सूरज की सतह पर हुए एक बड़े विस्फोट ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक सूर्य के एक सक्रिय हिस्से से भारी मात्रा में चुंबकीय ऊर्जा और प्लाज्मा अंतरिक्ष में निकला है, जो अब पृथ्वी की दिशा में बढ़ रहा है। इस घटना को कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। अंतरिक्ष मौसम पर नजर रखने वाली एजेंसियों का मानना है कि इसका असर अगले कुछ घंटों या दिनों में पृथ्वी पर दिखाई दे सकता है। इसी वजह से दुनिया भर के वैज्ञानिक लगातार इस गतिविधि पर नजर बनाए हुए हैं।
तेज रफ्तार से बढ़ रहा बादल
रिपोर्ट के अनुसार यह विशाल सौर बादल करीब 1400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह सामान्य सौर गतिविधियों की तुलना में काफी शक्तिशाली है। सूर्य के जिस हिस्से से यह निकला है, वहां चुंबकीय ऊर्जा बहुत ज्यादा मात्रा में जमा हो गई थी। जब यह ऊर्जा अचानक बाहर निकली तो अंतरिक्ष में एक बड़ा चुंबकीय तूफान पैदा हो गया। अब यही तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराने की तैयारी में है।
क्या होता है सौर तूफान
सौर तूफान तब बनता है जब सूर्य से बड़ी मात्रा में चार्ज कण और चुंबकीय ऊर्जा अंतरिक्ष में निकलती है। जब ये कण पृथ्वी के आसपास पहुंचते हैं तो हमारे ग्रह के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं। इसके कारण उपग्रह संचार, रेडियो सिग्नल और कुछ तकनीकी सेवाओं पर असर पड़ सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि आम लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पृथ्वी का चुंबकीय कवच हमें काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करता है।
भारत में दिख सकता है दुर्लभ नजारा
इस सौर तूफान की सबसे खास बात यह है कि इसके प्रभाव से उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में ऑरोरा यानी रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देने की संभावना बन सकती है। आमतौर पर यह नजारा ध्रुवीय क्षेत्रों में ही देखने को मिलता है, लेकिन जब सौर गतिविधियां ज्यादा मजबूत होती हैं तो इसका दायरा नीचे तक आ जाता है। लद्दाख, नुब्रा वैली, पैंगोंग झील और हिमालय के कुछ ऊंचे इलाकों में यह दुर्लभ दृश्य दिखाई दे सकता है। अगर मौसम साफ रहा तो लोगों को आसमान में हरे, लाल और बैंगनी रंग की चमक नजर आ सकती है।
वैज्ञानिक क्यों हैं सतर्क
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अंतरिक्ष में पहले से मौजूद कुछ सौर बादल भी सक्रिय हैं। यदि नया तूफान पुराने बादलों से मिल जाता है तो इसका असर और ज्यादा मजबूत हो सकता है। इसी वजह से अंतरिक्ष मौसम वैज्ञानिक लगातार नए आंकड़ों का अध्ययन कर रहे हैं। अंतिम स्थिति का पता तब चलेगा जब यह सौर बादल पृथ्वी के करीब पहुंचेगा।
आसमान पर टिकी रहेंगी नजरें
फिलहाल पूरी दुनिया के वैज्ञानिक इस घटना पर नजर रखे हुए हैं। अगर अनुमान सही साबित हुए तो आने वाले समय में लोगों को एक बेहद खूबसूरत और दुर्लभ खगोलीय नजारा देखने को मिल सकता है। भारत में भी कई लोग इस उम्मीद में हैं कि उन्हें अपने ही आसमान में ऑरोरा देखने का मौका मिले। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि यह सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को कितना प्रभावित करता है और क्या वास्तव में उत्तरी भारत के आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देती है।
