गाजियाबाद के वैशाली क्षेत्र में रहने वाले 84 वर्षीय रिटायर्ड बैंक मैनेजर को 22 मई को व्हाट्सएप वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और दावा किया कि उनके नाम पर करोड़ों रुपये के गबन का मामला दर्ज है। इसके बाद गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट जैसा माहौल बना दिया गया। ठगों ने परिवार की पूरी जानकारी ली और उन्हें किसी से भी इस बारे में बात न करने की हिदायत दी।
12 दिन तक डर, पूछताछ और पैसों की मांग
पीड़ित के अनुसार 22 मई से 4 जून तक रोज कई घंटे वीडियो कॉल पर पूछताछ होती रही। इस दौरान अलग-अलग खातों में पैसे भेजने के लिए दबाव बनाया गया। ठगों ने कहा कि जांच पूरी होने तक रकम सरकारी खाते में जमा करनी होगी और निर्दोष साबित होने पर पैसा वापस कर दिया जाएगा। डर और मानसिक दबाव में आकर बुजुर्ग दंपति ने करीब 2.20 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
नकली कोर्ट और फर्जी जज से भी कराया सामना
ठगों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताने तक ही बात सीमित नहीं रखी। उन्होंने कथित डिजिटल कोर्ट की कार्यवाही भी दिखाई और एक नकली जज के सामने पेशी कराई। वहां कहा गया कि बैंक खाते, मकान और अन्य संपत्ति की जांच होगी। इसी बहाने लगातार भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस मिल जाएगी। इसी झांसे में पीड़ित लगातार पैसे भेजते रहे।
सच सामने आया तो दर्ज कराई शिकायत
पीड़ित ने बताया कि 19 जून तक अलग-अलग नामों से फोन आते रहे। जब कॉल पूरी तरह बंद हो गए, तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ। जांच में यह भी सामने आया कि करीब 70 लाख रुपये की व्यवस्था उन्होंने गोल्ड लोन और परिचितों से उधार लेकर की थी। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दी।
पुलिस की जांच जारी, लोगों के लिए भी सबक
साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर उन बैंक खातों की जांच शुरू कर दी है, जिनमें रकम भेजी गई थी। अधिकारियों का कहना है कि पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। यह मामला बताता है कि पुलिस, कोर्ट या सरकारी एजेंसी कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ कर खाते में पैसे जमा कराने के लिए नहीं कहती। ऐसे किसी भी कॉल पर घबराने के बजाय तुरंत आधिकारिक एजेंसी से पुष्टि करना और साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करना सबसे सुरक्षित कदम है।
