logo

header-ad
header-ad
अयोध्या के दीपोत्सव की चमक के बाद काशी में देव दिवाली की भव्य तैयारी: 25 लाख दीयों से जगमगाएंगे घाट

अयोध्या के दीपोत्सव की चमक के बाद काशी में देव दिवाली की भव्य तैयारी: 25 लाख दीयों से जगमगाएंगे घाट

अयोध्या में हाल ही में संपन्न हुए दीपोत्सव की भव्यता ने जहां दुनिया भर में रामनगरी की रोशनी का रिकॉर्ड कायम किया, वहीं अब काशी की बारी है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी वाराणसी में देव दिवाली की तैयारियां जोरों पर हैं। कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर 3 से 5 नवंबर तक गंगा के 84 घाटों पर 25 लाख से अधिक दीये जलाए जाएंगे, जो शहर को एक दिव्य नदी की तरह जगमगा देंगे। यह उत्सव न केवल आध्यात्मिक उल्लास का प्रतीक होगा, बल्कि आधुनिक तकनीक के साथ परंपरा का अनूठा संगम भी पेश करेगा।

अयोध्या के दीपोत्सव ने 26 लाख 17 हजार से अधिक दीयों की रोशनी से गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था, जो सरयू नदी के 56 घाटों पर सजाए गए थे। अब काशी में यह संख्या 25 लाख के आसपास होगी, लेकिन यहां की विशेषता गंगा की लहरों पर तैरते दीयों और देवताओं के अवतरण की पौराणिक कथा होगी। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग ने व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं। घाटों की सफाई से लेकर ट्रैफिक प्रबंधन तक सब कुछ सुनियोजित है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, "देव दिवाली केवल रोशनी का त्योहार नहीं, बल्कि काशी की आत्मा का प्रतिबिंब है। इस वर्ष आगंतुकों को आध्यात्मिकता और नवाचार का असाधारण मिश्रण देखने को मिलेगा, जो उनकी यात्रा को अविस्मरणीय बना देगा।

देव दिवाली का महत्व

देव दिवाली, जिसे देव दीपावली भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु सहित सभी देवता धरती पर अवतरित होते हैं और गंगा स्नान कर आशीर्वाद बांटते हैं। वाराणसी में यह उत्सव विशेष रूप से भव्य होता है, क्योंकि यहां गंगा के घाटों पर लाखों दीये जलाकर नदी देवी को अर्पित किए जाते हैं। मान्यता है कि इन दीयों की रोशनी से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। इस वर्ष 5 नवंबर को मुख्य पूजा होगी, लेकिन उत्सव की धूम 3 नवंबर से शुरू हो जाएगी।

पर्यटन सूचना अधिकारी नितिन कुमार ने बताया, "घाटों पर सफाई और रोशनी की व्यवस्था तेजी से हो रही है। देव दिवाली से पहले 1 से 4 नवंबर तक चार दिवसीय गंगा महोत्सव आयोजित किया जाएगा, जिसमें स्थानीय संगीत, नृत्य और कला प्रदर्शनियां होंगी। ये कार्यक्रम काशी की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत करेंगे।" महोत्सव में बनारसी ठुमरी, कजरी और कथक नृत्य जैसे पारंपरिक कलाओं का प्रदर्शन होगा, जो पर्यटकों को आकर्षित करेगा।

25 लाख दीयों की भव्य सजावट

इस वर्ष देव दिवाली में 25 लाख दीयों की संख्या एक नया आयाम जोड़ेगी। इनमें से करीब 10 लाख दीये राज्य सरकार द्वारा लगाए जाएंगे, जबकि शेष स्थानीय घाट समितियों और स्वयंसेवकों द्वारा सजाए जाएंगे। दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट, चेतसिंह घाट और मणिकर्णिका घाट जैसे प्रमुख स्थलों पर दीये तटों के दोनों ओर सजे होंगे। विशेष रूप से गाय के गोबर से बने एक लाख से अधिक पर्यावरण-अनुकूल दीये उपयोग किए जाएंगे, जो उत्सव को हरा-भरा बनाएंगे। स्वयंसेवक संगठन जैसे आर्य समाज और स्थानीय एनजीओ इनकी व्यवस्था में जुटे हैं।

अयोध्या के दीपोत्सव की तरह यहां भी रोशनी का यह सैलाब पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय होगा। लेकिन काशी की खासियत गंगा आरती है, जो सायं काल में हजारों दीयों के बीच होती है। इस बार आरती के दौरान ड्रोन शो भी जोड़ा गया है, जो देवताओं की कथाओं को आकाश में चित्रित करेगा।

3डी शो और आतिशबाजी

देव दिवाली को आधुनिक रंग देने के लिए चेतसिंह घाट और गंगा द्वार पर 3डी प्रोजेक्शन मैपिंग और लेजर शो का आयोजन होगा। यह 25 मिनट का कार्यक्रम होगा, जिसमें 17 मिनट तक प्रोजेक्शन मैपिंग चलेगी और उसके बाद 8 मिनट का लेजर सीक्वेंस। शो गंगा, भगवान शिव, काशी और देव दिवाली की पवित्र कथाओं को जीवंत करेगा। प्राचीन घाटों को कैनवास बनाकर यह तकनीक मिथकों को आधुनिक रूप देगी।

इसके अलावा, गंगा नदी पर 1.5 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में 10 मिनट का कोरियोग्राफ्ड आतिशबाजी शो होगा। इको-फ्रेंडली ग्रीन पटाखों का उपयोग किया जाएगा, जो कंप्यूटर नियंत्रित होंगे और 200 मीटर ऊंचाई तक पहुंचेंगे। यह शो अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और स्थिरता मानकों पर आधारित है। अधिकारियों का अनुमान है कि 10 लाख से अधिक श्रद्धालु और पर्यटक इस भव्यता का हिस्सा बनेंगे।

भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

व्यापक तैयारियों के बीच सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस ने ट्रैफिक डायवर्जन प्लान तैयार किया है। घाटों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी और मेडिकल टीम तैनात होंगी। पार्किंग व्यवस्था के लिए लैंटर्ना स्टेडियम और अन्य स्थलों का उपयोग होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया जा रहा है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

देव दिवाली उत्तर प्रदेश पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। अयोध्या के बाद काशी का यह उत्सव धार्मिक पर्यटन को मजबूत करेगा। होटल एसोसिएशन के अनुसार, इस दौरान 80% से अधिक बुकिंग हो चुकी है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटक भी बढ़ रहे हैं, जो योग, ध्यान और सांस्कृतिक अनुभवों के लिए आकर्षित हो रहे हैं।

काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के बाद शहर पहले ही वैश्विक पटल पर है। देव दिवाली इसकी चमक को और बढ़ाएगा। जैसे अयोध्या ने राम मंदिर के बाद पर्यटन में वृद्धि देखी, वैसे ही काशी में भी यह उत्सव आर्थिक उछाल लाएगा। स्थानीय कारीगरों को दीये, मूर्तियां और सजावट सामग्री बेचने का अवसर मिलेगा।

Leave Your Comment