कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि "भारत के पास आज सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं, जिनमें कोई दम नहीं है।" यह बयान विपक्ष की आक्रामक रणनीति का हिस्सा लगता है, जहां राहुल गांधी लगातार मोदी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं।
राहुल गांधी ने 6 अगस्त 2025 को एक सार्वजनिक सभा में यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, "मोदी जी सिर्फ कैमरे के सामने मजबूत बनते हैं, असल में वो सबसे कमजोर प्रधानमंत्री हैं – उनमें कोई दम नहीं है।" यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए व्यापारिक टैरिफ्स और विदेश नीति की कमजोरी पर केंद्रित था। राहुल ने आगे जोड़ा कि मोदी सरकार "अरबपतियों के कर्ज माफ करने" में तो सक्षम है, लेकिन किसानों, युवाओं और महिलाओं की समस्याओं पर "कमजोर" साबित हो रही है।
यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। X (पूर्व ट्विटर) पर #ModiWeakPM और #RahulVsModi जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कांग्रेस ने इसे "सच्चाई का आईना" बताते हुए वीडियो शेयर किया, जबकि BJP ने इसे "देशद्रोही बयान" करार दिया।
BJP का पलटवार
BJP ने राहुल के बयान को "राष्ट्र-विरोधी" बताते हुए हमला बोला। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान (पुरानी प्रतिक्रिया का हवाला देते हुए) ने कहा, "पीएम विदेशों में भव्य स्वागत पाते हैं, राहुल जैसे कमजोर नेता क्या जानें?" हाल ही में, BJP सांसद कंगना रनोट ने राहुल को "भाषण के लिए पर्ची लगाने वाला" कहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में अप्रत्यक्ष जवाब दिया: "मैं अपनी छवि की चिंता नहीं करता, देश की चिंता करता हूं।" BJP का दावा है कि मोदी के नेतृत्व में भारत "विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था" बना है, जबकि राहुल "विपक्ष को कमजोर" कर रहे हैं।
विपक्षी दलों ने राहुल का समर्थन किया। सपा नेता अखिलेश यादव ने कहा, "राहुल सही कह रहे हैं, मोदी सरकार ने युवाओं को बेरोजगार बनाया।" हालांकि, कुछ X पोस्ट्स में राहुल को "बेवकूफ" और "विदेशी सलाहकारों का पिट्ठू" कहा गया।
क्या बदलेगी राजनीति?
यह बयान 2025 के बिहार और तमिलनाडु चुनावों से पहले आया है, जहां विपक्ष NDA को कड़ी टक्कर देना चाहता है। राहुल की लोकप्रियता बढ़ रही है – X पर उनके फॉलोअर्स 2024 से 20% बढ़े हैं। लेकिन BJP इसे "वोटबैंक की राजनीति" बता रही है।विश्लेषकों का मानना है कि राहुल का यह अंदाज विपक्ष को एकजुट कर सकता है, लेकिन अगर बयान "अतिरंजित" साबित हुए, तो उल्टा नुकसान हो सकता है। जैसे 2020 में "डंडे मारेंगे" बयान पर मोदी ने संसद में मजाक उड़ाया था।



