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बैंक मैनेजर ने किया बदसलूकी तो चुप मत रहिए, RBI ने ग्राहकों को दिए ये 5 बड़े अधिकार

बैंक मैनेजर ने किया बदसलूकी तो चुप मत रहिए, RBI ने ग्राहकों को दिए ये 5 बड़े अधिकार

भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI ने बैंक ग्राहकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए “चार्टर ऑफ कस्टमर राइट्स” लागू किया है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर बैंक ग्राहक के साथ सम्मानजनक और निष्पक्ष व्यवहार हो। कई बार लोग बैंक कर्मचारियों के सख्त या अपमानजनक व्यवहार को मजबूरी में सह लेते हैं लेकिन RBI के नियमों के मुताबिक ऐसा व्यवहार गलत माना जाता है। अगर कोई कैशियर या मैनेजर ग्राहक के साथ बदतमीजी करता है तो उसके खिलाफ शिकायत और कार्रवाई दोनों संभव हैं।

निष्पक्ष व्यवहार का अधिकार
RBI के नियमों के अनुसार हर ग्राहक को निष्पक्ष व्यवहार पाने का अधिकार है। बैंक किसी भी व्यक्ति के साथ धर्म, जाति, लिंग या रंग के आधार पर अलग व्यवहार नहीं कर सकता। बैंक कर्मचारियों को ग्राहकों से सम्मानजनक भाषा में बात करनी होती है। यदि कोई अधिकारी बिना वजह अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करता है या ग्राहक को परेशान करता है तो उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बैंक प्रशासन पर यह जिम्मेदारी होती है कि वह कर्मचारियों के व्यवहार पर नजर रखे।

पारदर्शिता जरूरी नियम
ग्राहकों को बैंक की हर सेवा से जुड़ी सही जानकारी देना भी बैंक की जिम्मेदारी है। इसमें ब्याज दरें, शुल्क, पेनल्टी और नियमों में बदलाव जैसी सभी बातें शामिल होती हैं। RBI के मुताबिक बैंक किसी भी नियम में बदलाव करने से पहले ग्राहकों को इसकी जानकारी देगा। कई बार लोग छिपे हुए चार्ज या गलत जानकारी की वजह से परेशान हो जाते हैं। ऐसे मामलों में ग्राहक बैंक से स्पष्ट जवाब मांग सकता है और जरूरत पड़ने पर शिकायत भी कर सकता है।

जरूरत के हिसाब से योजना
आज के समय में कई बैंक कर्मचारी जल्दी टारगेट पूरा करने के लिए ग्राहकों को ऐसी योजनाएं बेचने की कोशिश करते हैं जिनकी उन्हें जरूरत नहीं होती। RBI ने इसे लेकर भी साफ निर्देश दिए हैं। बैंक केवल वही स्कीम या सेवा ग्राहक को दे सकता है जो उसकी जरूरत और प्रोफाइल के हिसाब से सही हो। किसी ग्राहक पर जबरदस्ती बीमा, निवेश या दूसरी योजना थोपना नियमों के खिलाफ माना जाता है। ग्राहक चाहे तो ऐसी स्थिति में योजना लेने से इनकार कर सकता है।

गोपनीयता की सुरक्षा
बैंक के पास ग्राहकों की निजी जानकारी और अकाउंट डिटेल्स पूरी तरह सुरक्षित रखना जरूरी है। RBI के नियमों के मुताबिक ग्राहक की अनुमति के बिना उसकी जानकारी किसी तीसरे पक्ष को नहीं दी जा सकती। इसमें बैंक बैलेंस, मोबाइल नंबर, पैन कार्ड और ट्रांजैक्शन डिटेल्स जैसी जानकारी शामिल होती है। यदि किसी ग्राहक को लगता है कि उसकी निजी जानकारी गलत तरीके से साझा की गई है तो वह इसकी शिकायत कर सकता है।

शिकायत का पूरा अधिकार
अगर बैंक स्तर पर किसी ग्राहक की समस्या हल नहीं होती तो RBI ने शिकायत दर्ज कराने का पूरा अधिकार दिया है। ग्राहक पहले बैंक में शिकायत करेगा और यदि 30 दिनों तक समाधान नहीं मिलता तो वह बैंकिंग लोकपाल के पास जा सकता है। बैंकिंग लोकपाल व्यवस्था ग्राहकों की शिकायतों के समाधान के लिए बनाई गई है। RBI का कहना है कि हर ग्राहक को अपने अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए ताकि वह गलत व्यवहार या बैंकिंग गड़बड़ी के खिलाफ आवाज उठा सके।

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