रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जल्द ही भारत का दौरा करने वाले है। यह जानकारी भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने मॉस्को में अपने हाल के दौरे के दौरान दी। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50% टैरिफ लगाए जाने के कारण भारत-अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव चरम पर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर रूस से कच्चा तेल खरीदने के लिए कड़ी आलोचना की है। ट्रम्प का दावा है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर और उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर मुनाफा कमा रहा है, जिससे रूस को यूक्रेन युद्ध में अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिल रही है। इसके जवाब में ट्रंप ने पहले 25% टैरिफ की घोषणा की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 50% कर दिया गया। भारत ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उसकी ऊर्जा खरीद राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा के लिए है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने पर अमेरिका ने ही भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया था ताकि वैश्विक ऊर्जा बाजार स्थिर रहे।
पुतिन की यह यात्रा भारत-रूस के बीच मजबूत रणनीतिक साझेदारी को और गहरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पुतिन का दौरा ऐसे समय होगा जब भारत पर अमेरिका ने कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है।
अजित डोभाल का मॉस्को दौरा
NSA अजित डोभाल मंगलवार, 5 अगस्त 2025 को मॉस्को पहुंचे, जहां राष्ट्रपति पुतिन के साथ मुलाकात की। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य भारत-रूस के बीच रक्षा, सुरक्षा, और ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करना था। डोभाल ने कहा, "भारत और रूस के बीच दीर्घकालिक और विशेष रिश्ता है, जिसे हम बहुत महत्व देते हैं।" उन्होंने पुतिन की भारत यात्रा की पुष्टि करते हुए कहा कि तारीखें लगभग तय हो चुकी हैं, हालांकि कुछ स्रोतों के अनुसार यह दौरा 2025 के अंत में हो सकता है, न कि अगस्त के अंत में जैसा कि पहले कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था।
पुतिन की भारत यात्रा क्यों है अहम?
भारत और रूस के बीच 2000 में रणनीतिक साझेदारी संधि के बाद से हर साल शिखर सम्मेलन आयोजित किए जाते हैं। यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को और मजबूत करेगी, खासकर रक्षा, ऊर्जा, और व्यापार के क्षेत्र में। भारत रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदता है, जो उसकी ऊर्जा जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण है। इस दौरे में तेल खरीद को लेकर नए समझौतों पर चर्चा हो सकती है।
भारत रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली सहित कई रक्षा उपकरण खरीदता है। डोभाल की यात्रा के दौरान इस पर भी बातचीत होने की संभावना है। ट्रंप की धमकियों के बीच पुतिन का भारत दौरा और डोभाल की मॉस्को यात्रा भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता का स्पष्ट संदेश देती है। भारत ने बार-बार कहा है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा, न कि पश्चिमी दबावों को।
ट्रंप-पुतिन मुलाकात की संभावना
क्रेमलिन ने गुरुवार को बताया कि पुतिन जल्द ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात करेंगे। रूस के विदेश मामलों के सलाहकार यूरी उशाकोव ने कहा कि दोनों पक्ष बैठक की तैयारियों में जुटे हैं और स्थान तय हो चुका है, जिसकी घोषणा बाद में की जाएगी। यह मुलाकात भारत-अमेरिका-रूस के बीच त्रिकोणीय गतिशीलता को और जटिल बना सकती है।
टैरिफ की धमकियों पर भारत का करारा जवाब
भारत ने ट्रंप के आरोपों और टैरिफ धमकियों का कड़ा जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने कहा, "किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तरह, भारत अपने राष्ट्रीय हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए सभी आवश्यक उपाय करेगा।" विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी स्पष्ट किया कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए सस्ते स्रोतों से तेल खरीदना जारी रखेगा। इसके अलावा, रूस ने भी भारत का समर्थन करते हुए ट्रंप की धमकियों को "अवैध व्यावसायिक दबाव" करार दिया है।



