भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया को और तेज बनाने के लिए एक नई व्यवस्था शुरू की है। आज से इस नए सिस्टम का ट्रायल शुरू हो गया है, और कल यानी 04 अक्टूबर 2025 से चेक कुछ ही घंटों में क्लियर हो जाएंगे। यह बदलाव चेक ट्रंकेशन सिस्टम (सीटीएस) के तहत किया जा रहा है, जो बैच प्रोसेसिंग से कंटीन्यूअस क्लियरिंग की ओर शिफ्ट करेगा।
पहले चेक क्लियरेंस में 1-2 दिन लगते थे, लेकिन अब डिजिटल पेमेंट्स जैसे यूपीआई, एनईएफटी और आरटीजीएस की बढ़ती लोकप्रियता के बीच चेक अभी भी व्यापक रूप से इस्तेमाल होते हैं। आरबीआई का यह कदम चेक क्लियरेंस को घंटों में पूरा करने का लक्ष्य रखता है, जिससे ग्राहकों को तेजी से फंड्स उपलब्ध होंगे और बिजनेस कैश फ्लो बेहतर होगा। इतिहास में चेक क्लियरेंस की प्रक्रिया में कई बदलाव आए हैं - 1980 से पहले मैनुअल प्रोसेसिंग में एक हफ्ता लगता था, 1980 में एमआईसीआर सॉर्टिंग से 1-3 दिन, 2008 में सीटीएस से एक दिन, और 2021 में नेशनवाइड ग्रिड से टी+1 क्लियरिंग। अब यह अगला कदम है।
नई व्यवस्था कैसे काम करेगी?
04 अक्टूबर से, 10 बजे सुबह से 4 बजे दोपहर तक जमा किए गए चेक को तुरंत स्कैन किया जाएगा और क्लियरिंग के लिए भेजा जाएगा। बैंकों के बीच सेटलमेंट हर घंटे 11 बजे से होगा। पेइंग बैंक को 7 बजे शाम तक कन्फर्मेशन देना होगा, वरना चेक ऑटो-अप्रूव हो जाएगा। चेक की इमेज और एमआईसीआर डेटा क्लियरिंग हाउस को भेजा जाएगा, जो ड्रावी बैंक को फॉरवर्ड करेगा। सेटलमेंट के बाद प्रेजेंटिंग बैंक को सूचना मिलेगी और अमाउंट एक घंटे में क्रेडिट हो जाएगा।
दो चरणों में लागू होगी व्यवस्था
आरबीआई इस सिस्टम को दो फेज में रोलआउट कर रहा है:
- फेज 1 (04 अक्टूबर 2025 से 02 जनवरी 2026 तक): सभी चेक के लिए 7 बजे शाम तक कन्फर्मेशन की डेडलाइन। अगर नहीं हुआ तो ऑटो-अप्रूवल।
- फेज 2 (03 जनवरी 2026 से): बैंकों को सिर्फ तीन घंटे का समय मिलेगा। उदाहरण के लिए, 10-11 बजे के बीच आया चेक 2 बजे तक कन्फर्म करना होगा, वरना ऑटो-अप्रूव।
आज यानी 03 अक्टूबर को स्पेशल ट्रायल रन हो रहा है ताकि सिस्टम की क्षमता का टेस्ट किया जा सके और सुचारू रोलआउट सुनिश्चित हो।
ग्राहकों और बैंकों पर प्रभाव
ग्राहकों के लिए यह बड़ी राहत है - फंड्स जल्दी उपलब्ध होंगे, पेमेंट्स तेज होंगे और पूरे देश में एकसमान स्पीड मिलेगी। हालांकि, पर्याप्त बैलेंस बनाए रखना जरूरी है ताकि चेक बाउंस न हो। चेक डिटेल्स जैसे अमाउंट (शब्दों और अंकों में), डेट, पेयी नाम, कोई ओवरराइटिंग न हो और सिग्नेचर मैच करे, ये सुनिश्चित करें।
पॉजिटिव पे सिस्टम का इस्तेमाल करें, जो 50,000 रुपये से ऊपर के चेक के लिए रेकमेंडेड है और 5 लाख से ऊपर अनिवार्य। इसमें चेक डिटेल्स पहले से बैंक को बताएं ताकि वेरिफिकेशन हो सके। अगर मैच नहीं हुआ तो चेक रिजेक्ट हो सकता है। बैंकबाजार डॉट कॉम के सीईओ अधिल शेट्टी ने कहा, “कंटीन्यूअस क्लियरिंग अप्रोच एक स्वागतयोग्य बदलाव है, खासकर डिजिटल पेमेंट्स की बढ़ती उपयोगिता के साथ। चेक अभी भी व्यापक हैं और तेज क्लियरेंस से ग्राहक अनुभव बेहतर होगा और डिले से जुड़े रिस्क कम होंगे।
यह नई व्यवस्था पेमेंट सिस्टम को और मजबूत बनाएगी, सुरक्षा बढ़ाएगी और एरर्स कम करेगी। आरबीआई के तीन ग्रिड्स - दिल्ली, मुंबई और चेन्नई - के तहत सभी ब्रांचेज पर लागू होगी। ग्राहकों को सलाह है कि वे नए नियमों का पालन करें ताकि कोई असुविधा न हो।



