अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक AI-जनरेटेड वीडियो शेयर किया, जिसमें पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को FBI एजेंटों द्वारा व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में गिरफ्तार करते हुए दिखाया गया है। इस वीडियो के वायरल होते ही राजनीती गलियारों मे हड़कंप मच गया।
वायरल वीडियो के मुताबक FBI एजेंट ओबामा का कॉलर पकड़कर उन्हें नीचे गिराते हैं और हथकड़ी लगाते हैं। वीडियो के अंत में ओबामा को नारंगी जेल यूनिफॉर्म में सलाखों के पीछे दिखाया गया है। इस वीडियों मे ट्रंप अलग ही अंदाज मे नजर आए, ट्रम्प ने इस वीडियो को "कोई भी कानून से ऊपर नहीं है" कैप्शन के साथ पोस्ट किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि यह वीडियो (AI) से बना है और वास्तविक नहीं है।
45 सेकंड के इस डीपफेक वीडियो की शुरुआत ओबामा के एक कथन से होती है, जिसमें वे कहते हैं, "राष्ट्रपति विशेष रूप से कानून से ऊपर है।" इसके बाद जो बाइडेन सहित कई डेमोक्रेटिक नेताओं की क्लिप दिखाई जाती हैं, जो कहते हैं, "कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।" वीडियो में इसके बाद FBI एजेंट ओबामा को ओवल ऑफिस में हथकड़ी लगाते हैं, जबकि ट्रम्प पास में बैठकर मुस्कुराते नजर आते हैं। अंत में, ओबामा को जेल में कैदी की वर्दी में दिखाया गया है, जिसमें "YMCA" गाना बैकग्राउंड में बज रहा है। वीडियो में कोई डिस्क्लेमर नहीं है कि यह AI-जनरेटेड और काल्पनिक है, जिसके कारण इसे भ्रामक माना जा रहा है।
वीडियो वायरल होते ही राजनीती मे हलचल
इस वीडियो ने अमेरिका में राजनीतिक हलचल मचा दी है। आलोचकों ने इसे "जानबूझकर भड़काऊ" और "गैर-जिम्मेदाराना" करार दिया है, इस वीडियो को लेकर ट्रम्प की ओर से कोई सफाई नहीं दी गई है कि यह वीडियो फर्जी है। उन्होंने यह नहीं बताया कि यह सिर्फ एक काल्पनिक दृश्य है। यह वीडियो ऐसे समय में सामने आया है, जब ट्रम्प प्रशासन की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में ओबामा प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गबार्ड ने दावा किया कि उनके पास 114 पन्नों की ईमेल श्रृंखला के सबूत हैं, जो दिखाते हैं कि ओबामा प्रशासन ने ट्रम्प-रूस साजिश की झूठी कहानी गढ़ी थी ताकि ट्रम्प की जीत को कमजोर किया जा सके। गबार्ड ने इन दस्तावेजों को FBI और न्याय विभाग को सौंपने की बात कही है, ताकि ओबामा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो सके। ट्रम्प ने गबार्ड के इस कदम का समर्थन करते हुए लिखा, "तुलसी गबार्ड को बधाई, ऐसे ही आगे बढ़ते रहो!"
ट्रम्प लंबे समय से अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों, विशेष रूप से ओबामा पर 2016 के चुनाव में धोखाधड़ी के आरोप लगाते रहे हैं। यह वीडियो उनके इस नैरेटिव को बढ़ावा देने का हिस्सा माना जा रहा है। कुछ लोगो का कहना है कि यह वीडियो ट्रम्प की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, जिसका उद्देश्य उनके समर्थकों को एकजुट करना और विपक्ष को कमजोर करना है। हालांकि, इस तरह के AI-जनरेटेड वीडियो के उपयोग ने डीपफेक तकनीक के दुरुपयोग को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ ट्रम्प समर्थकों ने इसे मज़ाक के तौर पर लिया और इसे शेयर किया, जबकि अन्य ने इसे गंभीरता से लेते हुए सवाल उठाया कि क्या ओबामा को वाकई गिरफ्तार किया जाएगा। वहीं, विपक्षी नेताओं और राजनीतिक विश्लेषकों ने इसे गलत सूचना फैलाने का प्रयास बताया। एक यूजर ने लिखा, "यह एपस्टीन फाइलों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।"
ट्रम्प द्वारा शेयर किया गया यह AI-जनरेटेड वीडियो न केवल राजनीतिक विवाद का कारण बना है, बल्कि इसने डीपफेक तकनीक के गलत इस्तेमाल पर भी सवाल उठाए हैं। बिना डिस्क्लेमर के इस तरह के वीडियो को साझा करना गलत सूचना को बढ़ावा दे सकता है और जनता में भ्रम पैदा कर सकता है।



