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मोदी सरकार की 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' योजना क्या है, आने वाले समय में क्या असर होगा, सब जानें एक क्लिक में

मोदी सरकार की 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' योजना क्या है, आने वाले समय में क्या असर होगा, सब जानें एक क्लिक में

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' (ONOS) नाम की एक नई केंद्रीय योजना को मंजूरी दे दी गई है, इससे आपको क्या लाख होगा, इस रिपोर्ट में सब जानते हैं।

मोदी सरकार लगातार युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने के लिए नई-नई योजनाएं ला रही है. वहीं एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में युवाओं से जुड़ा अहम फैसला लिया गया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल की इस बैठक में 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' (ONOS) नामक एक नई केंद्रीय योजना को मंजूरी दे दी गई है. सरकार की योजना का उद्देश्य देशभर के छात्रों और शोधकर्ताओं की पहुंच दुनिया के तमाम विद्वानों के शोध लेखों और जर्नल प्रकाशनों तक बढ़ाना है. इतना ही नहीं सरकार ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए 6,000 करोड़ रुपये का बजट भी निर्धारित कर दिया है.

6,000 करोड़ करेगी मोदी सरकार 3 साल में खर्च

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा की गई घोषणा के अनुसार सरकार ONOS के साल 2025, 2026 और 2027 के तीन वर्षीय क्रियान्वयन पर 6,000 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है. इसके लिए उच्च शिक्षा विभाग के पास एक अलग से पोर्टल 'वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन' होगा. जिसके माध्यम से यूजर्स शोध पत्रिकाओं तक आसानी से पहुंच सकेंगे. वहीं इस योजना को पूरी तरह से सरल, यूजर्स के अनुकूल और डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से संचालित किए जाने की तैयारी की गई है.

एक क्लिक में रिसचर्स को मिलेगा लाभ

केंद्र सरकार की ONOS योजना का लाभ केंद्र या राज्य सरकारों द्वारा प्रबंधित सभी उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ-साथ केंद्र सरकार के अनुसंधान और विकास संस्थानों को भी मिलेगा. इस योजना लाभ यूजर्स विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के तहत एक स्वायत्त अंतर-विश्वविद्यालय केंद्र, सूचना और पुस्तकालय नेटवर्क द्वारा समन्वित राष्ट्रीय सदस्यता के माध्यम से उठा सकेंगे. इसके बाद इन संस्थानों के छात्र, शिक्षक और शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय शोध लेखों और जर्नल प्रकाशनों का एक क्लिक में ही अध्ययन कर पाएंगे. 

इस योजना के द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाली सभी खोजों की जानकारी बस एक क्लिक पर मिल सकेगी. वहीं इस लिस्ट में 6,300 से ज्यादा संस्थान शामिल हैं. यानी कि लगभग 1.8 करोड़छात्र, शिक्षक और शोधकर्ता ONOS का लाभ उठा सकेंगे. जिनमें टियर-2 और टियर-3 शहर भी शामिल रहेंगे. देखा जाए तो ये पहल शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा की गई पहलों की सीमा और पहुंच को और बढ़ाती है. ताकि गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा तक छात्रों की पहुंच को और अधिक किया जा सके.

ई-पत्रिकाएं भी कराई जाएंगी उपलब्ध

ONOS योजना के उपयोग का आंकलन अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन समय-समय पर करता रहेगा और इन संस्थानों से भारतीय लेखकों द्वारा किए गए प्रकाशनों की निगरानी भी करेगा. इसके तहत राज्य सरकारों को सभी सरकारी संस्थानों में छात्रों, शिक्षकों और शोधकर्ताओं द्वारा इस सुविधा का अधिकतम उपयोग करने के लिए जागरूकता अभियान चलाने को भी प्रोत्साहित किया जाएगा. इस योजना में 30 प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्रकाशकों से तकरीबन 13 हजार उच्च-प्रभाव वाली ई-पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाएंगी.

1 जनवरी, 2025 से शुरू हो जाएगा संचालन

वहीं वर्तमान समय की बात करें तो इस समय विभिन्न मंत्रालयों के तहत 10 अलग-अलग पुस्तकालय संघ अपने प्रशासनिक दायरे में उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए पत्रिकाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं. इसी प्रकार अलग-अलग संस्थान स्वतंत्र रूप से भी ये कार्य कर रहे हैं. हालांकि अब ONOS योजना में सभी सरकारी शिक्षा संस्थानों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल प्रकाशनों तक एकीकृत पहुंच मिल सकेगी. ONOS योजना का आधिकारिक रूप से संचालन 1 जनवरी, 2025 से शुरू हो जाएगा.

विकसित भारत 2047 के तहत योजना

ONOS योजना के मुख्य प्रकाशकों में एल्सेवियर साइंसडायरेक्ट, स्प्रिंगर नेचर, विले ब्लैकवेल पब्लिशिंग, सेज पब्लिशिंग, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस, टेलर एंड फ्रांसिस और BMJ जर्नल्स शामिल किए गए हैं. इससे यूजर्स को बेहतर शोध पढ़ने को मिल पाएंगे. ये योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, ANRF और सरकार के विकसित भारत 2047 विजन के साथ संरेखित की गई है. इस नीति का उद्देश्य शैक्षणिक संसाधनों तक पहुंच को आसान बनाना और देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ावा देना है.

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