भारत और ब्रिटेन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) हुआ है इस समझौते के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह भारत का 16वां FTA है और ब्रेक्ज़िट के बाद ब्रिटेन का सबसे महत्वपूर्ण द्विपक्षीय व्यापार समझौता माना जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक इस समझौते के तहत, ब्रिटेन 99% भारतीय निर्यात पर आयात शुल्क को शून्य या न्यूनतम स्तर पर लाएगा। इसमें कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, ऑटो पार्ट्स, इंजीनियरिंग सामान और जैविक रसायन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
भारत ने ब्रिटेन से आयात होने वाली व्हिस्की, चॉकलेट, बिस्कुट और लग्ज़री कारों जैसे उत्पादों पर टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है। उदाहरण के लिए, स्कॉच व्हिस्की पर आयात शुल्क 150% से घटकर 90% और अगले 10 वर्षों में 40% तक हो जाएगा। ऑटोमोबाइल टैरिफ 100% से घटकर 10% होगा, जिससे जगुआर लैंडरोवर, रोल्स रॉयस और एस्टन मार्टिन जैसी कारें भारत में सस्ती होंगी। दोनों देशों ने सामाजिक सुरक्षा समझौते (Double Contribution Agreement) पर भी हस्ताक्षर किए, जिससे भारतीय और ब्रिटिश पेशेवरों को दोनों देशों में सामाजिक सुरक्षा अंशदान दोहरे भुगतान से छूट मिलेगी। यह समझौता 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 120 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखता है। 2040 तक व्यापार में 25.5 अरब पाउंड की वृद्धि का अनुमान है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "इंडो पैसिफिक में शांति और स्थिरता, यूक्रेन में चल रहे संघर्ष और पश्चिम एशिया की स्थिति पर हम विचार साझा करते रहे हैं। हम जल्द से जल्द शांति और स्थिरता की बहाली का समर्थन करते हैं। सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान अनिवार्य है। आज के युग की मांग विस्तारवाद नहीं विकासवाद ही है, उन्होने आगे कहां- पिछले महीने अहमदाबाद में हुए हादसे में मारे गए लोगों में कई ब्रिटिश नागरिक भी थे। हम उनके परिवारों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त करते हैं। ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के लोग हमारे संबंधों में एक जीवंत सेतु का काम करते हैं। वे भारत से सिर्फ़ करी ही नहीं, बल्कि रचनात्मकता, प्रतिबद्धता और चरित्र भी लेकर आए हैं। उनका योगदान सिर्फ़ ब्रिटेन की समृद्ध अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्रिटेन की संस्कृति, खेल और जनसेवा में भी दिखता है..."
भारत को क्या-क्या होगा फायदा ?
निर्यात में वृद्धि- कपड़ा, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न और आभूषण, और ऑटो पार्ट्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को ब्रिटेन के बाजार में ड्यूटी-फ्री या कम शुल्क पर प्रवेश मिलेगा। इससे आगरा, कानपुर, सूरत, लुधियाना, वाराणसी और मुंबई जैसे औद्योगिक केंद्रों को लाभ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत में कपड़ा, चमड़ा और आईटी जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों में नौकरियों के अवसर बढ़ाएगा। खासकर युवाओं, किसानों और मछुआरों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों की तुलना में भारतीय उत्पाद ब्रिटेन में सस्ते और अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे। और भारत के फल, सब्जियां, मसाले और समुद्री उत्पादों पर ब्रिटेन में टैरिफ हटने से इनका निर्यात बढ़ेगा।
ब्रिटेन को होने वाले फायदे
- सस्ते आयात: स्कॉच व्हिस्की, चॉकलेट, बिस्कुट और मांस जैसे ब्रिटिश उत्पाद भारत में सस्ते होंगे, जिससे उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
- ऑटोमोबाइल और मेडिकल उपकरण: ब्रिटिश लग्ज़री कारें और मेडिकल उपकरण भारत में सस्ते और सुलभ होंगे।
- स्कॉटलैंड के व्हिस्की उद्योग: स्कॉच व्हिस्की पर टैरिफ में कमी से स्कॉटलैंड के व्हिस्की उद्योग को विशेष लाभ होगा।
आपको बता दें यह समझौता भारत का किसी विकसित अर्थव्यवस्था के साथ एक दशक में पहला बड़ा द्विपक्षीय व्यापार समझौता है। यह ब्रेक्ज़िट के बाद ब्रिटेन के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह यूरोपीय संघ से बाहर निकलने के बाद का सबसे बड़ा व्यापारिक समझौता है। वैश्विक व्यापार में अमेरिकी टैरिफ नीतियों से उत्पन्न अनिश्चितताओं के बीच यह समझौता दोनों देशों के लिए आर्थिक स्थिरता का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने इस समझौते को भारत-ब्रिटेन व्यापक रणनीतिक साझेदारी का एक मील का पत्थर बताया है। यह व्यापार, निवेश, नवाचार और रोजगार सृजन को बढ़ावा देगा।



