कानपुर, राजेश द्विवेदी। यूपी में 16 महीने के बाद चुनावी बयार बहेगी, उसके पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने सोशल इंजीनियरिंग पर अपना कोर एजेण्डा धरातल पर उतार दिया है। अखिलेश यादव के पीडीए के जबाव में मायावती ने डीएमपी फार्मूला तैयार किया है। इस फार्मूले ने इंडिया अलाइंस के साथ भाजपा के माथे पर बल डाल दिए हैं। इस बार मायावती की खास नजर यूपी में 30 फीसद अति पिछड़े वर्ग के वोटबैंक पर है। बसपा सुप्रीमो को लगता है कि यूपी में अभी भी उनके साथ उनका कोर वोटबैंक 9 फीसद है लेकिन अगर 30 फीसद अति पिछड़ा मतदाता उनके साथ आ जाए तो देश के सबसे बड़े राज्य में उनकी धमक फिर से वापस लौट सकती है।
मायावती और पूरी बसपा अक्टूबर में लखनऊ में हुई महारैली से गदगद हैं, शायद इसीलिए मायावती ने पहले दलित समाज, फिर मुस्लिमों और शनिवार को पिछड़ों के साथ लखनऊ में गहन मंत्रणा की और अपनी भावी योजनाओं का खाका सबके सामने साझा किया। बसपा सुप्रीमो ने पीडीए के जवाब में डीएमपी फार्मूला तैयार किया है यानी पिछड़ा, दलित,मुस्लिम की काट को बसपा ने दलित, मुस्लिम और पिछड़ा मॉडल बनाया है। पिछड़ों से साथ बैठक में वे बोलीं कि ओबीसी समाज , सत्ता की मास्टर चाबी पाने के लिए बसपा के बैनर तले गोलबंद हो । पिछड़ा वर्ग जितनी जल्दी संगठित होंगे, उनके अच्छे दिन उतनी जल्दी आएंगे। मायावती ने अखिलेश यादव को इंगित करते हुए यह भी कहा कि ओबीसी समाज विभिन्न जातियों में टूटा व बिखरा है। जिसका लाभ सपा जैसी जातिवादी पार्टियां चुनाव में उठाती रहतीं हैं पर अब हम यह नहीं होने देंगे।
एक बात और, मायावती ने अपर कास्ट यानी सवर्णों खासकर ब्राह्मणों को लेकर भी अपना नजरिया साफ कर दिया है। मायावती की मंशा पर गौर करेंगे तो वह कह रहीं हैं कि ब्राह्मण यूपी में आहत महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस के बाद भाजपा ने उनका इस्तेमाल किया है इसलिए मायावती को लगता है कि यह समाज राजनीतिक तौर पर जागरूक हो चुका है। इनको जोड़ने के लिए अलग से भाईचारा संगठन बनाने की जरूरत नहीं है। यह समाज बसपा में अपना हित सुरक्षित होते देखकर खुद ही पार्टी से जुड़ जाएगा।
मायावती ने यह भी साफ कर दिया है कि पार्टी में आकाश आनंद और सतीश चन्द्र मिश्र की भूमिका अहम रहने वाली है इसलिए उन्होंने कहा है कि पिछड़ों-मुस्लिम लोगों को ’बहुजन समाज’ से जोड़कर अत्याचार से मुक्ति दिलाने के लिए संघर्षरत है, जो कि देश के लोकतंत्र की सुरक्षा तथा देशहित में भी जरूरी है।
जहां तक दलितों की सोच को लेकर है, उस पर भी मायावती ने नई चाल दी है। उन्होंने बामसेफ के बारे में फैलाई जा रही भ्रांतियों को दूर करने के उद्देश्य से कहा कि यह राजनीतिक संगठन या पार्टी नहीं, बल्कि पढ़े-लिखे कर्मचारियों का एक सामाजिक संगठन है, जिनका प्रमुख कार्य अपनी सुविधानुसार बहुजन समाज के लोगों में सामाजिक चेतना पैदा करना है। साफ है कि आने वाले समय में बसपा कांशीराम के बामसेफ को जगाएगी ताकि आरएसएस की तर्ज पर बामसेफ के सदस्य बसपा को जमीनी तौर पर मजबूत करें।
मायावती अपनी खोई जमीन पाने की जुगत में लग गईं हैं लेकिन उनके लिए चन्द्रशेखर रावण बड़ी चुनौती बन गए हैं क्योंकि चन्द्रशेखर लगातार पश्चिम यूपी में बसपा को बड़ा डेंट मार रहे हैं, ऐसे में सवाल यही है कि मायावती चन्द्रशेखर का तोड़ क्या लाएंगी? कहा तो जा रहा है कि उन्होंने आकाश आनंद को पश्चिम यूपी के सभी जिलों का दौरा करने का रोडमैप दिया है। बहरहाल यूपी की राजनीति में हलचल है और मायावती ने सभी दलों को तनाव तो दे ही दिया है।



