पानी जीवन के लिए सबसे जरूरी चीजों में से एक है, लेकिन सिर्फ पानी पीना ही काफी नहीं बल्कि उसका साफ होना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आज भी कई जगह दूषित पानी की वजह से लोग गंभीर बीमारियों का शिकार होते हैं। इसी कारण घरों में वॉटर प्यूरीफायर का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।
पानी में कितना टीडीएस सही
वॉटर प्यूरीफायर का मुख्य काम पानी में मौजूद हानिकारक तत्वों और टीडीएस को नियंत्रित करना होता है। स्वास्थ्य मानकों के अनुसार पीने के पानी में टीडीएस लगभग 50 से 120 मिलीग्राम प्रति लीटर के बीच होना बेहतर माना जाता है। बहुत ज्यादा टीडीएस स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है।
खराब फिल्टर की पहचान
अगर पानी पीते समय उसका स्वाद कड़वा, खारा या पहले से अलग महसूस होने लगे तो यह फिल्टर खराब होने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा अगर मशीन का टैंक भरने में पहले की तुलना में अधिक समय लग रहा है तो यह भी फिल्टर ब्लॉक होने की ओर इशारा करता है।
कब बदलना चाहिए फिल्टर
विशेषज्ञों के अनुसार सामान्य तौर पर वॉटर प्यूरीफायर का फिल्टर 6 महीने से 1 साल के बीच बदल देना चाहिए। वहीं आरओ मेम्ब्रेन लगभग 3 साल तक काम कर सकता है। हालांकि पानी की गुणवत्ता और उपयोग के आधार पर यह समय कम या ज्यादा हो सकता है।
समय पर जांच है जरूरी
कई लोग तब तक सर्विस नहीं कराते जब तक मशीन पूरी तरह खराब न हो जाए। लेकिन समय-समय पर तकनीशियन से जांच करवाना बेहतर माना जाता है। इससे मशीन की कार्यक्षमता बनी रहती है और साफ पानी मिलता रहता है।
लापरवाही बन सकती है खतरा
अगर खराब फिल्टर लंबे समय तक इस्तेमाल किया जाए तो शुद्ध पानी की जगह अशुद्ध पानी मिलने का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए पानी के स्वाद, मशीन की गति और सर्विस समय को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
