बॉलीवुड के किंग शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान के डेब्यू डायरेक्टोरियल वेंचर 'द बाड्स ऑफ बॉलीवुड' ने रिलीज होते ही विवादों का केंद्र बन गया है। पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) अधिकारी समीर वानखेड़े ने दिल्ली हाईकोर्ट में शाहरुख खान और उनकी पत्नी गौरी खान की प्रोडक्शन कंपनी रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नेटफ्लिक्स समेत कई पक्षों के खिलाफ 2 करोड़ रुपये का मानहानि मुकदमा दायर किया है।
वानखेड़े का आरोप है कि इस वेब सीरीज में उनकी छवि को जानबूझकर नकारात्मक और अपमानजनक तरीके से पेश किया गया है, जो न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाता है, बल्कि ड्रग्स के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाली संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी कमजोर करता है।
क्या है मामला?
यह विवाद 2021 के उस चर्चित क्रूज ड्रग्स मामले से जुड़ा है, जिसमें समीर वानखेड़े तब एनसीबी के जोनल डायरेक्टर थे। 3 अक्टूबर 2021 को मुंबई के समुद्री इलाके में एक क्रूज पार्टी पर एनसीबी की छापेमारी हुई थी, जिसमें शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान सहित कई लोग गिरफ्तार हुए थे। वानखेड़े ने जांच का नेतृत्व किया था और सोशल मीडिया पर 'सत्यमेव जयते' का इस्तेमाल करते हुए मामले को सख्ती से पेश किया था। आर्यन को एक महीने जेल में रहना पड़ा, लेकिन बाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी।
मई 2023 में सीबीआई ने वानखेड़े के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया, जिसमें उन पर शाहरुख खान से 25 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने का आरोप लगा। वानखेड़े ने इन आरोपों का खंडन किया है और मामला अभी भी अदालत में लंबित है। इसी पृष्ठभूमि में आर्यन खान का डायरेक्टोरियल डेब्यू 'द बाड्स ऑफ बॉलीवुड' 18 सितंबर को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुआ, जिसके एक एपिसोड ने वानखेड़े को भड़का दिया।
सीरीज में क्या है आपत्तिजनक?
वानखेड़े की याचिका के अनुसार, सीरीज के एक दृश्य में एक नारकोटिक्स अधिकारी का किरदार दिखाया गया है, जो बॉलीवुड पार्टी पर छापा मारने की घोषणा करता है। यह अधिकारी 'सत्यमेव जयते' कहता है, जो वानखेड़े का ट्रेडमार्क स्टेटमेंट था। लेकिन दृश्य में तुरंत बाद एक किरदार अश्लील इशारा (मिडिल फिंगर) करता है, जिसे वानखेड़े ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान के रूप में देखा है। उनका कहना है कि यह 'प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971' का उल्लंघन है, साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट और हाल ही में लागू भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के प्रावधानों का भी।
वानखेड़े ने दावा किया है कि सीरीज में 2021 के घटनाक्रम को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है, जो उनकी छवि को 'झूठा, दुर्भावनापूर्ण और अपमानजनक' बनाता है। उन्होंने कहा, "यह सीरीज जानबूझकर मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के इरादे से बनाई गई है, खासकर जब मेरा और आर्यन खान से जुड़ा केस बॉम्बे हाईकोर्ट और एनडीपीएस स्पेशल कोर्ट में लंबित है।" यह चित्रण न केवल व्यक्तिगत हमला है, बल्कि ड्रग्स विरोधी एजेंसियों के प्रति जनता के विश्वास को भी हिलाता है।
मुआवजे की मांग
याचिका में वानखेड़े ने 2 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की है, लेकिन उन्होंने एक नेक सुझाव दिया है कि यह राशि पूरी तरह टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल को दान कर दी जाए, ताकि कैंसर रोगियों के इलाज में मदद मिले। इसके अलावा, उन्होंने स्थायी और अनिवार्य निषेधाज्ञा की मांग की है, जिससे सीरीज का प्रसारण रोका जाए। दिल्ली हाईकोर्ट इस मामले पर जल्द सुनवाई कर सकता है।
सोशल मीडिया पर बहस छिड़ी
सीरीज रिलीज के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर वानखेड़े के लुकअलिक किरदार को लेकर मीम्स की बाढ़ आ गई। कई यूजर्स ने इसे 'आर्यन का बदला' करार दिया, जबकि कुछ ने इसे क्रिएटिव फ्रीडम बताया। लेकिन वानखेड़े के मुकदमे के बाद बहस और तेज हो गई है। एक तरफ फैंस शाहरुख परिवार का समर्थन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कानूनी विशेषज्ञ इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बनाम मानहानि के बीच की जंग बता रहे हैं।



