बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। चुनाव आयोग ने उनके खिलाफ दो अलग-अलग वोटर आईडी (EPIC नंबर) रखने के मामले में नोटिस जारी किया है। पहले तेजस्वी ने दावा किया था की बिहार लिस्ट मे उनका नाम ही नही है, इस बयान के बाद सियासी घमासान शुरू हुआ।
अब चुनाव आयोग ने तेजस्वी से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है और तय समयसीमा के भीतर लिखित जवाब देने को कहा है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब तेजस्वी ने दावा किया कि उनका नाम बिहार की मसौदा मतदाता सूची से हटा दिया गया है, जिसे चुनाव आयोग ने तुरंत खारिज कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
तेजस्वी यादव ने 2 अगस्त 2025 को पटना में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि उनका नाम 1 अगस्त को प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से गायब है। उन्होंने चुनाव आयोग के आधिकारिक मोबाइल ऐप पर अपना EPIC नंबर (RAB2916120) डालकर दिखाया, जिसके बाद ऐप ने "कोई रिकॉर्ड नहीं मिला" का संदेश दिखाया। तेजस्वी ने सवाल उठाया, "मेरा नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, तो मैं विधानसभा चुनाव कैसे लड़ूंगा?" उन्होंने इसे मतदाताओं के अधिकारों का हनन और लोकतंत्र की हत्या करार दिया, साथ ही (SIR) प्रक्रिया को लेकर आयोग पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव आयोग ने तुरंत जवाब देते हुए कहा कि तेजस्वी का नाम मतदाता सूची में मौजूद है। आयोग ने पटना के दीघा विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 204 (बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी बिल्डिंग) की सूची में तेजस्वी का नाम क्रमांक 416 पर दर्ज होने की पुष्टि की, जिसमें उनका EPIC नंबर RAB0456228 बताया गया। आयोग ने तेजस्वी के दावे को "निराधार" और "तथ्यहीन" करार दिया।
तेदस्वी पर दो वोटर आईडी का आरोप
विवाद तब और गहरा गया जब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने तेजस्वी पर दो वोटर आईडी रखने का आरोप लगाया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि तेजस्वी ने 2020 के विधानसभा चुनाव में अपने नामांकन शपथ पत्र में EPIC नंबर RAB0456228 का उल्लेख किया था, जबकि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दूसरा EPIC नंबर RAB2916120 बताया। पात्रा ने सवाल उठाया, "क्या तेजस्वी यादव के पास दो वोटर आईडी हैं? यह कोई छोटी बात नहीं है, बल्कि एक गंभीर चुनावी अपराध है।" उन्होंने इसे आरजेडी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने का मौका बताया और कहा कि अगर शीर्ष नेता के पास दो वोटर आईडी हैं, तो पार्टी कार्यकर्ताओं की स्थिति क्या होगी?
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने भी सोशल मीडिया पर तेजस्वी पर निशाना साधा और इसे "वोटर आईडी धोखाधड़ी" करार दिया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी दावा किया कि तेजस्वी ने दो निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता के रूप में पंजीकरण कराया, जो अवैध है। उन्होंने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की।
चुनाव आयोग का नोटिस
चुनाव आयोग ने तेजस्वी को पत्र लिखकर उनके द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताए गए EPIC नंबर RAB2916120 का विवरण मांगा है। आयोग ने प्रारंभिक जांच में पाया कि यह नंबर आधिकारिक रूप से जारी नहीं किया गया है। पत्र में कहा गया, "प्रेस कॉन्फ्रेंस में आपके द्वारा उल्लेखित EPIC नंबर RAB2916120 आधिकारिक रूप से मौजूद नहीं है। कृपया इस नंबर से संबंधित वोटर आईडी कार्ड को जांच के लिए जमा करें।" आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि तेजस्वी का नाम मतदाता सूची में EPIC नंबर RAB0456228 के साथ दर्ज है, जो 2020 के चुनाव में उनके द्वारा दाखिल शपथ पत्र से मेल खाता है।
राजनीतिक विवाद और SIR का मुद्दा
यह विवाद बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद शुरू हुए सियासी घमासान का हिस्सा है। विपक्ष, खासकर आरजेडी और कांग्रेस, ने SIR को "वोटरों को बाहर करने की साजिश" करार दिया है। आयोग ने हाल ही में संशोधित मसौदा मतदाता सूची जारी की, जिसमें 65 लाख नामों को "अवैध मतदाता" बताकर हटा दिया गया। तेजस्वी और अन्य विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि यह प्रक्रिया उनके मूल वोटर बेस को निशाना बना रही है।
राहुल गांधी ने भी इस मुद्दे पर चुनाव आयोग की आलोचना की और कहा कि उनके पास "वोट चोरी" का सबूत है। बीजेपी ने जवाब में इसे विपक्ष की हार की आशंका और संस्थानों को बदनाम करने की कोशिश बताया।



