महीनेें की शुरूआत एक बड़ी सौगात लेकर आया है 4 सितंबर 2025 को GST काउंसिल की हालिया बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में एक ऐतिहासिक फैसला लिया गया है, जिसे आम जनता के लिए 'दिवाली गिफ्ट' के रूप में देखा जा रहा है। इस बैठक में जीएसटी दरों में बड़े बदलाव किए गए हैं, जिसमें 12% और 28% के टैक्स स्लैब को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब केवल 5% और 18% के दो मुख्य टैक्स स्लैब रहेंगे। इसके साथ ही, 35 आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी को शून्य (0%) कर दिया गया है, जिससे आम आदमी को काफी राहत मिलने की उम्मीद है। ये बदलाव 22 सितंबर 2025 से लागू होंगे।
जीएसटी काउंसिल ने टैक्स ढांचे को सरल करने के लिए 12% और 28% के स्लैब को हटाने का निर्णय लिया है। अब अधिकांश वस्तुएं और सेवाएं 5% या 18% के स्लैब में आएंगी। इसके अलावा, कुछ लग्जरी और 'सिन गुड्स' (जैसे तंबाकू, पान मसाला, और हाई-एंड मोटरसाइकिल) पर 40% की नई उच्च टैक्स दर लागू की गई है। हालांकि, तंबाकू, सिगरेट, और बीड़ी जैसे उत्पादों पर अभी 28% की पुरानी दर लागू रहेगी, जब तक कि केंद्र और राज्यों के बीच मुआवजा सेस से संबंधित सभी लोन और ब्याज का भुगतान पूरा नहीं हो जाता।
इन 35 वस्तुओं पर अब '0' टैक्स
जीएसटी काउंसिल ने रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी कई वस्तुओं और स्वास्थ्य सेवाओं पर GST को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। जैसे की...
खाद्य उत्पाद
- छेना या पनीर (प्री-पैकेज्ड और लेबल्ड)
- UHT (अल्ट्रा-हाई टेम्परेचर) दूध
- पिज्जा ब्रेड, खाखरा, चपाती, रोटी, पराठा, परोट्टा और अन्य भारतीय ब्रेड (किसी भी नाम से)
- अनपैकेज्ड और गैर-लेबल्ड खाद्य उत्पाद (जैसे चावल, गेहूं, और अन्य अनाज)
स्वास्थ्य सेवाएं और दवाएं
- 33 जीवन रक्षक दवाएं, जिनमें कैंसर, दुर्लभ बीमारियों, और गंभीर क्रॉनिक रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। इनमें Agalsidase Beta, Imiglucerase, Eptacog alfa, Onasemnogene abeparvovec, Asciminib, Mepolizumab, और Atezolizumab जैसी दवाएं शामिल हैं। पहले इन पर 12% जीएसटी लगता था, जो अब शून्य कर दिया गया है।
- चिकित्सा उपकरण जैसे चश्मा, गॉज, बैंडेज, और सर्जिकल दस्ताने।
अन्य आवश्यक वस्तुएं
- शैक्षिक सामग्री जैसे किताबें और शिक्षण सहायक सामग्री।
- कृषि उपकरण जैसे मिट्टी की तैयारी के लिए उपयोग होने वाले फिक्स्ड-स्पीड डीजल इंजन।
- उर्वरक इनपुट जैसे सल्फ्यूरिक एसिड, नाइट्रिक एसिड, और अमोनिया (18% से घटाकर 5%)।
इन वस्तुओं पर जीएसटी शून्य करने का मकसद आम जनता, विशेष रूप से मध्यम और निम्न आय वर्ग, को आर्थिक राहत प्रदान करना है।
अन्य प्रमुख वस्तुओं पर टैक्स में कमी
जीएसटी काउंसिल ने कई रोजमर्रा की वस्तुओं पर भी टैक्स दरों को कम किया है, जिससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त लाभ होगा:
- घी, नट्स, और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर: 12% से घटाकर 5%।
- नमकीन, भुजिया, मिक्सचर, और अन्य पैकेज्ड स्नैक्स: 12% से घटाकर 5%।
- 2500 रुपये तक के जूते और कपड़े: 12% से घटाकर 5%।
- पर्सनल केयर उत्पाद जैसे हेयर ऑयल, शैंपू, टूथपेस्ट, और डेंटल फ्लॉस: 12% या 28% से घटाकर 5% या 18%।
- प्रोसेस्ड फूड जैसे पास्ता, इंस्टेंट नूडल्स, कोको बटर, और चॉकलेट: 12% या 28% से घटाकर 5% या 18%।
- कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कुछ टेलीविजन, वॉशिंग मशीन, रेफ्रिजरेटर, और एयर कंडीशनर: 28% से घटाकर 18%।
- वाहन: 350cc तक की मोटरसाइकिल, थ्री-व्हीलर, और छोटी कारें अब 18% की दर से टैक्सेबल होंगी, पहले यह 28% थी।
जीएसटी 2.0 एक नया युग
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2025 को अपने स्वतंत्रता दिवस संबोधन में 'जीएसटी 2.0' की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य टैक्स ढांचे को सरल बनाना और आम जनता पर टैक्स का बोझ कम करना है। इस नई प्रणाली में न केवल टैक्स स्लैब को कम किया गया है, बल्कि तकनीकी सुधारों के जरिए जीएसटी पंजीकरण, रिटर्न फाइलिंग, और रिफंड प्रक्रिया को भी आसान बनाया गया है। प्री-फिल्ड रिटर्न और स्वचालित रिफंड सिस्टम से व्यापारियों और उपभोक्ताओं को लाभ होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से उपभोक्ता खपत बढ़ेगी, जिससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। हालांकि, सरकार को कुछ राजस्व नुकसान हो सकता है, लेकिन बढ़ती खपत और बेहतर अनुपालन से इसकी भरपाई होने की उम्मीद है। डेलॉइट इंडिया के पार्टनर एम.एस. मणि ने कहा, "28% स्लैब को केवल सुपर लग्जरी और सिन गुड्स तक सीमित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।



