न्यूज प्लस डेस्क, कानपुर। श्री बांके बिहारी जी परिवार सिमित कानपुर के की ओर से मोतीझील में श्रीगवत कथा का विशाल आयोजन किया जा रहा है। कथा व्यास भागवत रत्न आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोवामी जी महाराज ने कथा में भक्त प्राप्ति क्रम का वर्णन करते हुए बताया कि श्रद्धा, शास्त्र श्रवण, रुचि, सेवा और रति हैं। इनके द्वारा भक्ति प्राप्त की जा सकती है।
गोवामी जी ने आज की युवा पीढ़ी को माता पिता की सेवा और देशभक्ति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि देवी मां के मंदिर में मातारानी को चुनरी चढ़ाने के साथ-साथ ही अपनी मां और अपने पिता की सदैव सेवा और सम्मान करें जिस पुत्र माता पिता सुखी और प्रसन्न रहते हें और उनका सम्मान किया जाता है, उसे प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। वह व्यक्ति जीवन में निरंतर प्रगित कर नये नये सोपान तय करता है। माता-पिता का भी यह कर्व्तय है कि बच्चों को देश प्रेम और देशभक्ति की शिक्षा दे। जिस मातृभूमि में हमने जन्म लिया है उसके प्रति भी हमारे किछ कर्तव्य हैं।
श्रीमद्भागवत महापुराण का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह कलिकाल के समस्त पापों का समूल नाश करती है। श्रीमद्भागवत में सभी प्रश्नों और शंकाओं का समाधान विराजमान है। कथा के श्रवण से भक्ति, शक्ति और मुक्ति प्राप्तत होती है। जहां भी श्री भागवत की कथा होती है वहां भगवान अवश्य उपस्थित होकर अपनी कथा का श्रवण करते हें। जो भक्त लज्जा त्याग कर संसार की परवाह न करते हुए मेरे लिए अश्रु बहाता है और नृय करता है वह अपने साथ-साथ ही संपूर्ण संसार को भी पवित्र कर देता है। श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि सदैव सत्य का पालन करें। कथा व्यास श्री गोवामी जी ने कहा कि सनातन धर्म सदा सत्य है। सनातन धर्म के अंतर्गत सत्य मार्ग, अहिंसा, प्रभु सेवा, अच्छे आचरण आदि पर बहुत जोर दिया गया है। महाराज जी के श्रीमुख से कथा रस और मधुर भजन - कर दो कर दो नैया पार मेरे बांके बिहारी, राम नाम के हीरे मोती, नाम का सुमिरन किया करो, आदि सुनकर श्रोतागण झूम उठे और मंत्रमुध होकर नृय करने लगे। कथा आयोजन में मुख्य अतिथि सांसद रमेश अवथी, महापौर श्रीमती प्रमिला पांडेय उपस्थित रहे। कथा के मुख्य प्रसंग श्रीमद्भागवत महात्म्य, गोकर्ण-धुंधकारी कथा, श्री शुकदेव जी आगमन थे। आयोजन में मुख्य रूप से संजय गुता, पंकज बंका, विनोद मुरारका, अनुपम अग्रवाल, अंशुल गुता, राम किशन अग्रवाल, कृष्ण तुलस्यान, अजय अग्रवाल, विजय पल उपस्थित रहे।



