प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का सबसे बड़ा दुश्मन दूसरे देशों पर निर्भरता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आत्मनिर्भरता ही देश की सच्ची ताकत है।
आपको बता दें पीएम मोदी का यह बयान 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत आता है, जो 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू किया गया था। उस समय, चीन पर दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य आवश्यक वस्तुओं की निर्भरता ने भारत को सबक सिखाया था। आज, 2025 में, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था में युद्ध, व्यापार युद्ध और जलवायु परिवर्तन जैसे संकट उभर रहे हैं, मोदी का यह कथन और भी प्रासंगिक हो जाता है।
मोदी ने कहा, "हमारा सबसे बड़ा दुश्मन दूसरे देशों पर निर्भरता है। हमें अपनी क्षमता पर भरोसा करना होगा, ताकि कोई बाहरी शक्ति हमें कमजोर न कर सके।" यह बयान हाल ही में सिंगापुर के साथ द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भी गूंजा, जहां पीएम ने 'एकजुटता से आतंकवाद का मुकाबला' के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन पर जोर दिया। सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग के साथ संयुक्त बयान में मोदी ने हरित और डिजिटल शिपिंग कॉरिडोर पर सहमति का जिक्र करते हुए कहा कि भारत अब आयात पर कम निर्भर होकर निर्यात को बढ़ावा देगा।
निर्भरता के खतरे
दुनिया ने देखा है कि कैसे रूस-यूक्रेन युद्ध ने यूरोपीय देशों को ऊर्जा संकट में धकेल दिया। रूस पर गैस की निर्भरता ने जर्मनी जैसे औद्योगिक महाशक्ति को परेशान किया। इसी तरह, ताइवान संकट की आशंका में सेमीकंडक्टर चिप्स की आपूर्ति बाधित हो सकती है, जो भारत की आईटी और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री को प्रभावित करेगी।
भारत के संदर्भ में, तेल आयात पर 85% निर्भरता एक बड़ा जोखिम है। 2024-25 में, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक था, जिसमें मध्य पूर्व के देशों का बड़ा हिस्सा है। मोदी सरकार ने 'ओपन एकॉनॉमी फॉर इनोवेशन' के तहत नवीकरणीय ऊर्जा पर निवेश बढ़ाया है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि अभी और प्रयासों की जरूरत है।
आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
मोदी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में कई कदम उठाए हैं
- मेक इन इंडिया: मोबाइल फोन निर्माण में 100% स्वदेशीकरण, जहां अब सैमसंग और ऐप्पल जैसे ब्रांड भारत में ही असेंबल हो रहे हैं।
- पीएलआई स्कीम: 14 क्षेत्रों में 1.97 लाख करोड़ रुपये का प्रोत्साहन, जिससे 2025 तक 60 लाख नौकरियां सृजित होने का लक्ष्य।
- डिजिटल इंडिया: ई-कॉमर्स और फिनटेक में स्वदेशी ऐप्स को बढ़ावा, जैसे उपी (UPI) जो अब वैश्विक स्तर पर अपनाया जा रहा है।
- रक्षा निर्यात: 2025 में रक्षा निर्यात 21,000 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो 2014 के 686 करोड़ से 30 गुना अधिक है।
ये पहलें न केवल आर्थिक मजबूती प्रदान कर रही हैं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी मजबूत कर रही हैं। आपको बता दें 'ऑपरेशन सिंदूर' जैसे सैन्य अभियानों में स्वदेशी हथियारों की भूमिका ने साबित किया कि निर्भरता कम होने से रणनीतिक स्वतंत्रता बढ़ती है।



