मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी में विपक्ष, लोकसभा में 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे
भारतीय राजनीति में एक नया विवाद उभरा जब विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना की घोषणा की। यह कदम बिहार में मतदाता सूची की विशेष गहन जांच (SIR) और कथित 'वोट चोरी' के आरोपों के बीच उठाया गया है। विपक्ष, विशेष रूप से इंडिया गठबंधन और कांग्रेस, ने चुनाव आयोग पर पक्षपात और मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोप लगाया है, जिसके कारण संसद से सड़कों तक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।
बिहार में हाल ही में शुरू की गई मतदाता सूची की विशेष गहन जांच (एसआईआर) ने विपक्षी दलों के बीच तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया है। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जा रहे हैं, जिसे वे 'वोट चोरी' का हिस्सा मानते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को चुनाव आयोग और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर गंभीर आरोप लगाए, जिसमें उन्होंने मतदाता सूची में हेराफेरी और लोकतंत्र को कमजोर करने की बात कही।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग ने बीजेपी के पक्ष में काम किया है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यशैली निष्पक्षता के मानकों पर खरी नहीं उतरती।
संसद में हंगामा और नारेबाजी
आपको बता दें 12 अगस्त 2025 को इंडिया गठबंधन के करीब 300 सांसदों ने संसद से मुख्य चुनाव आयोग के कार्यालय तक 'वोट चोर, गद्दी छोड़'... वोट चोर, गद्दी छोड़'... और 'लोकतंत्र बचाओ' के नारे लगाते हुए मार्च निकाला, लेकिन पुलिस ने इसे रोक दिया। इस दौरान सांसदों ने मिंता देवी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनकर प्रदर्शन किया, जो कथित तौर पर वोट चोरी का प्रतीक बन गई हैं।
लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने 'गली-गली में शोर है, चुनाव आयोग चोर है' जैसे नारे लगाए। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा, "यह चोरी साबित हो चुकी है, इसके लिए सबूत की भी जरूरत नहीं है।" आरजेडी सांसद मनोज झा ने इसे "लोकतंत्र की लूट" करार देते हुए कहा कि यह केवल चोरी नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश है।
विपक्ष का अभियान
कांग्रेस और इंडिया गठबंधन ने इस मुद्दे को जन-जन तक पहुंचाने के लिए देशव्यापी अभियान शुरू किया है। 14 अगस्त 2025 को, कांग्रेस ने सभी जिला मुख्यालयों में 'लोकतंत्र बचाओ मशाल जुलूस' निकाला, जिसमें 'वोट चोर, गद्दी छोड़' के नारे गूंजे। इसके अलावा, 22 अगस्त से 7 सितंबर तक राज्यों की राजधानियों और प्रमुख शहरों में 'वोट चोर, गद्दी छोड़' महारैलियां आयोजित करने की योजना है। कांग्रेस ने 15 सितंबर से 15 अक्टूबर तक पांच करोड़ हस्ताक्षर जमा करने का लक्ष्य भी रखा है।
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा, "हमारी अंतिम सांस तक हम संविधान और प्रत्येक मतदाता के अधिकारों की रक्षा करेंगे।" मध्य प्रदेश कांग्रेस ने भी इस मुद्दे को घर-घर पहुंचाने और 'लोकतंत्र बचाओ' रैलियां आयोजित करने की घोषणा की है।
चुनाव आयोग का जवाब
चुनाव आयोग ने इन आरोपों का खंडन करते हुए 17 अगस्त रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "चुनाव आयोग सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करता है। हमारे लिए कोई पक्ष या विपक्ष नहीं है।" उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि सात दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल करना होगा, अन्यथा ये आरोप बेबुनियाद माने जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मतदाताओं को फर्जी कहना गलत है और इसके लिए माफी मांगी जानी चाहिए। चुनाव आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि 'एक व्यक्ति, एक वोट' का कानून 1951-52 से लागू है और किसी भी अनियमितता के सबूत होने पर कार्रवाई की जाएगी।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी करार दिया। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन (ललन) सिंह ने कहा, "विपक्ष चाहता है कि गैर-नागरिक भी वोट डालें। वे लोकतंत्र को धोखाधड़ी पर चलाना चाहते हैं।" बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि विपक्ष फर्जी मतदाताओं को बढ़ावा दे रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इंडिया गठबंधन की एक बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर सहमति बनी है। यह प्रस्ताव संसद में लाया जा सकता है, लेकिन इसके लिए विपक्ष को लोकसभा और राज्यसभा में पर्याप्त समर्थन जुटाना होगा। महाभियोग प्रस्ताव के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत और राज्यसभा में विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है, जो वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में एक चुनौती हो सकती है।



