इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। न्यायिक सुधार को लेकर हुए जनमत संग्रह में करीब 54 प्रतिशत लोगों ने सरकार के खिलाफ वोट किया है। यह पहली बार है जब 2022 के बाद मेलोनी को जनता से इतना बड़ा विरोध मिला है। इस नतीजे के बाद अब उनकी नीतियों और फैसलों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
क्यों बदला जनता का मूड
इटली में जनता के रुख में आए इस बदलाव के पीछे कई वजहें बताई जा रही हैं। सबसे बड़ी वजह आर्थिक दबाव है, खासकर ऊर्जा की बढ़ती कीमतें। आम लोगों का कहना है कि बिजली और ईंधन के बढ़ते खर्च ने उनकी जेब पर भारी असर डाला है। इसी नाराजगी का असर वोटिंग में साफ दिखाई दिया है।
जंग का असर भी माना जा रहा कारण
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और युद्ध का असर भी इटली की राजनीति पर पड़ा है। युद्ध के कारण ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ी है, जिससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई। जनता को डर है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो इटली भी बड़े संकट में फंस सकता है।
ट्रंप से नजदीकी पड़ी भारी
मेलोनी की अमेरिकी नेता ट्रंप के साथ नजदीकी भी उनके खिलाफ जाती दिख रही है। विपक्ष ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया और जनता के बीच यह धारणा बनी कि सरकार की नीतियां देश को जोखिम में डाल सकती हैं। मेलोनी इस धारणा को तोड़ने में सफल नहीं रहीं, जिसका असर चुनावी नतीजों में देखने को मिला।
विपक्ष ने मुद्दे को भुनाया
इटली में विपक्षी दलों ने इस जनमत संग्रह को सरकार के खिलाफ एक बड़ा मौका बना दिया। उन्होंने इसे लोकतंत्र और न्याय व्यवस्था से जोड़कर जनता के सामने रखा। इसी वजह से बड़ी संख्या में लोगों ने सरकार के खिलाफ मतदान किया, जिससे मेलोनी की स्थिति कमजोर हो गई है।
आगे क्या होगा फैसला
अगर जनता का यही रुख बना रहता है तो अगले साल होने वाले आम चुनाव में मेलोनी के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उनकी कुर्सी पर खतरा मंडराने लगा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि सरकार जनता का भरोसा दोबारा जीत पाती है या नहीं।
