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तेजस्वी का मास्टरस्ट्रोक: 10 बड़े वादों से

तेजस्वी का मास्टरस्ट्रोक: 10 बड़े वादों से "खड़ा" सत्ता की कुर्सी पर संकट

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मैदान में विपक्षी महागठबंधन ने आज एक धमाकेदार हमला बोला है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और गठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे तेजस्वी यादव ने पटना के होटल मौर्या में आयोजित भव्य प्रेस कॉन्फ्रेंस में 'तेजस्वी प्रण पत्र' नामक साझा घोषणा पत्र जारी किया।

चुनावी जंग के इस दौर में, जहां नीतीश कुमार की एनडीए सरकार पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और महंगाई के आरोप लग रहे हैं, महागठबंधन का यह घोषणा पत्र सत्ता पलटने का मजबूत हथियार बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये वादे युवाओं, महिलाओं, किसानों और गरीबों की नब्ज को पकड़ते हैं, जो बिहार की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं। यदि ये वादे जनता की उम्मीदें जगाने में सफल रहे, तो 10 नवंबर को होने वाले पहले चरण के मतदान से ही सत्ता की दिशा बदल सकती है। आइए, इन 10 बड़े वादों पर नजर डालें, जो न केवल आकर्षक हैं बल्कि अमल के दावे के साथ पेश किए गए हैं।

1. हर परिवार में एक सरकारी नौकरी

घोषणा पत्र का सबसे चर्चित वादा है हर परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देना। तेजस्वी ने स्पष्ट किया कि सरकार बनते ही 20 दिनों के अंदर इसके लिए अधिनियम पारित किया जाएगा और अगले 20 महीनों में भर्ती प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह उन परिवारों के लिए है जहां पहले से कोई सरकारी नौकरी नहीं है। बिहार में बेरोजगारी दर 15 प्रतिशत से ऊपर होने के बीच यह वादा युवाओं को सीधे लुभा सकता है। राजनीतिक विश्लेषक राम पुनियानी कहते हैं, "यह 2020 के '10 लाख नौकरियों' वादे का विस्तार है, लेकिन अब यह अधिक लक्षित और समयबद्ध लगता है।"

2. भूमिहीनों को 5 डिसमिल जमीन

राज्य के लाखों भूमिहीन परिवारों को 5 डिसमिल जमीन का मालिकाना हक देने का वादा किया गया है। तेजस्वी ने इसे 'भूमि सुधार का नया दौर' बताया, जो दलितों और पिछड़ों को सशक्त बनाएगा। बिहार में 20 लाख से अधिक भूमिहीन परिवार हैं, और यह वादा ग्रामीण वोट बैंक को मजबूत कर सकता है।

3. 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली

हर घर को 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराने का ऐलान है। महंगाई के दौर में बिजली बिल एक बड़ा बोझ है, और यह वादा मध्यम वर्ग को राहत देगा। कांग्रेस नेता शक्ति सिंह कहते हैं, "यह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की मुफ्त बिजली योजना से प्रेरित है, लेकिन बिहार के संदर्भ में अधिक व्यावहारिक।"

4. 500 रुपये में गैस सिलेंडर

रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 500 रुपये प्रति सिलेंडर करने का वादा महिलाओं और गृहणियों को सीधा लाभ पहुंचाएगा। केंद्र की उज्ज्वला योजना के बाद भी गैस की कीमतें 800 रुपये के आसपास हैं, इसलिए यह वादा घर-घर की रसोई तक पहुंच सकता है।

5. माई-बहिन योजना

महिलाओं के लिए 'माई-बहिन योजना' लॉन्च करने का वादा है, जो आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण पर केंद्रित होगी। विवरण बाद में आएगा, लेकिन तेजस्वी ने इसे 'महिलाओं की ताकत' बताया। बिहार में महिला मतदाताओं की संख्या 4 करोड़ से अधिक है, और यह वादा पितृसत्तात्मक समाज में बदलाव ला सकता है।

6. पुरानी पेंशन योजना की बहाली

सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का ऐलान है। एनपीएस (नई पेंशन योजना) के खिलाफ लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करते हुए यह वादा शिक्षकों और स्वास्थ्यकर्मियों को आकर्षित करेगा।

7. दिव्यांगों के लिए विशेष पेंशन

दिव्यांग व्यक्तियों के लिए अलग पेंशन योजना शुरू की जाएगी। बिहार में 5 लाख से अधिक दिव्यांग हैं, और यह वादा सामाजिक न्याय की छवि मजबूत करेगा।

8. अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी नौकरी

सभी अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी करने का वादा है। राज्य में 4 लाख से अधिक संविदा कर्मचारी हैं, जो वर्षों से स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं। यह वादा सरकारी मशीनरी को मजबूत करने का संकेत देता है।

9. पंचायत प्रतिनिधियों को दोगुना भत्ता

ग्रामीण पंचायत प्रतिनिधियों के भत्ते को दोगुना करने का वादा है। इससे स्थानीय स्तर पर विकास कार्य तेज होंगे और गठबंधन की ग्रामीण पहुंच बढ़ेगी।

10. मेहनतकश जातियों के लिए 5 लाख ब्याज रहित राशि

नाई, कुम्हार, बढ़ई, लोहार, माली और मोची जैसी मेहनतकश जातियों को 5 साल के लिए 5 लाख रुपये की ब्याज रहित राशि दी जाएगी। यह राशि औजार खरीदने और स्वरोजगार शुरू करने में मदद करेगी। तेजस्वी ने इसे 'कुशल हाथों का सम्मान' कहा।

ये वादे जारी होते ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। #TejaswiPranPatra हैशटैग ट्रेंड कर रहा है, जहां युवा इसे 'बिहार का नया अध्याय' बता रहे हैं। हालांकि, एनडीए ने इसे 'असंभव सपने' करार दिया है। भाजपा नेता प्रवेश सिंह ने कहा, "तेजस्वी के वादे हवा-हवाई हैं, जनता 2020 की असफलताओं को भूली नहीं है।"

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, ये वादे सत्ता पलटने की क्षमता रखते हैं क्योंकि वे बजट के 40-50 प्रतिशत हिस्से पर निर्भर हैं, जो राज्य की जीडीपी वृद्धि से संभव है। महागठबंधन के पास 130 से अधिक सीटों का लक्ष्य है, और यदि युवा वोट (35 प्रतिशत) इन वादों से प्रेरित हुए, तो नीतीश सरकार की 20 साल पुरानी सत्ता डगमगा सकती है। तेजस्वी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राहुल गांधी का जिक्र करते हुए कहा, "यह प्रण पत्र इंडिया अलायंस का हिस्सा है, जो बिहार को न्याय दिलाएगा।"

बिहार की सियासत अब इन वादों पर केंद्रित हो गई है। क्या 'तेजस्वी प्रण पत्र' वोटों का तूफान लाएगा या फिर पुरानी कहानी दोहराएगा? कमेंट में जरूर बताए।

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