देशभर में आज दीपावली का पावन पर्व मनाया जा रहा है। 'प्रकाश का त्योहार' कहे जाने वाले इस उत्सव ने पूरे भारत को रोशनी के दीयों से जगमगा दिया है। बाजारों में चहल-पहल, मिठाइयों की मिठास और पटाखों की हल्की-फुल्की आवाज ने वातावरण को खुशी से सराबोर कर दिया है। लेकिन इस बार की दीपावली की चमक का केंद्र बिंदु है उत्तर प्रदेश का पवित्र शहर अयोध्या, जहां राम जन्मभूमि मंदिर में भक्तों की अपार भीड़ उमड़ पड़ी है। कल शाम को हुए दीपोत्सव ने दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर दुनिया को चकित कर दिया, जबकि आज सुबह भगवान रामलला के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी-लंबी कतारें लगी रहीं।
अयोध्या में दीपोत्सव 2025 की भव्यता का अनुमान लगाना मुश्किल था। सरयू नदी के तट पर राम की पैड़ी पर 26 लाख 17 हजार 215 दीए जलाए गए, जो एक ही स्थान पर सबसे अधिक दीयों की संख्या का नया विश्व रिकॉर्ड है। इसके अलावा, 2,128 पुजारियों ने एक साथ आरती का प्रदर्शन किया, जो एक और गिनीज रिकॉर्ड बन गया। यह नौवां दीपोत्सव था, जो भगवान राम के जीवन और उनकी विजय का प्रतीक है। शहर की सड़कें रोशनी से नहा उठीं, जबकि लेजर शो, ड्रोन डिस्प्ले और इको-फ्रेंडली आतिशबाजी ने आधुनिकता और परंपरा का अनोखा संगम रचा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल शाम दीपोत्सव में शिरकत की और आज सुबह हनुमानगढ़ी मंदिर पहुंचकर भगवान हनुमान के दर्शन किए। इसके बाद वे राम जन्मभूमि मंदिर गए, जहां उन्होंने रामलला की विशेष पूजा-अर्चना की। सीएम योगी ने कहा, "2017 में जब हमने पहला दीपोत्सव मनाया, तो हमारा उद्देश्य था कि दुनिया देखे कि अयोध्या ने भगवान राम का कैसे स्वागत किया। आज लाखों दीए जलाकर हम आस्था की जीत का प्रतीक स्थापित कर रहे हैं। सत्य को कष्ट दिया जा सकता है, लेकिन पराजित नहीं किया जा सकता।" उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि वे जो राम भक्तों पर गोलियां चलाते थे, वे अब राम मंदिर की भव्यता को रोक नहीं सके।
राम मंदिर परिसर में आज सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ जमा हो गई। देश-विदेश से आए श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते नजर आए। एक बुजुर्ग भक्त, रामेश्वर प्रसाद (65 वर्षीय, लखनऊ से), ने बताया, "राम मंदिर का निर्माण हमारी आस्था का प्रतीक है। इस दीपावली पर यहां आकर लगता है जैसे स्वयं भगवान राम ने हमें बुलाया हो। भीड़ भले ही ज्यादा हो, लेकिन मन को शांति मिली है।" मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा, "यह दीपावली राम जन्मभूमि के लिए विशेष है। भक्तों की यह भीड़ आस्था की लहर है, जो सदियों की प्रतीक्षा का फल है।"
अयोध्या के बाजारों में भी रौनक छाई हुई है। रामकथा कुंज और लता मंगेशकर चौक के आसपास के बाजारों में रामलला की मूर्तियां, दिवाली सजावट की सामग्री, मिठाइयां और पारंपरिक वस्त्रों की खरीदारी जोरों पर है। बच्चे रामलला की छोटी-छोटी मूर्तियां खरीदते नजर आ रहे हैं, जो इस बार सबसे ज्यादा बिक रही हैं। एक दुकानदार, मोहन लाल, ने कहा, "पिछले साल से दोगुनी बिक्री हो रही है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से व्यापार चमक गया है।" सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अयोध्या में 23.82 करोड़ पर्यटक आ चुके हैं, जो दीपोत्सव की सफलता का प्रमाण है।
दीपोत्सव के आयोजन में सांस्कृतिक विविधता भी झलकी। 22 झांकियों वाली शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें रामायण के प्रसंगों को दर्शाया गया। पांच विदेशी रामलीला मंडलियों ने मंचन किया, जिसमें रूसी कलाकारों की रामलीला ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रामकथा पार्क में पुष्पक विमान का उतरना और ड्रोन शो ने बच्चों को विशेष रूप से आकर्षित किया। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई, जिसमें आईडी कार्ड धारकों को ही घाटों पर प्रवेश की अनुमति दी गई।
देश के अन्य हिस्सों में भी दीपावली की धूम है। दिल्ली के चांदनी चौक और मुंबई के क्रॉफर्ड मार्केट जैसे पारंपरिक बाजारों में खरीदारी का सिलसिला रात भर चला। गुवाहाटी और गोवा में नरकासुर की मूर्ति दहन की परंपरा निभाई गई, जबकि पर्यावरण-अनुकूल पटाखों का उपयोग बढ़ा। दिल्ली-एनसीआर में मेट्रो ने विशेष त्योहारी शेड्यूल चलाया, और ट्रैफिक डायवर्जन से शहर सुचारू रूप से चले। सोने-चांदी की खरीदारी में भी उछाल आया, जो समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
इस दीपावली का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह अमावस्या तिथि पर मनाई जा रही है, जो 20 अक्टूबर को दोपहर 3:44 बजे से शुरू होकर 21 अक्टूबर तक चलेगी। अधिकांश हिंदू पंचांगों के अनुसार, लक्ष्मी पूजा आज शाम 7:08 से 8:18 बजे तक का शुभ मुहूर्त है।



