GST में बड़े बदलाव की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, मंत्रियों के समूह (गोएम) ने केंद्र सरकार की उस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है जिसमें जीएसटी की मौजूदा चार स्लैब संरचना को सरल बनाकर केवल दो मुख्य स्लैब - 5% और 18% - में बदलने का सुझाव दिया गया है।
गोएम ने 12% और 28% स्लैब को पूरी तरह से हटाने की सिफारिश की है। यह फैसला बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को घोषित किया। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर जीएसटी काउंसिल की बैठक में लगनी है, जो संभवतः सितंबर या अक्टूबर में होगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के भाषण में 'नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी रिफॉर्म्स' की घोषणा की थी, जिसे 'दिवाली गिफ्ट' के रूप में पेश किया गया। इस सुधार का उद्देश्य जीएसटी को सरल बनाना, आम आदमी पर कर का बोझ कम करना और उपभोग को बढ़ावा देना है। केंद्र सरकार का मानना है कि इससे मांग बढ़ेगी, रोजगार सृजन होगा और निर्यात प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
जीएसटी स्लैब में क्या बदलाव?
वर्तमान में जीएसटी चार स्लैब में वसूला जाता है: 5%, 12%, 18% और 28%। 12% स्लैब के 99% आइटम्स को 5% स्लैब में शिफ्ट किया जाएगा। 28% स्लैब के 90% आइटम्स को 18% स्लैब में स्थानांतरित किया जाएगा। कुछ चुनिंदा आइटम्स के लिए 1% से कम की रियायती दर लागू होगी, जैसे सोना (वर्तमान 3%) और सेमी-प्रेशियस स्टोन्स (0.25%)। 5-7 'सिन गुड्स' (जैसे तंबाकू और गुटखा) पर 40% की विशेष दर लगाई जाएगी, बिना किसी अतिरिक्त सेस के। इससे जीएसटी की संरचना सरल हो जाएगी, वर्गीकरण विवाद कम होंगे और इनपुट टैक्स क्रेडिट का संचय घटेगा। केंद्र ने राज्यों को राजस्व संबंधी चिंताओं का आश्वासन दिया है कि उपभोग बढ़ने से राजस्व में वृद्धि होगी।
क्या होगा सस्ता?
12% स्लैब से 5% में शिफ्ट होने वाले आइटम्स (सस्ते होंगे)
अधिकतर दैनिक उपयोग की वस्तुएं, जैसे टूथपेस्ट, साबुन, शैंपू। भुजिया, नमकीन, आलू चिप्स, केचअप, जैम, मेयोनीज, पैकेज्ड जूस, पास्ता, नूडल्स, बटर, कंडेंस्ड मिल्क, घी, चीज, मिल्क-बेस्ड बेवरेजेस। अन्य समान नमकीन उत्पादों पर एकसमान दर लागू होगी।
28% स्लैब से 18% में शिफ्ट होने वाले आइटम्स (सस्ते होंगे):
एस्पिरेशनल गुड्स: छोटी कारें, एयर कंडीशनर (एसी), टेलीविजन (टीवी)। अन्य व्हाइट गुड्स: रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन आदि (जो वर्तमान में 18% या 28% पर हैं, उन्हें कम दर पर लाया जा सकता है)।
स्वास्थ्य और जीवन बीमा प्रीमियम पर जीएसटी से पूर्ण छूट का प्रस्ताव, जो वर्तमान 18% से घटकर शून्य हो सकता है। इससे बीमा अधिक किफायती होगा। कुछ दैनिक उपयोग की वस्तुओं पर कर शून्य किया जा सकता है। इन बदलावों से आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, खासकर मध्यम वर्ग को, क्योंकि एस्पिरेशनल उत्पाद सस्ते होंगे।
क्या होगा महंगा?
अधिकतर आइटम्स सस्ते होने के बावजूद, कुछ 'सिन गुड्स' पर कर बढ़ जाएगा, तंबाकू, गुटखा जैसे 5-7 उत्पादों पर 40% की विशेष दर लगेगी। वर्तमान में ये 28% प्लस सेस पर हैं, लेकिन नई दर से इनकी कीमत बढ़ सकती है। लग्जरी गुड्स या अन्य सिन आइटम्स जो 40% स्लैब में आएंगे, महंगे हो सकते हैं। हालांकि, ऐसे आइटम्स की संख्या बहुत कम है, और उद्देश्य स्वास्थ्य हानि पहुंचाने वाले उत्पादों पर कर बढ़ाना है।



