न्यूज प्लस डेस्क, लखनऊ। यूपी मेंSIRआखिर किसके साथ साथ है यानी किसको SIRका फाय़दा होगा इसको लेकर अभी अनुमान ही लगाए जा रहे हैं। पहले सीएम योगी का बयान और अखिलेश यादव के बार-बार बदल रहे बयानों से राजनीतिक हलकों में चर्चा फिर तेज हो गई है।
SIRमें 2.89 करोड़ वोट कटने के बाद अब 3.54 करोड़ और वोटरों पर तलवार लटक रही है। 1.04 करोड़ वोटरों की पहले ही मैपिंग नहीं हो पायी थी, अब करीब ढाई करोड़ ऐसे वोटर साफ्टवेयर ने पकड़े हैं जिन्होंने फार्म भरते वक्त लगत सूचनाएं दी हैं। किसी के पिता का नाम फर्जी है तो किसी ने जेंडर ही बदल दिया है। इन 3.54 करोड़ मतदाताओं को अब निर्वाचन आयोग नोटिस जारी करते साक्ष्य मागेंगे और साक्ष्य न देने पर इनके नाम कट जाएंगे। इनमें से आधे वोट भी कटे तो कटने वाले वोटों की संख्या 4.5 करोड़ से ऊपर पहुंच जाएगी। यानी कटने वाले वोट 30 फीसदी से ऊपर पहुंच जाएंगे तो जाहिर है राजनीतिक दल इसमें अपना नफा-नुकसान भी आंकने लगे हैं।
सीएम योगी ने स्वास्थ्य एवं कल्याण विभाग के आकड़ों के आधार पर भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि एक करोड़ युवा मतदाता जुड़ने से रह गए हैं यानी इनको जोड़ना है। इनको भाजपा का वोटर माना जा रहा है। इसके अलावा SIRमें जिन जिलों में ज्यादा वोट कटे वह हिंदू बाहुल्य हैं और मुस्लिम बाहुल्य जिलों में वोट कम कटे हैं। इसमें भी भाजपा का नुकसान माना जा रहा था, अखिलेश यादव जो SIRशुरू होने पर पीडीओ वोट कटने की बात कह रहे थे सीएम योगी के बयान के बाद कहने लगे कि भाजपा की हार अब तय है।
SIRकी रिपोर्ट आयी तो कुछ आकड़ों को लेकर अखिलेश यादव ने फिर पीडीए वोट कटने की आशंका जताने लगे और ठीकरा भाजपा पर फोड़ने लगे। दरअसल SIRमें 2.89 करोड़ वोट कटने के बाद भारत निर्वाचन आयोग के आकड़ों में प्रदेश के वोटरों की संख्या 12.56 करोड़ रह गए हैं जबकि राज्य निर्वाचन आयोग यानी पंचायत चुनाव के लिए ग्रामीण वोटरों की संख्या 12.69 करोड़ हैं यानी पूरे प्रदेश में वोटरों की संख्या 17 करोड़ के आसपास है। एक तरफ 12.56 करोड़ और दूसरी तरफ 17 करोड़, इतने बड़े अंतर पर सवाल उठना लाजिमी है। अखिलेश यादव ने यही सवाल उठाया है कि जब बीएलओ एक ही हैं तो वोटरों में इतना अंतर क्यों है। उन्होंने फिर से पीडीए वोट काटने का आरोप लगाया है। वह इसको भाजपा की साजिश बता रहे हैं, जाहिर है फिर से यह चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर SIRकिसके साथ है।



