भारत का यूथ भटका है या नही, इसपर न्यूज प्लस के ऐजेंड़ा कार्यक्रम में शुक्रवार को एक सारगर्वित चर्चा हुई, पैनल के महमान चीफ काउंसलर अनुराग सक्सेना और मोटीवेशनल स्पीकर वंदना श्रीवास्तव ने कहा कि युवाओं में कैरियर को लेकर दबाव जरूर हैं. साथ ही पैरेटंस् की ओर से बच्चों को कैरियर चयन में दिए जा रहे अपने दबाव से भी दिक्कतें पैदा हुई हैं समय की नजाकत है कि कक्षा आठ के बाद ही पैरेटंस् को अपने बच्चों से वार्ता करनी चाहिए और वो जो भी कैरियर चुनना चाहते है उसकी खुली छूट देनी होगी, तभी यूथ में तनाव, नशीले पदार्थों का सेवन और खुदखुशी के मामले रूक सकते हैं।
अनुराग सक्सेना ने कहा कि जिस तरह का दबाव युवा वर्ग पर है उसे माता पिता को समझने की जरूरत हैं सारे मिथ टूट चुके है अब आप किसी युवा को अपने हिसाब से गाइड लाइन देकर चला नही सकते है किसी को समझाने की जरूरत नही है जहां समस्या हो बिना देरी काउंसलर से अपने बच्चे के लिए सलाह जरूर लेनी चाहिए, अब वो जमाना नही रहा जहां आप सोच विचार करके आगे बढ़े.
वंदना श्रीवास्तव ने कहा कि समय बदल रहा हैं पुरूष प्रधान का भ्रम टूट चुका हैं सच ये है कि लड़के माता पिता के लिए ज्यादा समस्या बन रहे हैं लड़कियां कही ज्यादा मेहनत कस हैं और आगे बढ़ने की ओर ज्यादा अग्रसर रहती हैं हमें युवाओं के मर्म को समझना होगा फिर आगे बढ़ना होगा।
जनगणना से सियासत या आरक्षण गेम
केंद्र सरकार ने जनगणना के साथ जातीय गणना कराने का शेड्यूल जारी कर दिया हैं न्यूज प्लस के एजेंडा कार्यक्रम में गुरूवार को सामने आया कि जनगणना के जब रिजल्ट आयेंगे तो कोई खास बदलाव सामने नही आएगा. जिसकी जितनी आबादी उसको उतना आरक्षण देने की मांग और कयास पहले ही धूल धूसरित हो जाएंगे।
एजेंडा में समाज शास्त्र के ज्ञाता और डीबीएस डिग्री कालेज के प्राचार्य डॉ अनिल मिश्रा ने कहा ओबीसी पहले ही सरकारी नौकरियों में 27% से ज्यादा आरक्षण पा रहा हैं अब कितना आरक्षण बढेगा. ओबीसी तो सामान्य वर्ग में भी पद प्राप्त कर रहा हैं.
एजेंडा के दूसरे वक्ता राजनीति शास्त्र के प्रोफेसर सचिन जायसवाल ने कहा जातीय गणना का राजनीतिक दल फायदा ऊठाना चाहेंगे पर फायदा मिलेगा इसपर संशय हैं.



