तमिलनाडु की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। करूर में पिछले महीने हुई भगदड़ में अपने पति को खो चुकी एक युवा विधवा ने अभिनेता और तमिलागा वेट्री कझागम (टीवीके) प्रमुख जोसेफ विजय से मिले 20 लाख रुपये के मुआवजे को लौटा दिया है। शंकावी पेरुमल नाम की इस 28 वर्षीय महिला का कहना है कि विजय ने वादा किया था कि वे खुद करूर आकर सांत्वना देंगे, लेकिन ऐसा न होने पर उन्हें ठगा गया महसूस हुआ। इस घटना ने न केवल टीवीके की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि राजनीतिक दलों की संवेदना की गहराई पर भी बहस छेड़ दी है।
शंकावी पेरुमल का यह कदम एक महीने पुरानी त्रासदी की यादें ताजा कर रहा है। 28 सितंबर 2025 को करूर के वेल्लाक्कलाठुर में टीवीके की पहली राज्य स्तरीय रैली के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई थी। अभिनेता विजय की लोकप्रियता के चलते हजारों प्रशंसक पहुंचे, लेकिन आयोजन की खराब व्यवस्था के कारण भगदड़ मच गई। इस हादसे में 41 लोगों की जान चली गई, जबकि दर्जनों घायल हुए। मृतकों में शंकावी का पति रमेश पेरुमल भी शामिल था, जो विजय के कट्टर प्रशंसक थे। रमेश (32 वर्षीय) एक साधारण मजदूर थे, जो परिवार का एकमात्र सहारा थे। उनकी मौत ने शंकावी और उनके दो छोटे बच्चों को आर्थिक और भावनात्मक रूप से विधवा बना दिया।
हादसे के तुरंत बाद विजय ने सार्वजनिक रूप से शोक व्यक्त किया और पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। टीवीके ने यह राशि जल्द ही वितरित भी कर दी। शंकावी को भी यह चेक मिला, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। एक महीने बाद, जब विजय ने चेन्नई के एक रिसॉर्ट में पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, तो शंकावी ने मौके पर ही चेक लौटा दिया। उन्होंने कहा, "मेरा पति आपका प्रशंसक था, लेकिन आपका वादा झूठा साबित हुआ। आपने कहा था कि करूर आकर मिलेंगे, लेकिन परिवार को चेन्नई बुला लिया। अगर आप खुद आते, तो यह सम्मान होता। अब यह पैसा हमें नहीं चाहिए।" शंकावी की यह बात न केवल भावुक थी, बल्कि राजनीतिक संवेदनशीलता की कमी को भी उजागर करती है।
शंकावी का परिवार अब आर्थिक संकट से जूझ रहा है। रमेश की मौत के बाद घर की जिम्मेदारी शंकावी पर आ पड़ी है। वे कहती हैं, "20 लाख से क्या होगा? मेरा पति कभी वापस नहीं आएगा। बच्चों का भविष्य कैसे संवारे? लेकिन सम्मान से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए।" उनके भाई ने भी समर्थन किया और कहा कि परिवार अब सरकारी सहायता पर निर्भर है। तमिलनाडु सरकार ने भी मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये की सहायता दी थी, लेकिन यह राशि अपर्याप्त साबित हो रही है।
इस घटना का बैकग्राउंड टीवीके की राजनीतिक यात्रा से जुड़ा है। विजय, जो सुपरस्टार के रूप में दक्षिण भारतीय सिनेमा में छाए हुए हैं, ने हाल ही में राजनीति में कदम रखा है। उनकी फिल्मों की सफलता के बावजूद, टीवीके को अभी जनता की पूरी स्वीकृति नहीं मिली है। करूर रैली पहली बड़ी सभा थी, जो पार्टी की ताकत दिखाने का प्रयास था। लेकिन भगदड़ ने इसे कलंकित कर दिया। जांच में पाया गया कि सुरक्षा व्यवस्था ढीली थी, भीड़ प्रबंधन की कमी थी, और स्थानीय प्रशासन की लापरवाही भी जिम्मेदार थी। पुलिस ने कई अधिकारियों पर कार्रवाई की, लेकिन विजय पर कोई प्रत्यक्ष आरोप नहीं लगा। फिर भी, विपक्षी दल जैसे द्रविड़ मुनेत्र कढ़गम (डीएमके) और अन्नाद्रमुक ने टीवीके पर 'लोकलुभावन राजनीति' का आरोप लगाया।
विजय की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। टीवीके के एक प्रवक्ता ने कहा, "हमने पूरी संवेदना के साथ सहायता दी। चेन्नई में मुलाकात व्यावहारिक कारणों से हुई, क्योंकि सभी परिवारों को एक जगह बुलाना आसान था। शंकावी का निर्णय दुखद है, लेकिन हम उनका सम्मान करते हैं।" लेकिन सोशल मीडिया पर यह मुद्दा गरमा गया है। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर #KarurStampede और #VijayCompensation जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "विजय की राजनीति में संवेदना की कमी साफ दिख रही है। प्रशंसक मरते हैं, लेकिन नेता सिर्फ चेक भेजते हैं।" वहीं, विजय के समर्थक इसे 'व्यक्तिगत भावुकता' बता रहे हैं। एक पोस्ट में कहा गया, "शंकावी का दर्द समझ में आता है, लेकिन विजय व्यस्त हैं। राजनीति में सब कुछ परफेक्ट नहीं होता।"



