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SIR सिस्टम की एंट्री: वोटिंग प्रोसेस में क्रांति या कंट्रोवर्सी? जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्लान

SIR सिस्टम की एंट्री: वोटिंग प्रोसेस में क्रांति या कंट्रोवर्सी? जानें स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्लान

भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ मानी जाने वाली मतदाता सूची को मजबूत बनाने के लिए निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान की दूसरी फेज की घोषणा कर दी है। यह अभियान 4 नवंबर 2025 से 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में शुरू होगा, जहां करीब 51 करोड़ मतदाताओं की सूची का गहन पुनरीक्षण होगा। लेकिन क्या यह वोटिंग प्रक्रिया में क्रांति लाएगा या नई कंट्रोवर्सी को जन्म देगा? जहां ईसीआई इसे पारदर्शिता की नई ऊंचाई बता रहा है, वहीं विपक्ष इसे वोटरों के अधिकारों पर हमला करार दे रहा है। आइए, जानते हैं SIR के फायदे, विवाद और स्टेप-बाय-स्टेप प्लान।

SIR को ईसीआई ने 'लोकतंत्र की सफाई अभियान' का नाम दिया है। चीफ इलेक्शन कमिश्नर (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के अनुसार, यह 21 साल बाद हो रही प्रक्रिया है, जो 2004 के बाद पहली बार पूरे देश में चल रही है। इसका मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची से डुप्लिकेट, मृतक या फर्जी नाम हटाना, नए योग्य वोटरों को जोड़ना और डेमोग्राफिक बदलावों को शामिल करना है। बिहार के पहले फेज में इससे 2 लाख से अधिक फर्जी एंट्रीज हटीं, और कोई अपील नहीं आई। ईसीआई का दावा है कि इससे फ्री एंड फेयर इलेक्शन सुनिश्चित होगा, खासकर 2026 के विधानसभा चुनावों में।

यह क्रांति इसलिए मानी जा रही है क्योंकि डिजिटल टूल्स और आधार-आधारित सत्यापन से प्रक्रिया तेज और सटीक हो जाएगी। युवाओं, महिलाओं और प्रवासियों के लिए विशेष कैंप लगेंगे, जिससे वोटर टर्नआउट बढ़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि साफ-सुथरी सूची से फर्जी वोटिंग रुकेगी, जो भारतीय लोकतंत्र की विश्वसनीयता बढ़ाएगी। लेकिन क्या यह सिर्फ आंकड़ों की सफाई है या वोटिंग को मजबूत करने वाली क्रांति?

कंट्रोवर्सी का बादल: विपक्ष का आरोप

SIR की घोषणा होते ही विपक्ष ने इसे 'वोटर सप्रेशन' का हथियार बता दिया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अगस्त 2025 में लोकसभा में आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया अल्पसंख्यकों और गरीबों को वोट से वंचित करने की साजिश है। तमिलनाडु की डीएमके और पश्चिम बंगाल की टीएमसी ने कहा कि दस्तावेज सत्यापन से लाखों लोग बाहर हो जाएंगे, खासकर ग्रामीण और प्रवासी मजदूर। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त में दिल्ली में विपक्षी मार्च के दौरान राहुल गांधी सहित कई नेता हिरासत में लिए गए।

बीबीसी की एक रिपोर्ट में बिहार के ड्राफ्ट रोल में गलत फोटो और मृतकों के नाम रहने का जिक्र है, जो ईसीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है। विपक्ष का तर्क है कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों को छूट देने से यह चुनावी रणनीति लगती है। ईसीआई ने खंडन किया है- आधार को केवल पहचान प्रमाण माना गया है, नागरिकता का नहीं, और सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कोई भेदभाव नहीं। सीईसी ने कहा, 'यह संवैधानिक कर्तव्य है, न कि राजनीतिक खेल।' बिहार में शून्य अपील से ईसीआई का पक्ष मजबूत हुआ है, लेकिन 2026 चुनावों से पहले विवाद और गहरा सकता है।

बिहार की तर्ज पर 12 राज्यों में SIR अभियान: चुनाव आयोग का बड़ा ऐलान

SIR का स्टेप-बाय-स्टेप पूरा प्लान

SIR रेप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 21 के तहत चलाया जाएगा। क्वालीफाइंग डेट 1 जनवरी 2026 तय की गई है। नीचे स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:

स्टेप 1: अधिसूचना और जागरूकता
ईसीआई द्वारा आधिकारिक गजट नोटिफिकेशन जारी होगा। 4 नवंबर से गणना (Enumeration) शुरू। सभी मौजूदा वोटरों को फॉर्म भरने का निर्देश। जागरूकता के लिए राजनीतिक दल, एनजीओ और हेल्पलाइन (1950) सक्रिय होंगे। बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मदद करेंगे।

स्टेप 2: फॉर्म जमा और अपडेट
हर वोटर को एन्यूमरेशन फॉर्म भरना होगा, जिसमें नाम, पता, उम्र, लिंग और नागरिकता डिटेल्स कन्फर्म होंगी। नए वोटर (18+) फॉर्म 6 भरेंगे। फॉर्म nvsp.in पर ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा। बिहार फेज से अलग, यहां फॉर्म सरल किया गया है।

स्टेप 3: दस्तावेज सत्यापन
2003 के बाद रजिस्टर्ड वोटरों को पहचान प्रमाण देना होगा। आधार मान्य है (सुप्रीम कोर्ट के अनुसार), लेकिन नागरिकता के लिए पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र या वोटर आईडी जरूरी। ईसीआई ने स्पष्ट किया कि आधार जन्म या डोमिसाइल प्रूफ नहीं है। यह स्टेप फर्जीवाड़ा रोकेगा।

स्टेप 4: ड्राफ्ट रोल प्रकाशन
सभी फॉर्म्स और सत्यापन के बाद ड्राफ्ट सूची 9 दिसंबर 2025 को जारी। वोटर ईसीआई ऐप, वेबसाइट या बूथ पर चेक कर सकेंगे। इसमें जोड़ाव, हटाव या सुधार दिखेंगे।

स्टेप 5: दावे और आपत्तियां
ड्राफ्ट देखने के बाद 15-20 दिनों का समय मिलेगा। फॉर्म 6 (जोड़ना), 7 (हटाना), 8 (सुधार) भरें। बीएलओ और राजनीतिक दल जागरूकता फैलाएंगे, खासकर महिलाओं और एससी/एसटी के लिए।

स्टेप 6: जांच और सत्यापन
इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) सभी दावों की जांच करेंगे। विवादास्पद मामलों में सुनवाई होगी। डिजिटल टूल्स से तेजी आएगी।

स्टेप 7: फाइनल रोल प्रकाशन
सभी प्रक्रियाओं के बाद फाइनल सूची 7 फरवरी 2026 को जारी। यह 2026 चुनावों के लिए आधार बनेगी।

राजस्थान, एमपी, यूपी समेत 12 राज्यों में कल से SIR

SIR से मतदाता सूची की शुद्धता बढ़ेगी, जो फ्री एंड फेयर इलेक्शन के लिए जरूरी है। बिहार में इससे 2 लाख से अधिक फर्जी नाम हटे थे। लेकिन चुनौतियां भी हैं- छोटा समय, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, और दस्तावेजों की उपलब्धता। ईसीआई ने डिजिटल टूल्स और हेल्पलाइन (1950) से इसे आसान बनाने का वादा किया है।

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