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देश में परिसीमन पर भड़का विवाद, नॉर्थ बनाम साउथ की नई जंग शुरू, अब आगे क्या ?

देश में परिसीमन पर भड़का विवाद, नॉर्थ बनाम साउथ की नई जंग शुरू, अब आगे क्या ?

देश में एक बार फिर परिसीमन को लेकर नॉर्थ बनाम साउथ का विवाद गहराता जा रहा है। दक्षिणी राज्यों में इस प्रस्ताव के खिलाफ माहौल गरम है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने इसे लेकर आक्रामक रुख अपनाया है और विरोध का आह्वान किया है। इन राज्यों को डर है कि नए परिसीमन के बाद लोकसभा में उनका प्रतिनिधित्व घट सकता है।

सीट बढ़ाने की योजना बनी वजह
दरअसल, केंद्र सरकार 2029 के चुनाव से पहले लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना बना रही है। इसमें 815 सीटें राज्यों और 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। यह कदम महिला आरक्षण को लागू करने के लिए उठाया जा रहा है, जिसमें 33 फीसदी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

तीन बड़े विधेयक से बढ़ा विवाद
सरकार ने 14 अप्रैल 2026 को तीन अहम विधेयकों का ड्राफ्ट पेश किया है, जिनमें संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्र शासित प्रदेश कानून शामिल हैं। ये विधेयक 16 से 18 अप्रैल के विशेष सत्र में पेश होंगे। परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा, जिससे सीटों का नया बंटवारा तय किया जाएगा।

दक्षिणी राज्यों की सबसे बड़ी चिंता
तमिलनाडु, तेलंगाना, केरल और कर्नाटक जैसे राज्य इस प्रस्ताव का सबसे ज्यादा विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस नेता पी चिदंबरम का दावा है कि दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व 24.3 प्रतिशत से घटकर करीब 20.7 प्रतिशत रह जाएगा। वहीं उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों की सीटें काफी बढ़ सकती हैं, जिससे राजनीतिक संतुलन बदल सकता है।

सीएम और नेताओं का विरोध तेज
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक की मांग की है। उनका कहना है कि केवल जनसंख्या के आधार पर सीटों का बंटवारा संघीय ढांचे को नुकसान पहुंचा सकता है। वहीं स्टालिन ने चेतावनी दी है कि अगर राज्य के साथ अन्याय हुआ तो बड़े स्तर पर आंदोलन होगा।

जनसंख्या आधारित फॉर्मूला बना मुद्दा
परिसीमन का आधार जनसंख्या है, जिसके तहत ज्यादा आबादी वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिलती हैं। दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, लेकिन अब उसी की सजा उन्हें कम प्रतिनिधित्व के रूप में मिल रही है। इससे क्षेत्रीय असंतुलन और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

सरकार का जवाब और तर्क
केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सीटों में बढ़ोतरी से हर राज्य को लाभ मिलेगा और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए यह जरूरी कदम है। सरकार के मुताबिक यह योजना संतुलित और सभी राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

राजनीतिक टकराव और बढ़ने के आसार
अब यह मुद्दा सिर्फ सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उत्तर और दक्षिण के बीच राजनीतिक टकराव का रूप लेता दिख रहा है। आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़कों तक इस पर घमासान देखने को मिल सकता है।

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