रोहिंग्या पर सऊदी का दबाव, बांग्लादेश ने 22 हजार को दिया पासपोर्ट, दुनिया में बढ़ी हलचल, जानिए क्यों ?
रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां सऊदी अरब के दबाव में बांग्लादेश ने 22 हजार रोहिंग्या शरणार्थियों को पासपोर्ट जारी कर दिया है। यह जानकारी बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने दी। उनके मुताबिक, जो रोहिंग्या वैध तरीके से सऊदी गए हैं, उन्हें पासपोर्ट दिया गया ताकि वे वहां कानूनी रूप से रह सकें और काम कर सकें। इस फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शरणार्थी नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
सऊदी की चिंता, बिना दस्तावेज लाखों लोग
सऊदी अरब का कहना है कि अभी भी करीब 69 हजार रोहिंग्या वहां बिना पासपोर्ट के रह रहे हैं। ऐसे में उनकी पहचान और निगरानी करना मुश्किल हो रहा है। सऊदी चाहता है कि सभी रोहिंग्या के पास वैध दस्तावेज हों, ताकि उन्हें ट्रैक करना आसान हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस भेजा जा सके। यही वजह है कि सऊदी लगातार बांग्लादेश पर दबाव बना रहा है।
विजन 2030 और सख्त कानूनों की तैयारी
सऊदी अरब इन दिनों अपने ‘विजन 2030’ के तहत बड़े बदलाव कर रहा है। इसके तहत अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने और इमिग्रेशन नियमों को कड़ा करने की तैयारी है। ऐसे में बिना दस्तावेज रह रहे रोहिंग्या शरणार्थी सऊदी के लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। पासपोर्ट जारी करवाने के पीछे सऊदी की यही रणनीति मानी जा रही है।
बांग्लादेश की मजबूरी, पहले से ही बड़ा बोझ
बांग्लादेश पहले ही 10 लाख से ज्यादा रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण दे चुका है। इससे वहां आर्थिक और सामाजिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। खाद्य संकट, सुरक्षा और संसाधनों की कमी जैसी समस्याएं पहले से ही गंभीर हैं। ऐसे में बांग्लादेश नहीं चाहता कि भविष्य में और शरणार्थी वापस लौटें, इसलिए वह सऊदी की शर्तें मानने को मजबूर दिख रहा है।
आर्थिक रिश्ते भी बने वजह, निवेश और व्यापार का दबाव
सऊदी और बांग्लादेश के बीच मजबूत आर्थिक संबंध भी इस फैसले की बड़ी वजह हैं। सऊदी ने बांग्लादेश में भारी निवेश की योजना बनाई है और दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का व्यापार होता है। इसके अलावा लाखों बांग्लादेशी मजदूर सऊदी में काम करते हैं। अगर बांग्लादेश सऊदी की बात नहीं मानता, तो उस पर आर्थिक असर पड़ सकता है।
आगे क्या होगा, संकट और गहराने की आशंका
यह पूरा घटनाक्रम दिखाता है कि रोहिंग्या संकट अब सिर्फ मानवीय मुद्दा नहीं, बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है। सऊदी की सख्ती और बांग्लादेश की मजबूरी के बीच शरणार्थियों का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है। आने वाले समय में यह मुद्दा और जटिल हो सकता है, क्योंकि कई देशों के हित इससे जुड़े हुए हैं।
