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NDA के घोषणापत्र पर तेजस्वी का हमला—कहा, जनता से माफी मांगनी चाहिए, वादे नहीं!

NDA के घोषणापत्र पर तेजस्वी का हमला—कहा, जनता से माफी मांगनी चाहिए, वादे नहीं!

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के अंतिम और निर्णायक दौर में राजनीतिक तापमान चरम पर पहुंच गया है। महागठबंधन के मुख्यमंत्री पद के दावेदार और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव ने आज एनडीए के ‘संकल्प पत्र’ (घोषणा-पत्र) पर जोरदार हमला बोला। राघोपुर विधानसभा क्षेत्र में एक जनसभा को संबोधित करते हुए तेजस्वी ने कहा, “एनडीए को संकल्प पत्र नहीं, बल्कि ‘सॉरी पत्र’ लाना चाहिए था। 20 सालों तक सत्ता में रहने के बाद बिहार सबसे गरीब राज्य बना हुआ है। कोई कारखाना नहीं खुला, कोई निवेश नहीं आया, हर क्षेत्र में यह सरकार पूरी तरह विफल रही है। जनता से माफी मांगनी चाहिए।”

यह बयान बिहार की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। चुनाव 6 नवंबर को होने वाले हैं, और दोनों गठबंधनों ने अपने-अपने घोषणा-पत्र जारी कर जनता को लुभाने की कोशिश की है। एनडीए ने आज सुबह पटना के मौर्या होटल में अपना ‘संकल्प पत्र’ जारी किया, जबकि महागठबंधन ने तीन दिन पहले ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ पेश किया था। तेजस्वी का यह तंज न केवल एनडीए की नीतियों पर सवाल उठाता है, बल्कि बिहार की लंबे समय से चली आ रही आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों को भी उजागर करता है।

तेजस्वी का हमला

तेजस्वी यादव ने अपनी सभा में एनडीए सरकार पर सीधी चोट की। उन्होंने कहा, “नीतीश कुमार और भाजपा ने 20 सालों में बिहार को क्या दिया? बेरोजगारी, गरीबी और अपराध का बोलबाला। आज भी बिहार में युवा नौकरी के लिए दूसरे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। कोई बड़ा उद्योग नहीं लगा, न ही कोई बड़ा निवेश आया। संकल्प पत्र में जो वादे हैं, वे तो जुमले हैं। असल में जनता को ‘सॉरी’ कहना चाहिए कि इतने लंबे समय तक हमें धोखा दिया।”

राघोपुर में सभा के दौरान तेजस्वी ने स्थानीय मुद्दों को भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि एनडीए की सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कोई राहत नहीं दी, न ही स्वास्थ्य और शिक्षा पर ध्यान दिया। “जनता अब झांसे में नहीं आएगी। वे बदलाव चाहते हैं, एक अपराध-मुक्त और घोटाला-मुक्त शासन चाहते हैं। एनडीए को चुनाव में सबक सिखाएंगे,” उन्होंने चेतावनी दी। तेजस्वी का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जहां विपक्षी समर्थक इसे ‘सटीक प्रहार’ बता रहे हैं।

बिहार की राजनीति में तेजस्वी का उदय 2015 के बाद से ही चर्चा में रहा है। लालू प्रसाद यादव के पुत्र के रूप में वे युवाओं के चेहरे बने हैं। 2020 के चुनाव में महागठबंधन की हार के बावजूद, तेजस्वी ने विपक्ष की कमान संभाली और अब 2025 में सीएम पद की दौड़ में मजबूत दावेदार हैं। उनका ‘सॉरी पत्र’ वाला बयान एनडीए की लंबी सत्ता पर पहला बड़ा सवाल है, जो चुनावी बहस को नई दिशा दे सकता है।

एनडीए का संकल्प पत्र, बड़े वादे

एनडीए ने आज जारी अपने ‘संकल्प पत्र’ में बिहार को ‘विकसित राज्य’ बनाने के बड़े-बड़े वादे किए हैं।

  • रोजगार: 1 करोड़ नौकरियां पैदा करना, हर जिले में मेगा स्किल सेंटर स्थापित करना और इन्हें ग्लोबल स्किलिंग सेंटर में बदलना।
  • बुनियादी ढांचा: 7 एक्सप्रेस-वे बनाना, पटना के अलावा चार शहरों में मेट्रो सेवा शुरू करना, 10 नए औद्योगिक पार्क खोलना और 5 सालों में 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य: कक्षा KG से PG तक मुफ्त शिक्षा, हर जिले में मेडिकल कॉलेज और एक वर्ल्ड-क्लास मेडिसिटी।
  • महिला सशक्तिकरण: महिलाओं को लाखपति उद्यमी बनाना, अत्यंत पिछड़े वर्ग (EBC) के लिए 10 लाख रुपये की सहायता।
  • कृषि: ‘मेड इन बिहार’ योजना से कृषि निर्यात दोगुना करना।

एनडीए नेताओं ने इसे ‘जन-केंद्रित’ बताया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “यह संकल्प पत्र बिहार को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। हमने पहले भी वादे निभाए हैं।” भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसे ‘विकास का रोडमैप’ कहा। लेकिन विपक्ष का कहना है कि ये वादे पुराने जुमलों की तरह हैं। तेजस्वी ने इन्हें ‘हवा में उड़ते गुब्बारे’ करार दिया।

महागठबंधन का ‘तेजस्वी प्रण पत्र’

महागठबंधन ने तीन दिन पहले जारी ‘तेजस्वी प्रण पत्र’ में तत्काल और ठोस वादे किए हैं, जो एनडीए के लंबे-कालिक प्लान से अलग हैं।

  • रोजगार: हर परिवार में एक सदस्य को 20 दिनों में सरकारी नौकरी, डोमिसाइल पॉलिसी लागू कर बिहारियों को प्राथमिकता।
  • महिलाएं: ‘माई बहिन मान योजना’ से महिलाओं को मासिक 2,500 रुपये, सालाना 30,000 रुपये। जीविका दीदियों को 30,000 रुपये वेतन।
  • सामाजिक सुरक्षा: विधवाओं और बुजुर्गों को 1,500 रुपये पेंशन (बढ़ोतरी के साथ), दिव्यांगों को 3,000 रुपये। 200 यूनिट मुफ्त बिजली।
  • शिक्षा-स्वास्थ्य: हर ब्लॉक में डिग्री कॉलेज, 2,000 एकड़ में एजुकेशन सिटी। 25 लाख तक स्वास्थ्य बीमा, जिला अस्पतालों में सुपर-स्पेशलिस्ट।
  • कृषि: सभी फसलों पर MSP गारंटी, MGNREGA मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन और 200 दिनों का काम।
  • अन्य: पुरानी पेंशन बहाल, वक्फ संशोधन विधेयक रोकना, पेपर लीक पर सख्ती।

तेजस्वी ने कहा, “हमारा प्रण पत्र सपनों का नहीं, हकीकत का दस्तावेज है। एनडीए के 20 सालों की तुलना में हम 5 सालों में बिहार बदल देंगे।” महागठबंधन में राजद, कांग्रेस और वाम दलों के अलावा अन्य छोटे दल भी शामिल हैं, जो इसे ‘जाति-आधारित एकता’ का प्रतीक बता रहे हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं, बहस तेज

एनडीए ने तेजस्वी के बयान पर पलटवार किया। भाजपा नेता तरुण चुग ने कहा, “तेजस्वी यादव चारा घोटाले की याद दिला रहे हैं। एनडीए ने बिहार को जंगलराज से बचाया। उनके ‘सॉरी पत्र’ की जरूरत खुद यादव परिवार को है।” जदयू के एक नेता ने कहा, “20 सालों में बिहार ने प्रगति की है, पलायन कम हुआ है। तेजस्वी के वादे अव्यवहारिक हैं।”

वहीं, कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुडा ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाए, जबकि राहुल गांधी ने कल अपनी रैली में ‘न्याय की गारंटी’ दोहराई। प्राशांत किशोर जैसे रणनीतिकारों का मानना है कि तेजस्वी का तंज युवा मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है, जहां बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है।

बदलाव की ललकार

बिहार चुनाव अब घोषणा-पत्रों से ज्यादा विफलताओं और वादों की जंग बन चुका है। तेजस्वी का ‘सॉरी पत्र’ वाला बयान एनडीए की लंबी सत्ता पर पहला बड़ा सवाल है, जो जनता के बीच बहस छेड़ सकता है। क्या बिहार 20 साल पुरानी सरकार को माफ करेगा या बदलाव चुनेगा? 6 नवंबर का फैसला ही बताएगा।

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