प्रधानमंत्री पांच देशों के दौरे पर हैं लेकिन चर्चा सबसे अधिक त्रिनिदाद और टोबैगो की है। त्रिनिदाद और टोबैगो यानी दूसरा भारत, जी हां भारत से 14,000 किमी दूर बसता है एक और भारत। 14 लाख की आबादी वाले इस छोटे देश में ज्यादातर बिहार और उप्र के लोग रहते हैं। यहां का रहन-सहन, खान-पान, बोली-भाषा और संस्कृति सब जैसा है। यहां के राष्ट्रपति-प्रधानमंत्री-स्पीकर सब भारतीय मूल के हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब इस देश के दौरे पर हैं तो हम कह सकते हैं वह दूसरे भारत पहुंचे हैं..उनका यह दौरा बिहार चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
त्रिनिदाद कैसे बना दूसरा भारत
कैरेबियन सागर में बसा एक छोटा मगर सांस्कृतिक रूप से समृद्ध द्वीप त्रिनिनाद और टोबैगो वास्तव में अंग्रेजों की देन है। 1834 में ब्रिटिश साम्राज्य ने गुलामी प्रथा समाप्त की तो उन्हें त्रिनिदाद में अपने गन्ने के खेतों में काम करने के लिए सस्से श्रमिकों की जरूरत पड़ी। 1845 से 1917 के बीच करीब डेढ़ लाख भारतियों को मजदूर बनाकर अंग्रेज वहां ले गए। इनमें ज्यादातर बिहार और उप्र के गरीब ग्रामीण थे, उनके साथ भाषा, धर्म, त्योहार, संगीत और खानपान भी वहां पहुंच गया और बस गया दूसरा भारत।
राम-राम और जय सियाराम
त्रिनिदाद में हिंदी खासकर भोजपुरी खूब बोली जाती है, यहां राम-राम और जय सियाराम जैसे शब्द आम हैं। यहां हिंदुओं और मुस्लिमों की आबादी अधिक है। यहां की 40 फीसदी से ज्यादा आबादी भारतीय मूल की है। रामलीला, होली, दीवाली और ईद जैसे त्योहार बड़े धूमधाम से मनाए जाते हैं। भारत की परंपरा, भारतीय संस्कृति के साथ यहां पूजा-पाठ होता है। यहां के खानपान में भारत की तरह रोटी, चना, समोसा, दाल-भात आम है। स्ट्रीट फूड में भ भारतीय स्वाद मिलता है। यहां इंडो-कैरेबियन संगीत के अलावा भजन और भोजपुरी गाने घर-घर सुने जाते हैं।
भारतीय मूल की कमला पर्सद यहां की प्रधानमंत्री हैं, वह दूसर बार प्रधानमंत्री बने हैं। भारतीय मूल के क्रिस्टीन कार्ला कांगलू यहां की राष्ट्रपति हैं और भारतीय मूल के ही जगदेव सिंह यहां के स्पीकर हैं। इसले पहले भारतीय मूल के बासदेव पांडे यहां के प्रधानमंत्री रह चुके हैं।
भोजपुरी गीत-संगीत और बिहार चुनाव
प्रधानमंत्री मोदी यहां गंगाजल लेकर गए और वहां की प्रधानमंत्री कमला पर्सद को भेंट किया। इसके बाद वह एक ऐसे समारोह में शामिल हुए जहां भोजपुरी गीत-संगीत चल रहा था। उन्होंने बाकायदा तालियां बजाकर कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। यहां के सराकारी प्रवक्ता ने भोजपुरी में बात की। प्रधानमंत्री के 14 हजार किमी दूर एक देश में इस तरह भोजपुरी प्रेम को बिहार चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है।



