भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव में विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। रेड्डी ने आज, गुरुवार को, नई दिल्ली में संसद भवन में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेता मौजूद रहे। यह नामांकन 9 सितंबर 2025 को होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है।
बी. सुदर्शन रेड्डी ने राज्यसभा महासचिव पी.सी. मोदी, जो इस चुनाव के लिए निर्वाचन अधिकारी भी हैं, के समक्ष नामांकन पत्रों के चार सेट दाखिल किए। इन नामांकन पत्रों पर लगभग 160 सांसदों ने प्रस्तावक और समर्थक के रूप में हस्ताक्षर किए, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी), और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों के नेता शामिल थे। प्रमुख प्रस्तावकों में मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, राहुल गांधी, शरद पवार, राम गोपाल यादव, तिरुचि शिवा, संजय राउत, और शताब्दी रॉय शामिल थे।
नामांकन से पहले, रेड्डी ने संसद परिसर में प्रेरणा स्थल पर महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की। बुधवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में विपक्षी दलों ने उनके सम्मान में एक अभिनंदन समारोह आयोजित किया, जिसमें उनकी उम्मीदवारी को एक ऐतिहासिक और वैचारिक कदम के रूप में प्रस्तुत किया गया।
कौन है बी. सुदर्शन रेड्डी?
79 वर्षीय बी. सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को तत्कालीन आंध्र प्रदेश (वर्तमान तेलंगाना) के रंगारेड्डी जिले के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आंध्र प्रदेश में पूरी की और 27 दिसंबर 1971 को आंध्र प्रदेश बार काउंसिल के साथ वकील के रूप में पंजीकरण कराया। अपने चार दशकों के प्रतिष्ठित कानूनी करियर में, रेड्डी ने कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं:
- 1988: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में सरकारी वकील के रूप में नियुक्त।
- 1990: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट में जज नियुक्त।
- 2007-2011: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में सेवा।
- गुवाहाटी हाईकोर्ट: मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य।
- गोवा: राज्य के पहले लोकायुक्त के रूप में योगदान।
- वर्तमान में, वह हैदराबाद स्थित अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता एवं मध्यस्थता केंद्र के न्यासी बोर्ड के सदस्य हैं।
रेड्डी की साफ-सुथरी छवि, संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, और सामाजिक-आर्थिक समानता के लिए उनके ऐतिहासिक फैसलों ने उन्हें विपक्ष के लिए एक मजबूत और गैर-राजनीतिक उम्मीदवार बनाया।
I.N.D.I.A गठबंधन की रणनीति
I.N.D.I.A गठबंधन ने रेड्डी को चुनकर एक गैर-राजनीतिक और निष्पक्ष चेहरा पेश करने की रणनीति अपनाई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे एक "वैचारिक लड़ाई" करार देते हुए कहा, "यह चुनाव केवल एक पद के लिए नहीं, बल्कि हमारे राष्ट्र की आत्मा और संवैधानिक मूल्यों के लिए है। जहाँ सत्तारूढ़ दल ने आरएसएस की विचारधारा को चुना है, वहीं हम संविधान को अपना मार्गदर्शक मानते हैं।" खरगे ने रेड्डी की उम्मीदवारी को लोकतांत्रिक संस्थानों में निष्पक्षता और गरिमा को पुनर्जनन की दिशा में एक कदम बताया।
विपक्ष की रणनीति में दक्षिण भारत पर विशेष ध्यान दिया गया है। रेड्डी, जो तेलंगाना से हैं, के चयन से विपक्ष ने आंध्र प्रदेश और तेलंगाना की क्षेत्रीय भावनाओं को साधने की कोशिश की है। खासकर, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) के नेता चंद्रबाबू नायडू के लिए यह फैसला एक राजनीतिक चुनौती पेश कर सकता है, क्योंकि रेड्डी उनके गृह राज्य से हैं। हालाँकि, टीडीपी ने एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन को समर्थन देने का संकेत दिया है।
NDA के सीपी राधाकृष्णन से होगा मुकाबला
उपराष्ट्रपति चुनाव में रेड्डी का मुकाबला एनडीए के उम्मीदवार और महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन से है, जो तमिलनाडु से हैं। राधाकृष्णन ने 20 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में अपना नामांकन दाखिल किया था। इस तरह, यह चुनाव "दक्षिण बनाम दक्षिण" की तस्वीर पेश कर रहा है, क्योंकि दोनों उम्मीदवार दक्षिण भारत से हैं।
एनडीए को लोकसभा और राज्यसभा में कुल 422 सांसदों का समर्थन प्राप्त है, जो बहुमत के लिए आवश्यक 391 सांसदों से अधिक है। इसके अलावा, वाईएसआरसीपी जैसी गैर-गठबंधन पार्टियों ने भी राधाकृष्णन को समर्थन देने की घोषणा की है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल नहीं है, लेकिन रेड्डी की उम्मीदवारी को एक प्रतीकात्मक और वैचारिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
चुनाव प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने 7 अगस्त 2025 को उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखों की घोषणा की थी।
- नामांकन की अंतिम तारीख: 21 अगस्त 2025
- नामांकन पत्रों की जाँच: 22 अगस्त 2025
- नाम वापसी की अंतिम तारीख: 25 अगस्त 2025
- मतदान और मतगणना: 9 सितंबर 2025
उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए निर्वाचक मंडल में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य शामिल हैं, जिनमें मनोनीत सदस्य भी वोट डालने के पात्र हैं। कुल 781 मतदाताओं में से बहुमत के लिए 391 वोट आवश्यक हैं। प्रत्येक उम्मीदवार को कम से कम 20 सांसदों का प्रस्तावक और 20 सांसदों का समर्थक होना आवश्यक है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर रेड्डी के नामांकन की जानकारी साझा करते हुए उनके बयान को पोस्ट किया, जिसमें रेड्डी ने सभी सांसदों से उनकी उम्मीदवारी का समर्थन करने की अपील की। विपक्ष का कहना है कि रेड्डी की उम्मीदवारी संविधान और न्यायपालिका के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जबकि एनडीए के उम्मीदवार को "आरएसएस की विचारधारा" से जोड़ा जा रहा है।
दूसरी ओर, एनडीए ने राधाकृष्णन के अनुभव और दक्षिण भारत में उनके योगदान को रेखांकित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राधाकृष्णन के नामांकन के दौरान कहा, "वह एक विनम्र और कर्मठ नेता हैं, जिन्होंने दक्षिण भारत में बीजेपी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।



