भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर सुर्खियों में है, क्योंकि पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में भारतीय उच्चायोग के कर्मचारियों के लिए आवश्यक सेवाओं जैसे गैस, पीने का पानी और समाचार पत्रों की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिया है।
भारतीय अधिकारियों ने इसे "जानबूझकर और पूर्व नियोजित" कदम बताया है, जो वियना संधि का स्पष्ट उल्लंघन है। यह कदम भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित करने और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद पाकिस्तान की ओर से "छोटी प्रतिशोधी कार्रवाई" के रूप में देखा जा रहा है।
आपको बता दें यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान ने भारतीय राजनयिकों को निशाना बनाया है। 2019 में पुलवामा हमले के बाद भारतीय सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद भी इस्लामाबाद में भारतीय राजनयिकों को समान उत्पीड़न का सामना करना पड़ा था। उस समय भी गैस, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं में बाधा डाली गई थी, और भारतीय राजनयिकों की निगरानी बढ़ा दी गई थी।
भारतीय राजनयिकों की पानी-गैस सप्लाई पर लगाई रोक
गैस आपूर्ति
भारतीय उच्चायोग परिसर में सुई नॉर्दर्न गैस पाइपलाइन्स लिमिटेड (SNGPL) द्वारा गैस पाइपलाइन स्थापित की गई है, लेकिन आपूर्ति को जानबूझकर रोक दिया गया है। स्थानीय विक्रेताओं, जो पहले खाना पकाने और हीटिंग के लिए गैस सिलेंडर आपूर्ति करते थे, को भारतीय कर्मचारियों को बिक्री न करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे राजनयिकों और उनके परिवारों को बाजार में महंगे और सीमित विकल्प तलाशने पड़ रहे हैं, जो अक्सर उपलब्ध नहीं होते।
पीने का पानी
उच्चायोग के नियमित मिनरल वाटर आपूर्तिकर्ता को डिलीवरी करने से रोक दिया गया है। इस्लामाबाद के सभी जल विक्रेताओं को भारतीय उच्चायोग को आपूर्ति न करने के लिए कहा गया है। चूंकि स्थानीय नल का पानी बिना व्यापक फिल्टर के पीने योग्य नहीं है, इससे कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए गंभीर असुविधा हो रही है।
समाचार पत्र
समाचार पत्र विक्रेताओं को उच्चायोग और भारतीय राजनयिकों के आवासों में समाचार पत्रों की डिलीवरी रोकने के लिए कहा गया है। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि यह कदम राजनयिकों को स्थानीय समाचार और दृष्टिकोण से अलग करने का प्रयास है, जिससे उनकी जानकारी तक पहुंच सीमित हो रही है।
प्रतिबंध के प्रमुख कारण?
मई 2025 में शुरू किया गया भारत का सैन्य अभियान, जिसने पाकिस्तान में आतंकी ढांचों को नष्ट किया। इस अभियान ने पाकिस्तान को सैन्य और कूटनीतिक रूप से झटका दिया। भारत ने मई 2025 में इस संधि को निलंबित करने का फैसला किया, जिसे पाकिस्तान ने अपने जल संसाधनों के लिए खतरे के रूप में देखा। पाकिस्तान के जल संसाधन मंत्रालय ने चार पत्र लिखकर भारत से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था, लेकिन कोई प्रगति नहीं हुई।
अप्रैल 2025 में हुए इस आतंकी हमले, जिसमें 26 लोग मारे गए थे, ने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। भारतीय अधिकारियों का मानना है कि ये प्रतिबंध पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी, इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) द्वारा सुनियोजित "छोटी प्रतिशोधी कार्रवाई" का हिस्सा हैं, जो भारतीय राजनयिकों के लिए जीवन और कार्य की परिस्थितियों को कठिन बनाने का प्रयास कर रही है।
पाकिस्तान की सैन्य प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने हाल ही में भारत को "परमाणु युद्ध" की धमकी दी थी, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर पाकिस्तान को अस्तित्व का खतरा हुआ तो वह "आधी दुनिया को अपने साथ ले जाएगा।" उन्होंने भारत द्वारा सिंधु नदी पर बांध बनाने की स्थिति में मिसाइलों से हमला करने की भी धमकी दी। भारत ने इन बयानों को "गैर-जिम्मेदाराना" और "परमाणु हथियारों की कमान और नियंत्रण की अखंडता पर सवाल उठाने वाला" बताया है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने इन कदमों की कड़ी निंदा की है और जवाबी कार्रवाई की योजना बना रहा है। भारत ने जून 2025 में इस्लामाबाद में भारतीय राजनयिकों को समाचार पत्रों की आपूर्ति बंद होने के जवाब में नई दिल्ली में पाकिस्तानी राजनयिकों के लिए समान कदम उठाया।
विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वह पाकिस्तानी राजनयिकों के खिलाफ और जवाबी कदम उठा सकता है, जिसमें उनकी निगरानी बढ़ाना या अन्य प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। भारत इन उल्लंघनों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने उठा सकता है, विशेष रूप से यह दर्शाने के लिए कि पाकिस्तान कूटनीतिक मानदंडों का पालन नहीं कर रहा है।
वियना संधि का उल्लंघन
वियना संधि (1961) के तहत, राजनयिक मिशनों को सुचारू रूप से कार्य करने और उनके कर्मचारियों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने का अधिकार है। पाकिस्तान के इन कदमों को भारत ने संधि का स्पष्ट उल्लंघन बताया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इसे "गैर-कूटनीतिक दबाव की रणनीति" करार दिया है, जो दोनों देशों के पहले से ही नाजुक रिश्तों को और खराब कर सकता है।



