भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 से लगातार तीन कार्यकालों में देश का नेतृत्व किया है। उनकी लोकप्रियता, करिश्माई नेतृत्व और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की मजबूत संगठनात्मक शक्ति ने उन्हें भारतीय राजनीति का एक केंद्रीय चेहरा बना दिया है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला, और गठबंधन सहयोगियों के समर्थन से नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।। अब, जैसे-जैसे मोदी की उम्र 75 वर्ष की ओर बढ़ रही है, एक सवाल जोर पकड़ रहा है: "मोदी के बाद बीजेपी में प्रधानमंत्री पद का अगला दावेदार कौन हो सकता है?
नरेंद्र मोदी का नेतृत्व बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से गहराई से जुड़ा हुआ है।। 2024 के चुनावों में बीजेपी ने 240 सीटें जीतीं, जो बहुमत से 32 सीटें कम थीं, लेकिन राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के समर्थन से सरकार बनी।। यह स्थिति गठबंधन की राजनीति को और जटिल बनाती है, और भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन की संभावनाओं को उजागर करती है।
पीएम मोदी की उम्र और बीजेपी की कथित "75 वर्ष की आयु सीमा" की नीति को लेकर विपक्षी नेताओं, जैसे अरविंद केजरीवाल, ने दावा किया है कि 2025 में 75 वर्ष की आयु पूरी करने के बाद मोदी प्रधानमंत्री पद छोड़ सकते हैं। हालांकि, गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया कि बीजेपी का संविधान ऐसी कोई आयु सीमा निर्धारित नहीं करता, और मोदी ही तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।। फिर भी, यह सवाल बना हुआ है कि लंबे समय में बीजेपी का नेतृत्व कौन संभालेगा।
बीजेपी का अगला पीएम कौन?
कई राजनीतिक विश्लेषकों और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के आधार पर, बीजेपी के भीतर कुछ प्रमुख नेताओं के नाम उभरकर सामने आ रहे हैं।
अमित शाह
अमित शाह, वर्तमान गृहमंत्री और बीजेपी के प्रमुख रणनीतिकार, नरेंद्र मोदी के सबसे करीबी सहयोगी माने जाते हैं। वे 2014 और 2019 के चुनावों में बीजेपी की जीत के प्रमुख सूत्रधार रहे।। शाह का संगठनात्मक कौशल, आरएसएस के साथ मजबूत संबंध, और कट्टर हिंदुत्व विचारधारा उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाती है।। उनकी आक्रामक राजनीतिक शैली और नीतिगत निर्णयों में दृढ़ता उन्हें बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाती है। शाह की छवि एक सख्त प्रशासक की है, लेकिन उनकी जन-आकर्षण की कमी और क्षेत्रीय प्रभाव की सीमितता एक चुनौती हो सकती है। इसके अलावा, गठबंधन सहयोगियों के साथ उनकी स्वीकार्यता पर भी सवाल उठते हैं।
योगी आदित्यनाथ
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीजेपी के सबसे प्रभावशाली नेताओं में से एक हैं। उनके कठोर प्रशासन, खासकर माफिया और अपराध के खिलाफ कार्रवाई, ने उन्हें जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाया है।
योगी का हिंदुत्व आधारित नेतृत्व, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में उनकी मजबूत पकड़, और युवा नेतृत्व उन्हें एक संभावित दावेदार बनाता है। ज्योतिषीय भविष्यवाणियों के अनुसार, 2026-2029 के बीच उनकी ग्रह-दशा उनके लिए अनुकूल हो सकती है।। योगी की कट्टर छवि और विवादास्पद बयान गठबंधन सहयोगियों और उदारवादी मतदाताओं के बीच स्वीकार्यता को प्रभावित कर सकते हैं।
नितिन गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को उनकी मेहनत और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए जाना जाता है। वे लंबे समय से आरएसएस के समर्थक रहे हैं और सभी राजनीतिक दलों के साथ अच्छे संबंध रखते हैं।।
गडकरी की स्वच्छ छवि, प्रशासनिक क्षमता, और सभी दलों के साथ सहज संबंध उन्हें एक मजबूत दावेदार बनाते हैं। उनकी नीतियां, जैसे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, व्यापक रूप से सराही गई हैं। गडकरी का जन-आकर्षण और राष्ट्रीय स्तर पर मोदी जैसी लोकप्रियता की कमी एक बाधा हो सकती है।
हिमंत बिस्वा सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पूर्वोत्तर भारत में बीजेपी की स्थिति को मजबूत किया है। उनकी आक्रामक शैली और विकास-उन्मुख नीतियां उन्हें एक उभरता हुआ चेहरा बनाती हैं। सरमा की क्षेत्रीय लोकप्रियता और 2002 के बाद की नरेंद्र मोदी जैसी राजनीतिक शैली उन्हें एक संभावित उम्मीदवार बनाती है। यदि वे राष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव बढ़ाते हैं, तो वे एक मजबूत दावेदार हो सकते हैं। राष्ट्रीय स्तर पर उनकी पहचान अभी सीमित है, और उत्तर-पूर्व से किसी नेता का प्रधानमंत्री बनना ऐतिहासिक रूप से अभूतपूर्व होगा।
आपको बता दें बीजेपी में नेतृत्व का फैसला अक्सर आरएसएस के साथ विचार-विमर्श के बाद होता है।। 2013 में भी आरएसएस की सहमति से ही नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया था। भविष्य में भी आरएसएस की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, गठबंधन सहयोगियों, जैसे जेडीयू और टीडीपी, की राय भी नेतृत्व चयन में प्रभाव डाल सकती है।



