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तेजस्वी यादव का तीखा हमला: “ जब लालूजी नहीं डरे, तो तेजस्वी क्या डरेगा!

तेजस्वी यादव का तीखा हमला: “ जब लालूजी नहीं डरे, तो तेजस्वी क्या डरेगा!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभेरी के बीच राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने शुक्रवार को सहरसा की सिमरी बख्तियारपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर तीखा प्रहार किया। महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में अपनी नई भूमिका में उतरते हुए तेजस्वी ने कहा, "मोदीजी गुजरात में फैक्ट्री लगाएंगे, बिहार में जीत चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। हम बिहारी हैं, हम बाहरियों से नहीं डरते।" इस बयान ने एक बार फिर बिहार बनाम गुजरात की पुरानी बहस को हवा दे दी है।

तेजस्वी ने अपने पिता और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का जिक्र करते हुए कहा, "जब लालूजी मोदी से नहीं डरते, तो क्या उनका बेटा डरेगा?" यह बयान सभा में मौजूद हजारों समर्थकों के बीच जोरदार तालियों की गड़गड़ाहट लेकर आया। तेजस्वी ने आगे कहा कि बिहार के लोग अब 'बाहरी' ताकतों के आगे झुकने वाले नहीं हैं। "हमारी लड़ाई बिहार के सम्मान की है, नौकरियों की है, विकास की है। केंद्र सरकार ने 11 सालों में बिहार को क्या दिया? प्रति व्यक्ति आय सबसे कम, किसान कर्ज में डूबे, युवा बेरोजगार। ये वही लोग हैं जो गुजरात को स्वर्ग बना चुके हैं, लेकिन बिहार को भिखारी बनाए रखना चाहते हैं।

यह बयान बिहार चुनावी माहौल को और गर्मा देने वाला है, जहां महागठबंधन और एनडीए के बीच आरोप-प्रत्यारोप की बौछार चल रही है। गुरुवार को ही पटना में आयोजित महागठबंधन की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी को औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किया गया था। इस घोषणा के ठीक अगले दिन उन्होंने पांच जिलों – सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर और वैशाली – में चुनावी सभाओं का दौरा शुरू किया। सहरसा की सभा महागठबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव थी, क्योंकि यह क्षेत्र यादव और मुस्लिम वोट बैंक का मजबूत गढ़ माना जाता है। तेजस्वी ने यहां न केवल मोदी सरकार पर हमला बोला, बल्कि एनडीए के 20 साल के शासन पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि अगर एनडीए सत्ता में लौटी, तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पद भी खतरे में पड़ जाएगा। "नीतीश जी को खुद पता है कि दिल्ली की हां में हां मिलाने से बिहार का भला नहीं होता।"

तेजस्वी के भाषण का केंद्रबिंदु बिहार की आर्थिक बदहाली पर रहा। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के 'विकास मॉडल' में बिहार को कभी प्राथमिकता नहीं मिली। "गुजरात में अंबानी-अडानी की फैक्टरियां लग रही हैं, लेकिन बिहार में केवल वादे। हम वादा करते हैं – अगर इंडिया गठबंधन की सरकार बनी, तो रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 500 रुपये और वृद्धावस्था पेंशन 1500 रुपये होगी।" यह वादा विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों के बीच चर्चा का विषय बन गया। सभा में मौजूद महिलाओं ने नारों के साथ समर्थन जताया, जबकि युवा वर्ग ने 'तेजस्वी सीएम बनेगा' के नारे लगाए। तेजस्वी ने आगे जोर देकर कहा कि उनकी राजनीति 'झूठ' पर नहीं, बल्कि 'भरोसे' पर टिकी है। "जनता अगर हमें मौका देगी, तो बिहार के लोग चिंता मुक्त हो जाएंगे।"

दूसरी ओर, एनडीए ने तेजस्वी के तंज का तुरंत जवाब दिया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग ने इसे 'सरासर झूठ' करार देते हुए कहा, "तेजस्वी यादव का परिवार भ्रष्टाचार, जंगल राज और नौकरियों के बदले जमीन हड़पने का इतिहास रखता है। बिहार की जनता ऐसे झूठे वादों पर भरोसा नहीं करेगी।" चुग ने याद दिलाया कि एनडीए सरकार ने हाल ही में महिलाओं के लिए 10 हजार रुपये की रोजगार योजना शुरू की, जिसमें 21 लाख महिलाओं को लाभ मिला। इसी तरह, भाजपा सांसद रवि किशन ने महागठबंधन को 'जमीनी स्तर पर आधारहीन' बताया और कहा कि एनडीए ऐतिहासिक जीत की ओर अग्रसर है। "बिहार का ऊर्जावान विकास तभी संभव है जब केंद्र से बड़ा पैकेज आए।"

उसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी बिहार में अपना चुनावी दौरा शुरू किया। समस्तीपुर पहुंचे मोदी ने भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि दी और उनके परिवार से मुलाकात की। दोपहर में बेगूसराय के दूधपूरा में एक 45 मिनट की सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने विकास योजनाओं का जिक्र किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने समस्तीपुर में कहा, "2005 से एनडीए सरकार आने के बाद बिहार का विकास हो रहा है। पीएम मोदी बिहार के लिए बहुत काम कर रहे हैं।" नीतीश का यह बयान तेजस्वी के तंज के सीधे जवाब के रूप में देखा जा रहा है।

बिहार चुनाव 2025 का यह दौर राजनीतिक रूप से बेहद रोचक है। 243 सीटों वाली विधानसभा के लिए मतदान दो चरणों में हो रहा है – पहला चरण 20 अक्टूबर को संपन्न हो चुका है, जबकि दूसरा चरण 27 अक्टूबर को है। मतगणना 5 नवंबर को होगी। महागठबंधन (आरजेडी, कांग्रेस, वाम दल) और एनडीए (भाजपा, जेडीयू, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा) के बीच कांटे की टक्कर है। सर्वे के अनुसार, महागठबंधन को 120-130 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि एनडीए 100-110 पर सिमट सकता है। मुद्दे स्पष्ट हैं – विकास, रोजगार, जातिगत जनगणना और केंद्र-राज्य संबंध।

तेजस्वी का यह तंज लालू प्रसाद की राजनीतिक विरासत को मजबूत करने का प्रयास भी लगता है। लालू, जो स्वास्थ्य कारणों से सक्रिय राजनीति से दूर हैं, ने हमेशा 'बिहारी अस्मिता' को हथियार बनाया है। 1990 के दशक में लालू ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू कराकर पिछड़ों को सशक्त किया था, और आज तेजस्वी उसी धागे को जोड़ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान यादव-मुस्लिम गठजोड़ को और मजबूत करेगा, लेकिन भाजपा इसे 'विभाजनकारी' बताकर हिंदू एकता का कार्ड खेल सकती है।

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