भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव 9 सितंबर को होगा, जिसको लेकर पक्ष और विपक्ष ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है यह पद देश का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। जब पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद, भारत के चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीख घोषित की। नामांकन की प्रक्रिया 7 अगस्त से शुरू हो चुकी है और 21 अगस्त तक चलेगी। इस चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी गठबंधन इंडिया (I.N.D.I.A.) दोनों ही अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। पक्ष और विपक्ष के उम्मीदवार का भी ऐलान कर दिया है।
पक्ष (NDA) का उम्मीदवार
सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन ने महाराष्ट्र के वर्तमान राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। यह घोषणा भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने की थी।
कौन है सी.पी. राधाकृष्णन?
सी.पी. राधाकृष्णन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की विचारधारा से गहराई से जुड़े हुए हैं। वे तमिलनाडु में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और दो बार सांसद भी रह चुके हैं। एनडीए ने राधाकृष्णन के चयन के जरिए दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु, को राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। उनका चयन क्षेत्रीय और सामाजिक समीकरणों को संतुलित करने का प्रयास माना जा रहा है।
एनडीए ने अपने सहयोगी दलों जैसे तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी), जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू), और शिवसेना से समर्थन हासिल कर लिया है। शिवसेना ने 13 अगस्त 2025 को राधाकृष्णन के समर्थन की घोषणा की। इसके अलावा, एआईएडीएमके ने भी उनके नाम पर समर्थन जताया है, जिसे जनसेवा का उपहार बताया गया है। बीजेपी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने कहा कि एनडीए विपक्षी दलों से बातचीत कर निर्विरोध चुनाव की संभावना तलाशेगा। हालांकि, एनडीए को लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त संख्याबल होने के कारण जीत की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
विपक्ष (INDIA) का उम्मीदवार
विपक्षी गठबंधन इंडिया ने पूर्व सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को उपराष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया है। इसकी घोषणा कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने 19 अगस्त 2025 को की। इंडिया गठबंधन ने रेड्डी को एक "गैर-राजनीतिक" और वैचारिक उम्मीदवार के रूप में पेश किया है।
कौन है बी. सुदर्शन रेड्डी?
विपक्ष ने इस चुनाव को एक वैचारिक लड़ाई के रूप में प्रस्तुत किया है। वेणुगोपाल ने कहा कि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे का कारण देश को नहीं बताया गया, जिसे विपक्ष सरकार के दबाव का परिणाम मानता है। बी. सुदर्शन रेड्डी का चयन एक गैर-राजनीतिक चेहरा पेश करके विपक्ष की एकजुटता और नैतिकता का संदेश देने की कोशिश है। रेड्डी की न्यायिक पृष्ठभूमि को विपक्ष एक मजबूत आधार मानता है। विपक्ष बीजू जनता दल (बीजेडी) और अन्य क्षेत्रीय दलों को अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है। बीजेडी, जो पहले कई मौकों पर एनडीए का समर्थन कर चुकी थी, इस बार विपक्ष के साथ खुलकर समर्थन देने से पीछे हट रही है।
आपको बता दें उपराष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें लोकसभा और राज्यसभा के निर्वाचित और मनोनीत सदस्य शामिल होते हैं। मतदान गुप्त मतपत्र के जरिए होता है और आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली (सिंगल ट्रांसफरेबल वोट) का उपयोग किया जाता है। उम्मीदवार को भारत का नागरिक होना चाहिए, 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका होना चाहिए, और राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए योग्य होना चाहिए। वह सरकार के अधीन कोई लाभ का पद धारण नहीं कर सकता।
प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों द्वारा प्रस्तावित और 20 सांसदों द्वारा समर्थित होना चाहिए। साथ ही, ₹15,000 की जमानत राशि जमा करनी होती है। अधिसूचना 7 अगस्त 2025 को जारी की गई। नामांकन 21 अगस्त तक भरे जाएंगे, और 25 अगस्त तक नामांकन वापस लिए जा सकते हैं। मतदान और मतगणना 9 सितंबर 2025 को होगी।
2022 के चुनाव से तुलना
2022 के उपराष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने विपक्ष की उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को 528 वोटों से हराया था, जबकि अल्वा को केवल 182 वोट मिले थे। उस समय विपक्ष में क्रॉस-वोटिंग की वजह से एनडीए की जीत और भी आसान हो गई थी। इस बार, विपक्ष ने एकजुटता दिखाने की कोशिश की है, लेकिन एनडीए का संख्याबल अभी भी मजबूत है।



