नेपाल में हाल के दिनों में राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा की घटनाएँ तेजी से बढ़ी हैं। पूर्व प्रधानमंत्रियों पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' और शेर बहादुर देउबा के घरों पर आगजनी और तोड़फोड़ की खबरें सामने आई हैं। इसके साथ ही, युवाओं के नेतृत्व में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हो रहे हैं, इस अशांति के बीच तीन मंत्रियों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है, जिससे देश में राजनीतिक संकट और गहरा गया है।
नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य क्षेत्रों में युवाओं के नेतृत्व में हो रहे प्रदर्शनों ने हिंसक रूप ले लिया है। प्रदर्शनकारी राजशाही की पुनर्स्थापना और मौजूदा सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरे हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड और शेर बहादुर देउबा के घरों पर हमले की खबरें हैं। काठमांडू के बाहरी इलाकों में स्थित देउबा के आवास पर पथराव और आगजनी की घटनाएँ हुईं, जबकि प्रचंड के घर पर भी भीड़ ने तोड़फोड़ की। इसके अलावा, मधेशी समुदाय के प्रदर्शनकारियों ने रौटाहाट जिले में पूर्व प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल के घर पर भी हमला किया।
हिंसा के दौरान काठमांडू में एक व्यावसायिक परिसर, शॉपिंग मॉल, एक राजनीतिक दल के मुख्यालय, और एक मीडिया हाउस की इमारत में आग लगा दी गई। इन घटनाओं में 12 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए और एक व्यक्ति की मौत की खबर है। प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की कोशिश की, जिसके जवाब में पुलिस ने आंसू गैस का उपयोग किया।
मंत्रियों के इस्तीफे
हिंसा और प्रदर्शनों के बीच नेपाल के गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनके अलावा दो अन्य मंत्रियों ने भी अपने पद छोड़ दिए। ये इस्तीफे युवाओं के प्रदर्शनों में हुई मौतों और बढ़ती अशांति के जवाब में आए हैं। सोशल मीडिया पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन प्रदर्शनों में अब तक दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है।
नेपाल में 2008 के बाद से 13 सरकारें बदल चुकी हैं, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता बनी हुई है। हाल ही में, सत्तारूढ़ गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी सीपीएन-यूएमएल, जिसके नेता के.पी. शर्मा ओली हैं, ने प्रचंड की सरकार से समर्थन वापस ले लिया। इसके बाद, नेपाली कांग्रेस के नेता शेर बहादुर देउबा और ओली ने नई सरकार के गठन के लिए गठबंधन बनाया। दोनों नेताओं ने संसद के शेष कार्यकाल के लिए बारी-बारी से प्रधानमंत्री पद साझा करने पर सहमति जताई है।
नेपाली कांग्रेस के पास 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में 89 सीटें हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीटें हैं। दोनों दलों के पास कुल 167 सीटें हैं, जो बहुमत के लिए आवश्यक 138 सीटों से अधिक है। दूसरी ओर, प्रचंड की पार्टी के पास केवल 32 सीटें हैं, जिसके कारण उनकी सरकार पर संकट गहरा गया है। देउबा ने प्रचंड से इस्तीफा देने और नई सरकार के गठन का मार्ग प्रशस्त करने की मांग की है। इसके साथ ही, राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी ने पार्टियों को नई सरकार बनाने के लिए 25 दिसंबर तक का समय दिया है।



