महिला वकीलों को बड़ा अधिकार! बार काउंसिल में 30% प्रतिनिधित्व की राह आसान, सुप्रीम कोर्ट ने दी मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने महिला वकीलों के प्रतिनिधित्व को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लिए तय 10 प्रतिशत सह-चयन (को-ऑप्शन) सीटों को भरने के लिए एक समान, पारदर्शी और निष्पक्ष प्रक्रिया बनाने की मंजूरी दे दी है। कोर्ट ने माना कि बीसीआई का प्रस्ताव संतुलित और न्यायसंगत दिखाई देता है। इस फैसले को कानूनी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
अब बचा था सिर्फ एक मुद्दा
चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि अधिकांश राज्य बार काउंसिलों के चुनाव या तो पूरे हो चुके हैं या अंतिम चरण में हैं। ऐसे में मुख्य सवाल यह था कि महिलाओं के लिए आरक्षित अतिरिक्त 10 प्रतिशत सीटों को को-ऑप्शन के जरिए कैसे भरा जाए। सुनवाई के दौरान बीसीआई ने अदालत को बताया कि उसने इसके लिए नियम तैयार कर लिए हैं और उन्हें लागू करने के लिए तैयार है।
30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का लक्ष्य
सुप्रीम कोर्ट ने अपने पुराने निर्देशों का भी जिक्र किया। अदालत ने याद दिलाया कि महिला वकीलों को कुल 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व देने की बात पहले ही कही जा चुकी है। इसमें 20 प्रतिशत सीटें चुनाव के जरिए और 10 प्रतिशत सीटें को-ऑप्शन के माध्यम से भरी जानी हैं। अदालत ने बीसीआई की ओर से पेश वकील राधिका गौतम को यह जिम्मेदारी दी कि वे राज्य बार काउंसिलों के निर्वाचित सदस्यों और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा कर एक समान प्रक्रिया तैयार करें।
छोटे राज्यों की चिंता भी उठी
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की समस्याओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कई बार कम सदस्य संख्या वाले राज्यों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता। उदाहरण के तौर पर गोवा का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हजारों वकीलों की मौजूदगी के बावजूद राज्य को अक्सर उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिलता। दमन और दीव समेत कई पूर्वोत्तर राज्यों में भी ऐसी स्थिति देखने को मिलती है।
CJI ने माना चिंता वाजिब
मुख्य न्यायाधीश ने इन चिंताओं को गंभीर और वास्तविक बताया। उन्होंने माना कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सामने प्रतिनिधित्व से जुड़ी चुनौतियां हैं। अदालत ने संकेत दिया कि को-ऑप्शन की प्रक्रिया तैयार करते समय इन विशेष परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जा सकता है ताकि किसी राज्य या क्षेत्र के साथ अन्याय न हो।
महिला वकीलों के लिए बड़ा कदम
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को महिला वकीलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे बार काउंसिलों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और निर्णय लेने वाली संस्थाओं में महिलाओं की आवाज मजबूत होगी। साथ ही पारदर्शी प्रक्रिया लागू होने से प्रतिनिधित्व को लेकर विवाद और शिकायतें भी कम होने की उम्मीद है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न्याय व्यवस्था में लैंगिक संतुलन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
