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तेजस्वी यादव का तीखा हमला, बोले- सरकार बनते ही वक्फ बिल को कूड़ेदान में फेंक देंगे'

तेजस्वी यादव का तीखा हमला, बोले- सरकार बनते ही वक्फ बिल को कूड़ेदान में फेंक देंगे'

बिहार की सियासत में एक बार फिर हंगामा मच गया है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर महागठबंधन की सरकार बनती है, तो इस बिल को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा। यह बयान उन्होंने पटना में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान दिया, जहां हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।

तेजस्वी यादव का यह बयान वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ देशव्यापी विरोध का हिस्सा है। अप्रैल 2025 में भी उन्होंने इसी तरह का बयान दिया था, लेकिन जून में पटना के गांधी मैदान में हुए विशाल धरना-प्रदर्शन ने इसे नई ऊंचाई दे दी। प्रदर्शन में तेजस्वी के अलावा पूर्व सांसद पप्पू यादव, आरजेडी के अन्य नेता और विभिन्न मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। अनुमान है कि करीब 50,000 से अधिक लोग इस कार्यक्रम में शरीक हुए, जो बिहार में मुस्लिम समुदाय की नाराजगी को दर्शाता है।

वक्फ बिल

वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पारित कराया था, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाना बताया गया। लेकिन विपक्ष इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों पर हमला मानता है। बिल के प्रमुख प्रावधानों में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति, सरकारी हस्तक्षेप बढ़ाना और संपत्तियों के सर्वेक्षण को अनिवार्य करना शामिल है। आलोचकों का कहना है कि यह धार्मिक स्वायत्तता का उल्लंघन है और अल्पसंख्यक समुदाय को हाशिए पर धकेलने की साजिश।

बिहार में, जहां मुस्लिम आबादी करीब 17 प्रतिशत है, यह मुद्दा चुनावी दांव पर लग चुका है। महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस-वाम दलों) ने इसे अपनी चुनावी रणनीति का केंद्र बना लिया है। तेजस्वी ने प्रदर्शन के दौरान कहा, "यह बिल मुसलमानों की संपत्तियों को लूटने का षड्यंत्र है। बिहार की जनता इसे कभी स्वीकार नहीं करेगी। हमारी सरकार बनेगी, तो यह काला कानून कूड़ेदान की जगह लेगा।" उनके इस बयान पर मौजूद भीड़ ने जोरदार तालियां बजाईं और 'मोदी हटाओ, वक्फ बचाओ' के नारे लगाए।

पप्पू यादव ने भी तेजस्वी के बयान का समर्थन करते हुए कहा, "बिहार की मिट्टी में सांप्रदायिकता का जहर घोलने की कोशिश नाकाम होगी। एनडीए सरकार का अंत नजदीक है।" प्रदर्शन के दौरान वक्फ बोर्ड की संपत्तियों पर कब्जे की घटनाओं का जिक्र करते हुए वक्ताओं ने केंद्र पर हमला बोला। एक रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में ही 2,000 से अधिक वक्फ संपत्तियां विवादों में घिरी हुई हैं, जो इस बिल से और जटिल हो सकती हैं।

बीजेपी का पलटवार

तेजस्वी के इस बयान पर सत्तारूढ़ एनडीए ने तीखा पलटवार किया। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा, "तेजस्वी यादव कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कर रहे हैं, जो लोकतंत्र का अपमान है। यह इमरजेंसी की याद दिलाता है, जब कांग्रेस ने संविधान को तार-तार किया था।" जेडीयू के एक नेता ने भी इसे 'अराजकता की राजनीति' करार दिया। दूसरी ओर, कांग्रेस ने तेजस्वी का साथ देते हुए कहा कि वक्फ बिल अल्पसंख्यक विरोधी है और इसे वापस लेना चाहिए।

यह विवाद बिहार चुनावों के नजदीक आते ही और तेज हो गया है। 2025 के विधानसभा चुनावों में महागठबंधन 2015 की तरह सत्ता हासिल करने की कोशिश में है, जबकि एनडीए नीतीश कुमार के नेतृत्व में मजबूत स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह ऐलान मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट करने का प्रयास है। एक सर्वे के मुताबिक, बिहार के मुस्लिम मतदाता 70 प्रतिशत से अधिक विपक्ष की ओर झुक रहे हैं।

वक्फ बिल का राष्ट्रीय परिदृश्य

राष्ट्रीय स्तर पर भी वक्फ बिल ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है। अप्रैल 2025 में लोकसभा में पेश होने के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) को भेजा गया था, लेकिन जून तक पारित हो गया। विपक्षी दलों ने इसे 'धार्मिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात' बताया। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बिहार के अलावा, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी विरोध हो रहा है।

तेजस्वी का बयान अप्रैल में भी सुर्खियां बटोर चुका था, जब उन्होंने कहा था, "हम सरकार बनाएंगे और इस बिल को कूड़ेदान में डाल देंगे।" लेकिन जून का प्रदर्शन अधिक संगठित था। आरजेडी ने इसे 'वक्फ बचाओ अभियान' का नाम दिया है, जो पूरे बिहार में फैल रहा है। पार्टी के प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा, "यह जन आंदोलन बनेगा, जो एनडीए को उखाड़ फेंकेगा।"

बिहार की सियासत में नया मोड़

बिहार में वक्फ मुद्दा नया नहीं है। 2023 में वक्फ बोर्ड चुनावों के दौरान भी विवाद हुआ था। लेकिन केंद्र का यह संशोधन बिल राज्य स्तर पर चुनौती पैदा कर रहा है। अगर महागठबंधन सत्ता में आया, तो क्या वे वाकई इसे लागू होने से रोक पाएंगे? विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य सरकारें केंद्र के कानूनों को पूरी तरह नकार नहीं सकतीं, लेकिन नीतिगत स्तर पर विरोध दर्ज करा सकती हैं।

तेजस्वी यादव, जो लालू प्रसाद यादव के बेटे हैं, ने पिछले कुछ वर्षों में युवा और अल्पसंख्यक वोटरों को लक्षित करने वाली रणनीति अपनाई है। 2020 के चुनावों में हार के बाद वे 'माई फेमिली' कैंपेन से उभरे। अब वक्फ बिल पर यह ऐलान उनकी छवि को और मजबूत कर सकता है। लेकिन बीजेपी इसे 'वोटबैंक की राजनीति' बता रही है।

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