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छठ महापर्व का समापन: क्या करें, क्या न करें

छठ महापर्व का समापन: क्या करें, क्या न करें

लोक आस्था के अनुपम महापर्व छठ पूजा का चतुर्थ और अंतिम दिन 'उषा अर्घ्य' के साथ आज सफलतापूर्वक समापन हो गया। करोड़ों व्रतियों ने 36 घंटे के कठिन निर्जला उपवास के बाद उगते सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठी मइया से सुख-समृद्धि की कामना की। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और पारिवारिक एकता का भी प्रतीक है। लेकिन व्रत समाप्ति के बाद भी श्रद्धा की यह लहर थमनी नहीं चाहिए। पंडितों और शास्त्रों के अनुसार, व्रत खोलने के बाद कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक है, ताकि छठी मइया का आशीर्वाद अखंड रहे। आइए जानते हैं, व्रत समापन के बाद क्या करें और क्या न करें।

छठ पूजा के अंतिम दिन सुबह के उजाले में सूर्य को अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण कर व्रत तोड़ते हैं। इस दौरान शरीर को अचानक भारी आहार न देकर धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाना चाहिए, क्योंकि लंबे निर्जला उपवास से पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, व्रत तोड़ने के लिए सबसे पहले पानी, नारियल पानी या गुड़ का मीठा पानी पीना चाहिए। इसके बाद छठी मइया को अर्पित प्रसाद जैसे ठेकुआ, फल या खीर ग्रहण करें। यह न केवल धार्मिक रूप से शुभ है, बल्कि पोषण की दृष्टि से भी उचित।

व्रत समापन का यह क्षण पारिवारिक मिलन का प्रतीक होता है। सभी सदस्य प्रसाद बांटकर आशीर्वाद लें, लेकिन प्रसाद का सम्मान करें। इसे कभी फेंकें नहीं, क्योंकि ऐसा करना मइया को नाराज करने के समान माना जाता है। बचे हुए प्रसाद को पड़ोसियों, रिश्तेदारों या जरूरतमंदों में वितरित करें। अन्न की बर्बादी से बचें, जो हिंदू शास्त्रों में पाप मानी जाती है।

क्या करें

व्रत समाप्ति के बाद भी छठ की पवित्रता को बनाए रखना महत्वपूर्ण है। यहां कुछ प्रमुख 'क्या करें' के नियम दिए जा रहे हैं:

  1. शुद्धता का पालन जारी रखें: रोजाना स्नान-ध्यान करें, स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल और प्रसाद बनाने वाली जगह को हमेशा साफ-सुथरा रखें। यदि संभव हो, तो दैनिक रूप से सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें, खासकर भोजन से पहले। यह स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए लाभकारी है।
  2. ब्रह्मचर्य और संयम: व्रत के दौरान अपनाया गया ब्रह्मचर्य कुछ दिनों तक जारी रखें। क्रोध या विवाद से दूर रहें। घाट या घर पर किसी से झगड़ा न करें, अपशब्द न बोलें। यह पवित्रता बनाए रखने का आधार है।
  3. पूजा सामग्री का सम्मानजनक उपयोग: बची हुई सामग्री को व्यर्थ न जाने दें। फूलों को गमले में लगाएं या सूखाकर धूपबत्ती बनाएं। मिट्टी के दीयों को साफ कर घर की सजावट में इस्तेमाल करें। गन्ने का रस निकालकर मीठे चावल या खीर बनाएं, कच्चे केले से चिप्स तैयार करें या इलायची डालकर पकाएं। सेब-संतरे जैसे फलों से फ्रूट कस्टर्ड बनाकर परिवार के साथ साझा करें। बची सामग्री को बहते जल में प्रवाहित करें, लेकिन सम्मान से।
  4. स्वास्थ्यप्रद आहार: व्रत तोड़ने के बाद हल्का और पौष्टिक भोजन लें। हरी सब्जियां, दाल, चिकन या टोफू जैसे प्रोटीन स्रोत, किनोआ, ब्राउन राइस या ओट्स शामिल करें। हाइड्रेशन के लिए छाछ, हर्बल टी या फलों का जूस पिएं। यह कमजोरी दूर कर ऊर्जा प्रदान करेगा।
  5. पर्यावरण संरक्षण: छठ की भावना को जीवंत रखें। प्लास्टिक का उपयोग न करें, मिट्टी का चूल्हा अपनाएं। सूप या कोसी जैसी वस्तुओं को नया और अखंड रखें, जो शुभ फल देता है।

क्या न करें

छठी मइया की कृपा बनाए रखने के लिए कुछ निषेध भी हैं। इन्हें नजरअंदाज करने से पुण्य फल में कमी आ सकती है:

  1. तामसिक भोजन से परहेज: व्रत खोलने के बाद पूरे दिन प्याज, लहसुन, मांस, मछली, अंडे जैसे तामसिक आहार न लें। यह शुद्धता भंग करता है।
  2. भारी और अस्वास्थ्यकर भोजन न लें: तुरंत मीठा, तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड या नमकीन चीजें न खाएं। चाय-कॉफी से भी बचें, क्योंकि ये एसिडिटी या असंतुलन पैदा कर सकते हैं।
  3. अशुद्धता और विवाद: स्टील या प्लास्टिक के बर्तनों का उपयोग न करें। यदि कोई वस्तु अशुद्ध हो जाए, तो उसे पूजा में न लगाएं। प्रसाद का स्वाद न लें, क्योंकि यह अशुभ माना जाता है। क्रोध या बहस से दूर रहें।
  4. सामग्री की बर्बादी: पूजा के बाद कोसी, सूप या दउरा को फेंकें नहीं। इन्हें सम्मान से संभालें या प्रवाहित करें। फूलों को कूड़े में न डालें।
  5. अन्य निषेध: व्रत के बाद भी भूमि पर सोने की परंपरा कुछ दिनों तक निभाएं। टूटे-फूटे सूप का उपयोग न करें।

ये नियम न केवल धार्मिक, बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी उपयोगी हैं। निर्जला व्रत के बाद हल्का आहार पाचन को मजबूत बनाता है, जबकि शुद्धता मानसिक शांति प्रदान करती है। इस वर्ष छठ पूजा में लाखों व्रतियों ने इनका पालन किया, जिससे उत्सव और भव्य बना। पंडितों का कहना है कि व्रत समापन के बाद भी एक सप्ताह तक संयम रखने से वर्ष भर सुख-शांति मिलती है।

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