कॉकरोच जनता पार्टी बहुत कम समय में सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आई। इसके वीडियो और पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोग इससे जुड़ते दिखाई दिए। लेकिन अब पार्टी को लेकर नए सवाल खड़े होने लगे हैं। वजह है कि इसके आधिकारिक सोशल मीडिया खातों को लेकर विवाद सामने आया है। इसी के बाद यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या केवल डिजिटल लोकप्रियता किसी राजनीतिक प्रयोग को लंबे समय तक आगे ले जा सकती है।
एक्स खाते पर कार्रवाई
पार्टी के संस्थापक ने दावा किया कि उनके एक्स खाते को भारत में रोक दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह कदम कानूनी मांग के बाद उठाया गया। इसके साथ एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया गया जिसमें बड़ी संख्या में फॉलोअर्स दिखाई देने की बात कही गई। दावा किया गया कि कुछ ही दिनों में खाते ने दो लाख से ज्यादा लोगों को जोड़ लिया था और इसके बाद उस पर कार्रवाई हुई।
इंस्टाग्राम को लेकर दावा
एक्स खाते के बाद अब दूसरे मंच को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। पार्टी के संस्थापक ने आरोप लगाया कि उनके इंस्टाग्राम खाते तक पहुंचने की कोशिश की गई। हालांकि इन दावों को लेकर अलग अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया पर समर्थक और विरोधी दोनों पक्ष लगातार अपनी राय रख रहे हैं जिससे यह मुद्दा और चर्चा में आ गया है।
नया खाता फिर शुरू
खाता रोके जाने के बाद संस्थापक ने नया एक्स खाता बनाकर लोगों से जुड़ने की अपील भी की है। सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता पहले से काफी बड़ी बताई जा रही है। ऐसे में समर्थकों का कहना है कि डिजिटल मंच बदल सकते हैं लेकिन समर्थन खत्म नहीं होगा। वहीं आलोचकों का कहना है कि केवल ऑनलाइन चर्चा और वास्तविक राजनीतिक ताकत में बड़ा अंतर होता है।
सोशल मीडिया से आगे चुनौती
भारतीय राजनीति केवल सोशल मीडिया के सहारे आगे नहीं बढ़ती। जमीन पर संगठन तैयार करना कार्यकर्ताओं को जोड़ना और लोगों के बीच लगातार काम करना भी जरूरी माना जाता है। कई बार डिजिटल दुनिया की लोकप्रियता चुनावी समर्थन में बदलती नहीं दिखती। इसलिए किसी भी नए राजनीतिक प्रयास के लिए वास्तविक जनसंपर्क भी बड़ी परीक्षा माना जाता है।
अब सबसे बड़ा सवाल
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी सोशल मीडिया चर्चा से आगे बढ़ पाएगी या नहीं। अगर इसकी पहचान केवल डिजिटल मंचों तक सीमित रहती है तो भविष्य की राह मुश्किल हो सकती है। आने वाले समय में यह साफ होगा कि यह सिर्फ एक वायरल लहर थी या फिर इसे जमीनी पहचान भी मिल पाती है।
