बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से सटे दिल्ली के लाखों प्रवासी श्रमिकों और निवासियों के लिए छठ पूजा का त्योहार अब और भी यादगार होने जा रहा है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि यमुना नदी के किनारे 17 मॉडल घाट विकसित किए जाएंगे, जहां भक्त बिना किसी रुकावट के सूर्य देव की आराधना कर सकेंगे। इसके साथ ही, घाटों पर सफाई अभियान की शुरुआत हो चुकी है, जिसमें विधायक, सांसद और नगर पार्षद सक्रिय भूमिका निभाएंगे। यह कदम न केवल धार्मिक उत्साह को बढ़ावा देगा, बल्कि यमुना की सफाई और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास साबित होगा।
छठ पूजा, जो कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी से सप्तमी तक मनाया जाता है, सूर्य देव और छठी माई की पूजा का प्रतीक है। दिल्ली में यह त्योहार विशेष रूप से बिहारी समुदाय के लिए महत्वपूर्ण है, जहां लाखों लोग यमुना के तट पर खरना, कद्दू भगाई और सूर्य को अर्घ्य चढ़ाने के लिए इकट्ठा होते हैं। पिछले वर्षों में प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण यमुना तट पर पूजा पर प्रतिबंध लगने की स्थिति बनी थी, जिससे भक्तों में असंतोष फैला था। लेकिन इस बार सरकार ने पूर्व के सभी मुकदमों को वापस लेने का फैसला लिया है, ताकि भक्त निश्चिंत होकर पूजा कर सकें। मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा, "हमारी सरकार छठ पूजा को यमुना तट पर मनाने की अनुमति दे रही है। सभी पुराने केस वापस लिए जाएंगे और घाटों को मॉडल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।"
घोषणा के तहत, यमुना के विभिन्न हिस्सों में 17 घाटों का चयन किया गया है, जिनमें कालिंदी कुंज, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उद्यान, वसंत कुंज, ओखला, निजामुद्दीन और उषा किरण जैसे प्रमुख स्थान शामिल हैं। इन घाटों पर अस्थायी मंडप, शौचालय, पीने के पानी की सुविधा, बिजली कनेक्शन और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। विशेष रूप से, पर्यावरण-अनुकूल सामग्री का उपयोग किया जाएगा, जैसे प्लास्टिक-मुक्त पूजा और बायोडिग्रेडेबल थैलियां। सफाई अभियान के तहत, दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए), नगर निगम और पर्यावरण विभाग की टीमें मैदान में उतर चुकी हैं। अभियान में स्थानीय निवासियों को भी शामिल किया गया है, जो कचरा संग्रहण और जागरूकता कार्यक्रमों में भाग लेंगे।
मुख्यमंत्री ने मंगलवार को प्रधानमंत्री से मुलाकात में छठ पूजा की तैयारियों और 'क्लीन यमुना' पहल पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) में सुधार के कारण इस वर्ष यमुना का जल स्तर भी बेहतर है। कालिंदी कुंज घाट का हालिया निरीक्षण करते हुए गुप्ता ने कहा, "पिछले दिनों झाग से भरी यमुना अब साफ हो रही है। हमने फोम कंट्रोल यूनिट्स लगाए हैं और औद्योगिक अपशिष्ट पर सख्ती की है।" यह अभियान भाजपा सरकार की 'यमुना पुनरुद्धार योजना' का हिस्सा है, जो छठ पूजा से पहले शुरू की गई थी। योजना के तहत, नदी में प्रदूषणकारी नालों को सील किया जा रहा है और जल परीक्षण नियमित रूप से हो रहा है।
छठ पूजा की तैयारी में दिल्ली सरकार ने अन्य सुविधाओं पर भी ध्यान दिया है। घाटों पर चिकित्सा इकाइयां, एम्बुलेंस और अग्निशमन दस्ते तैनात किए जाएंगे। इसके अलावा, ट्रैफिक प्रबंधन के लिए दिल्ली ट्रैफिक पुलिस विशेष योजनाएं चला रही है, ताकि भक्तों को आने-जाने में कोई असुविधा न हो। बिहार भोजपुरी समाज और अन्य सांस्कृतिक संगठनों ने इस घोषणा का स्वागत किया है। समाज के एक पदाधिकारी ने कहा, "यह निर्णय हमारी लंबी मांग को पूरा करता है। अब हम बिना डर के पूजा कर सकेंगे।"
यमुना सफाई का यह अभियान केवल छठ के लिए सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय की चुनौती है। दिल्ली में यमुना नदी का प्रदूषण स्तर लंबे समय से चिंता का विषय रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, नदी में अमोनिया और बेंजीन जैसे रसायनों की मात्रा अभी भी अधिक है, लेकिन हालिया प्रयासों से सुधार दिख रहा है। सरकार ने 2025 तक यमुना को स्वच्छ बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स (एसटीपी) का विस्तार शामिल है। छठ पूजा इस दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम है, जो समुदाय को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करेगा।
पिछले वर्षों की तुलना में इस बार तैयारी अधिक व्यवस्थित लग रही है। 2024 में कोविड प्रतिबंधों और प्रदूषण के कारण कई घाट बंद रहे थे, लेकिन अब एक्यूआई 200 से नीचे आ चुका है, जो हवा की गुणवत्ता के लिए सकारात्मक संकेत है। भाजपा की इस पहल को विपक्ष ने भी सराहा है, हालांकि कुछ ने इसे चुनावी स्टंट बताया। आम आदमी पार्टी के एक नेता ने कहा, "सफाई तो जरूरी है, लेकिन स्थायी समाधान पर ध्यान दें।" फिर भी, भक्तों में उत्साह का माहौल है। दिल्ली के विभिन्न इलाकों में छठ समितियां सक्रिय हो चुकी हैं, जो लोकगीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजना बना रही हैं।
छठ पूजा न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह त्योहार परिवारों को एकजुट करता है और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता है। यमुना तट पर सूर्योदय और सूर्यास्त के समय अर्घ्य चढ़ाने की परंपरा दिल्ली के प्रवासी समुदाय के लिए भावनात्मक महत्व रखती है। सरकार की इस पहल से न केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान होगा, बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि मॉडल घाट पर्यावरण जागरूकता के केंद्र बन सकते हैं, जहां भक्तों को प्लास्टिक मुक्त पूजा के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
अंत में, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की यह घोषणा दिल्ली की सांस्कृतिक विविधता को मजबूत करने वाली है। छठ पूजा 30 अक्टूबर से शुरू हो रही है, और तब तक सफाई अभियान पूर्ण गति पकड़ लेगा। उम्मीद है कि यमुना के तट पर साफ-सुथरे घाटों पर लाखों भक्तों की आराधना से नदी को नई ऊर्जा मिलेगी। यह न केवल एक त्योहार होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की नई शुरुआत भी।



