बिहार विधानसभा चुनाव की तपिश में एक और हादसा जोड़ दिया गया है। जनता दल (यूनाइटेड) के बाहुबली नेता और मोकामा से पूर्व विधायक अनंत सिंह का मंच अचानक टूट गया, जब उनके समर्थक 'जय अनंत सिंह जिंदाबाद' के जोरदार नारे लगा रहे थे। शनिवार शाम को रामपुर-डूमरा गांव में हुए इस हादसे का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें अनंत सिंह धड़ाम से गिरते नजर आ रहे हैं। सौभाग्य से, उन्हें या किसी अन्य को कोई गंभीर चोट नहीं लगी।
घटना उस समय घटी, जब अनंत सिंह अपने 'तूफान संपर्क अभियान' के तहत पूर्वी मोकामा के रामपुर-डूमरा गांव में पहुंचे थे। समर्थकों ने खास तौर पर उनके लिए एक छोटा-सा अस्थायी मंच तैयार किया था, जो लकड़ी और बांस से बने साधारण ढांचे पर आधारित था। अनंत सिंह मंच पर चढ़े और भाषण शुरू करने ही वाले थे कि एक समर्थक माइक पर बोलने लगा। तभी भीड़ में उत्साह चरम पर पहुंच गया और 'अनंत सिंह जिंदाबाद' के नारे गूंजने लगे। इसी जोर-जुलाब के बीच मंच की संरचना लड़खड़ा गई और अचानक धंस गई। अनंत सिंह समेत मंच पर मौजूद तीन-चार अन्य लोग जमीन पर लोट-पोट हो गए। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि गिरते हुए अनंत सिंह ने हाथ-पैर फैलाए, लेकिन उनकी 'बाहुबली' छवि बरकरार रही – वे तुरंत संभल गए।
सुरक्षा कर्मियों ने फौरन उन्हें संभाला और उनके वाहन तक पहुंचाया। अनंत सिंह ने हादसे के बाद अपना अभियान जारी रखा और पास के एक अन्य गांव में सभा को संबोधित किया। स्थानीय लोगों के अनुसार, मंच की गुणवत्ता खराब होने की वजह से यह हादसा हुआ। "समर्थकों का उत्साह देखकर मंच छोटा बना दिया गया था, लेकिन मजबूत नहीं था," एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी तरह की शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है।
यह घटना बिहार चुनाव के प्रचार युद्ध में अनंत सिंह की सक्रियता का प्रतीक बन गई है। 57 वर्षीय अनंत सिंह, जिन्हें 'छोटे सरकार' के नाम से भी जाना जाता है, बिहार की राजनीति के सबसे विवादास्पद चेहरों में से एक हैं। मोकामा विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रह चुके सिंह पर हत्या, अपहरण और अवैध हथियार रखने जैसे कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। 2019 में अवैध हथियार रखने के आरोप में जेल जाने के बाद भी उनकी लोकप्रियता में कमी नहीं आई। जेडीयू ने इस बार उन्हें फिर से मोकामा सीट से टिकट दिया है, जहां वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं। सिंह का दावा है कि वे इस चुनाव में 50 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल करेंगे।
मोकामा सीट बिहार की सबसे संवेदनशील सीटों में शुमार है, जहां बाहुबलियों का बोलबाला रहा है। अनंत सिंह का मुकाबला यहां राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सूरजभान सिंह से है, जो खुद एक दमदार उम्मीदवार हैं। सूरजभान, तेजस्वी यादव के करीबी, अनंत सिंह को 'पुराना बाहुबली' बताकर निशाना साध रहे हैं। इस सीट पर जातिगत समीकरण जटिल हैं – यादव, कुर्मी और अन्य पिछड़ी जातियों का वोट निर्णायक होगा। अनंत सिंह के समर्थक उन्हें 'क्षेत्र का रक्षक' मानते हैं, जबकि विपक्ष उन्हें 'अपराधी' करार देता है। इस हादसे ने सोशल मीडिया पर मीम्स और जोक्स की बाढ़ ला दी है, जहां कुछ यूजर्स कह रहे हैं, "अनंत सिंह इतने मजबूत हैं कि मंच भी उनकी ताकत सहन नहीं कर सका।"
बिहार चुनाव 2025 में कुल 243 सीटों पर वोटिंग हो रही है, जो 20 अक्टूबर से शुरू होकर नवंबर तक चलेगी। एनडीए (जेडीयू-बीजेपी) और महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के बीच कांटे की टक्कर है। अनंत सिंह जैसे स्थानीय चेहरों की भूमिका महत्वपूर्ण है, जो ग्रामीण इलाकों में सीधा प्रभाव रखते हैं। लेकिन ऐसे हादसे चुनावी रैलियों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अस्थायी मंचों की जांच के लिए सख्त दिशानिर्देशों की जरूरत है। पिछले चुनावों में भी पटना और मुजफ्फरपुर में इसी तरह के हादसे हुए थे, जहां दर्जनों लोग घायल हो गए थे।
अनंत सिंह के करीबी एक नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "यह छोटी-मोटी घटना है। अनंत भाई की लोकप्रियता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। वे तो चुनाव जीतने के बाद ही आराम करेंगे।" वहीं, विपक्षी नेता ने इसे 'नियति का इशारा' बताते हुए कहा कि 'पुरानी व्यवस्था धंस रही है।' वायरल वीडियो ने अनंत सिंह की छवि को और मजबूत किया लगता है, क्योंकि सोशल मीडिया पर उनके समर्थक इसे 'मजबूत इरादों का प्रतीक' बता रहे हैं।



