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क्या यूपी में हर 5वां वोटर फर्जी था ?

क्या यूपी में हर 5वां वोटर फर्जी था ?

न्यूज प्लस डेस्क, लखनऊ।...तो क्या उत्तर प्रदेश की मतदीती सूची में हर 5वां वोटर फर्जी था, SIR की प्रक्रिया के बाद तो यही साबित हो रहा है। इससे बड़ी बात यह कि क्या इन्हीं 25 फीसदी फर्जी वोटरों से प्रदेश में सरकारें बनती-बिगड़ती रही हैं।

निर्वाचन आयोग ने हाल में जितने प्रदेशों में SIR कराया है उनमें सबसे ज्यादा 18.70 फीसदी वोट उप्र में कटे हैं। अभी करीब डेढ़ फीसदी वोटरों पर और तलवार लटक रही है। भाजपा के तमाम बड़े नेता कह रहे हैं कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी घुसपैठियों के बूते पर सरकार बनाती हैं, उस पश्चिम बंगाल में 56.20 लाख यानी करीब 7-8 फीसदी वोटर ही SIR में कटे हैं। उप्र में 15.44 वोटरों में 2.89 लाख वोट कट गए और अभी 1.04 करोड़ वोटरों के नाम कटने का खतरा है। इन वोटरों की मैपिंग नहीं हो पायी है यानी इनके परिवार या कोई करीबी रिश्तेदार ऐसा नहीं मिला जो 2003 यूपी का वोटर हो। अब आयोग इनको नोटिस देगा और इनको साक्ष्य देने होंगे कि 2003 में उनके परिवार का कोई सदस्य वोटर था। अगर यह वोटर भी फर्जी मान लिए जाएं तो उप्र में कुल 3.94 करोड़ यानी 15.44 करोड़ में से करीब 4 करोड़ वोटर कट जाएंगे। यह आकड़ा 25 फीसदी के आसपास हैं यानी एक चौथाई मतदाता फर्जी थे।

यह स्थिति तब आयी है जब सीएम योगी और सपा मुखिया अखिलेश यादव दोनों अपने कार्यकर्ताओं को लगातार आगाह कर रहे थे कि SIR में लापरवाही न बरतें। सीएम योगी ने बैठक करके कार्यकर्ताओं से कहा था घर-घर जाएं और एसआईआर को गंभीरता से लें, अखिलेश यादव ने भी बीएलए को सक्रिय किया था और इसके लिए बाकायदी रणनीति बनायी थी। SIR को लेकर शुरू से यह भ्रम था कि वोटर लिस्ट में जो फर्जी वोटर हैं उनमें घुसपैठिए या अधिकतर मुस्लिम वोटर शामिल हैं। उप्र की स्थिति देखें सबसे ज्यादा नाम लखनऊ, कानपुर, गाजियाबाद, प्रयागराज जैसे जिलों में कटे हैं जबकि मुरादाबाद, रामपुर, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरपुर जैसे मुस्लिम बाहुल्य जिलों में सबसे कम नाम कटे हैं।

निर्वाचन आयोग के अनुसार सबसे ज्यागा 2.17 करोड़ मतदाता वह काटे गए हैं जो अपने पतों से स्थानांतिरत हो चुके हैं या लापता हो चुके हैं। इसके बाद 46.23 लाख वोटर ऐसे मिले जिनकी मृत हो चुकी है। 25.47 लाख मतदाता ऐसे मिले जिनके नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज थे।

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