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वोटर अधिकार यात्रा का आज दूसरा दिन: समर्थकों और पुलिस में धक्का-मुक्की, राहुल गांधी को देखने के लिए पेड़-बसों पर चढ़े लोग

वोटर अधिकार यात्रा का आज दूसरा दिन: समर्थकों और पुलिस में धक्का-मुक्की, राहुल गांधी को देखने के लिए पेड़-बसों पर चढ़े लोग

बिहार के रोहतास जिले के सासाराम से 17 अगस्त 2025 को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 'वोटर अधिकार यात्रा' की शुरुआत की। यह यात्रा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित 'वोट चोरी' के खिलाफ जन जागरूकता फैलाने के लिए शुरू की गई है, जिसे कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' ने लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का निर्णायक संग्राम करार दिया है। यात्रा का समापन 1 सितंबर को पटना के गांधी मैदान में एक विशाल 'वोटर अधिकार रैली' के साथ होगा।

यात्रा के पहले दिन सासाराम में भारी भीड़ उमड़ी। राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नेता तेजस्वी यादव को देखने के लिए हजारों समर्थक सड़कों पर जमा हो गए। उत्साह इतना था कि लोग राहुल गांधी की एक झलक पाने के लिए पेड़ों, बसों और ऊंची जगहों पर चढ़ गए।

हालांकि, इस दौरान समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति पैदा हो गई। कांग्रेस के आधिकारिक एक्स हैंडल पर पोस्ट के अनुसार, बिहार पुलिस ने सासाराम में बैरिकेड्स लगाए थे ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। लेकिन समर्थकों के भारी दबाव और जनता के साथ कांग्रेस नेताओं के पहुंचने के बाद पुलिस को बैरिकेड्स हटाने पड़े। पोस्ट में कहा गया, "बिहार पुलिस ने यहां बैरिकेड लगाए थे, लेकिन जैसे ही हम जनता के साथ आए, पुलिस को बैरिकेड हटाना पड़ा और हम सीधे स्टेज पर आ गए। ये बिहार की जनता की ताकत है।

यह यात्रा 16 दिनों में 1,300 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और बिहार के 25 जिलों से होकर गुजरेगी, जिनमें औरंगाबाद, गया, नवादा, नालंदा, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार, पूर्णिया, मधुबनी, दरभंगा, और आरा शामिल हैं। यात्रा में 'इंडिया' गठबंधन के सभी छह घटक दलों के नेता शामिल होंगे, जिसमें तेजस्वी यादव के अलावा अन्य प्रमुख नेता भी जनसभाओं को संबोधित करेंगे।

कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सासाराम में तैयारियों का जायजा लिया और कहा, "सासाराम बिहार की परिवर्तन की धरती रही है। इसलिए वोट अधिकार यात्रा का शुभारंभ यहीं से किया गया।

यात्रा के पहले दिन की भारी भीड़ ने बिहार में इस अभियान के प्रति जनता के उत्साह को दिखाया। कांग्रेस ने इसे 2024 लोकसभा चुनाव की रणनीति का हिस्सा बताया है, जिसमें मतदाता सूची की गड़बड़ियों को उजागर करना और चुनाव आयोग पर दबाव बनाना शामिल है। पार्टी ने 50 लोकसभा सीटों पर कथित हेरफेर की पहचान की है और इसके सबूत जल्द पेश करने की बात कही है। कांग्रेस ने 14 अगस्त को 'लोकतंत्र बचाओ मशाल मार्च' भी आयोजित किया, और 22 अगस्त से 7 सितंबर तक सभी राज्य मुख्यालयों में 'वोट चोर-गद्दी छोड़' थीम पर रैलियां और 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक हस्ताक्षर अभियान की योजना बनाई है।

यात्रा का उद्देश्य

राहुल गांधी ने इस यात्रा को 'वोट चोरी' के खिलाफ एक सीधी लड़ाई बताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, "17 अगस्त से #VoterAdhikarYatra के साथ हम बिहार की धरती से वोट चोरी के खिलाफ सीधी लड़ाई छेड़ रहे हैं। यह सिर्फ एक चुनावी मुद्दा नहीं - यह लोकतंत्र, संविधान और ‘वन मैन, वन वोट’ के सिद्धांत की रक्षा का निर्णायक संग्राम है।" उन्होंने युवाओं, मजदूरों और किसानों से इस जनांदोलन में शामिल होने की अपील की।

कांग्रेस और 'इंडिया' गठबंधन का आरोप है कि चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में अनियमितताएं हो रही हैं, जिसके तहत महागठबंधन समर्थकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि कुछ बीजेपी नेताओं को दो-दो EPIC कार्ड जारी किए गए हैं, जबकि गरीबों और विपक्षी समर्थकों के वोट काटे जा रहे हैं।

विपक्ष और सत्तापक्ष के बीच तीखी बयानबाजी

यात्रा को लेकर राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया है। बीजेपी और जेडीयू ने इसे कांग्रेस की सियासी चाल करार दिया है। वहीं, पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने यात्रा का समर्थन करते हुए कहा, "वोट की चोरी करके बीजेपी सत्ता में आई है। चुनाव आयोग न तो सीसीटीवी फुटेज दे रहा है और न ही वोटर लिस्ट।" उन्होंने EPIC कार्ड को आधार से लिंक करने की मांग उठाई। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें संविधान का ज्ञान नहीं है और वह "पागल की तरह बात करते हैं।

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