कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल ही में चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें उन्होंने दावा किया है कि लोकसभा चुनाव 2024 में मतदाता सूची में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां की गई हैं। राहुल गांधी ने इसे "वोट चोरी" का मामला करार देते हुए कहा कि यह केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में ऐसी अनियमितताएं देखी गई हैं। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है और विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाना शुरू कर दिया है।
आपको बता दें 8 अगस्त 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग से पांच सवाल पूछे, जिनमें मतदाता सूची में फर्जीवाड़े, डिजिटल वोटर लिस्ट तक विपक्ष की पहुंच न होने, और सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ जैसे गंभीर मुद्दे शामिल थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ठोस सबूत हैं जो साबित करते हैं कि मतदाता सूची में फर्जी वोटर, डुप्लिकेट आईडी, और फर्जी पते शामिल किए गए थे।
राहुल गांधी ने विशेष रूप से कर्नाटक में हुई कथित अनियमितताओं का जिक्र किया, जहां उनकी पार्टी ने स्वतंत्र जांच की और उनके अनुसार, "यह एक परमाणु बम की तरह खुलासा है।" उन्होंने इसे "देशद्रोह" तक करार दिया और कहा कि 6.5 लाख वोटरों में से 1.5 लाख फर्जी वोटर थे।
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं। 11 अगस्त 2025 को, फ्रांस 24 की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विपक्षी दलों ने विवादास्पद मतदाता सूची के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य नेताओं ने भी राहुल गांधी के दावों का समर्थन किया और इसे लोकतंत्र पर हमला बताया।
चुनाव आयोग पर कई सवाल
राहुल गांधी ने अपने बयान में चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
- विपक्ष को डिजिटल वोटर लिस्ट क्यों नहीं दी जा रही?
- सीसीटीवी और वीडियो सबूत क्यों मिटाए जा रहे हैं, और किसके कहने पर?
- फर्जी वोटिंग और वोटर लिस्ट में गड़बड़ी क्यों हुई?
- विपक्षी नेताओं को धमकाने और डराने की कोशिश क्यों की जा रही है?
- इन गड़बड़ियों के पीछे का मकसद क्या है?
उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव आयोग इन सवालों का जवाब नहीं देता, तो उसे इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल गांधी के इन आरोपों ने न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है। यह मुद्दा लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह भारतीय चुनावी इतिहास में एक बड़ा घोटाला हो सकता है। विपक्ष इसे एक बड़े आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की योजना बना रहा है, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे विपक्ष की हताशा करार दे सकता है।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
अब तक, चुनाव आयोग या सत्तारूढ़ दल की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में यह दावा किया गया है कि ये आरोप बेबुनियाद हैं और विपक्ष द्वारा राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश है। लेकिन, राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनके पास "खुला और पक्का" सबूत है, जिसे वे जल्द ही सार्वजनिक करेंगे।
कर्नाटक में जांच और खुलासा
राहुल गांधी ने 5 अगस्त 2025 को कर्नाटक में होने वाले एक कार्यक्रम का जिक्र किया, जहां वे इन गड़बड़ियों के सबूत पेश करने वाले थे। उनके अनुसार, उनकी पार्टी ने स्वतंत्र रूप से मतदाता सूची की जांच की और पाया कि कई सीटों पर फर्जी वोटरों की संख्या बहुत अधिक थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि कम से कम 70-100 सीटों पर ऐसी धांधली हुई है।



