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राज्यसभा में बिहार वोटर वेरिफिकेशन पर हंगामा, कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित

राज्यसभा में बिहार वोटर वेरिफिकेशन पर हंगामा, कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान मंगलवार को राज्यसभा में बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर विपक्षी दलों ने जोरदार हंगामा किया। इस मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी की और सदन में तख्तियां लहराईं, जिसके चलते कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

विपक्षी दलों, विशेष रूप से कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल (RJD), समाजवादी पार्टी (SP), और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने बिहार में चल रहे मतदाता सूची सत्यापन अभियान को “वोट चोरी” की साजिश करार दिया। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत लाखों वास्तविक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं, जो आगामी बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की और नियम 267 के तहत कार्य स्थगन नोटिस पेश किए।

कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने कहा, “यह लोकतंत्र पर हमला है। बिहार में एसआईआर (SIR) के नाम पर मतदाताओं के अधिकार छीने जा रहे हैं। हम चाहते हैं कि इस पर तुरंत चर्चा हो और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई हो।” विपक्ष ने यह भी मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए।

सरकार का जवाब

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सहयोगी दलों ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मतदाता सूची का सत्यापन एक नियमित और पारदर्शी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी मतदाताओं को हटाना और सूची को शुद्ध करना है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में कहा, “विपक्ष बेवजह हंगामा कर रहा है। चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संस्था है, और सरकार इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करती। सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए हम तैयार हैं, लेकिन सदन को चलने देना चाहिए।”

सदन की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू होते ही विपक्षी सांसद वेल में आ गए और “वोट चोरी बंद करो” “वोट चोरी बंद करो” और “लोकतंत्र बचाओ” जैसे नारे लगाने लगे। पीठासीन सभापति हरिवंश ने सांसदों से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं थमने पर कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे तक और फिर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया।

संसद के बाहर भी प्रदर्शन

विपक्षी सांसदों ने संसद भवन परिसर में भी बिहार SIR के खिलाफ प्रदर्शन किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई नेताओं ने “क्विट SIR” और “डेथ ऑफ डेमोक्रेसी” जैसे नारे लिखे पोस्टर लहराए। इससे पहले 12 अगस्त को विपक्षी सांसदों ने चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश की थी, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था।

बिहार में SIR का विवाद

चुनाव आयोग द्वारा बिहार में 24 जून 2025 से शुरू किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत अब तक 6.60 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने अपने गणना फॉर्म जमा किए हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 88% है। हालांकि, करीब 35 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने की संभावना है, क्योंकि वे या तो मृत पाए गए, स्थायी रूप से स्थानांतरित हो गए, या एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे। विपक्ष का दावा है कि यह प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण है और इसका उद्देश्य विपक्षी दलों के समर्थकों को निशाना बनाना है।

चुनाव आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि SIR एक नियमित प्रक्रिया है, जो हर साल की जाती है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है और केवल पहचान के लिए उपयोग किया जाता है।

इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई थी। 10 जुलाई 2025 को कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से इनकार कर दिया, लेकिन आयोग से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से न हटे। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया था कि सत्यापन के लिए 11 दस्तावेजों की अनिवार्यता पक्षपातपूर्ण है, लेकिन कोर्ट ने इस पर तत्काल कोई राहत नहीं दी।

आपको बता दें विपक्ष ने संकेत दिया है कि वह इस मुद्दे को और तेजी से उठाएगा। कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने कहा, “फर्जी वोट बनाए जा रहे हैं और वास्तविक मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। हम इस अन्याय के खिलाफ लड़ेंगे।” वहीं, RJD नेता तेजस्वी यादव ने बिहार में “वोट अधिकार यात्रा” की शुरुआत की है, जो 17 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर तक चलेगी। इस यात्रा में राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेता भी शामिल हो रहे हैं।

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