करीब 518 गांवों के 5700 से ज्यादा लोगों को पहले ही काम मिल चुका है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और छोटे शहर भी बड़े बाजारों से सीधे जुड़ जाएंगे।
टोल और सुविधाओं की पूरी तैयारी
एक्सप्रेसवे पर टोल दरें भी तय कर दी गई हैं, जिसमें दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए 1.28 रुपये प्रति किमी और कार के लिए 2.55 रुपये प्रति किमी रखा गया है। इसके अलावा यहां 24 घंटे एम्बुलेंस, पेट्रोलिंग, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, फॉग वार्निंग सिस्टम और सीसीटीवी जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं। इसे पूरी तरह सुरक्षित और स्मार्ट कॉरिडोर के रूप में तैयार किया गया है।
गांव, किसान और भविष्य की दिशा
इस एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा गांवों और किसानों को मिलने वाला है। अब किसान अपनी फसल बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। बेहतर कनेक्टिविटी से गांवों का विकास तेजी से होगा। भविष्य में इसे हरिद्वार तक बढ़ाने की योजना भी है, जिससे यह कॉरिडोर और बड़ा बन जाएगा। साफ है कि गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के लिए सिर्फ सड़क नहीं बल्कि विकास की नई पहचान बनकर उभरा है।
