वोटर वेरिफिकेशन पर विपक्ष का चुनाव आयोग तक मार्च: राहुल-प्रियंका समेत 300 सांसद शामिल, अखिलेश ने लगाए गंभीर आरोप
नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व में विपक्षी दलों ने संसद भवन से चुनाव आयोग के कार्यालय तक एक विशाल मार्च निकाला। इस मार्च का उद्देश्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित "वोट चोरी" के मुद्दे पर विरोध दर्ज करना था।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव सहित 300 से अधिक सांसद इस प्रदर्शन में शामिल हुए। विपक्ष का आरोप है कि यह प्रक्रिया गरीबों, दलितों और प्रवासी मजदूरों के वोट छीनने की साजिश है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे विपक्ष की नाटकीयता करार दिया।
सुबह 10 बजे इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद, लगभग 11 बजे करीब 300 सांसद संसद भवन के मकर द्वार से ट्रांसपोर्ट भवन होते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर बढ़े। मार्च का नेतृत्व कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने किया, जिनके साथ प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव, और अन्य विपक्षी दलों के प्रमुख नेता शामिल थे। हालांकि, सुरक्षा बलों ने सांसदों को विजय चौक से आगे बढ़ने से रोक दिया, जिसके कारण प्रदर्शनकारी वहीं रुक गए।
राहुल गांधी ने इस अवसर पर कहा, “यह सिर्फ वोट की लड़ाई नहीं, बल्कि लोकतंत्र को बचाने की लड़ाई है। गरीबों, आदिवासियों और मजदूरों की आवाज को दबाने की कोशिश हो रही है।” उन्होंने बिहार, महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग से इलेक्ट्रॉनिक डेटा और सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की।
अखिलेश यादव के आरोप
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार और चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है, लेकिन इसका इस्तेमाल अब राजनीतिक हितों के लिए किया जा रहा है। सरकार हमारी बात सुनना नहीं चाहती। एसआईआर के नाम पर वोट चोरी की जा रही है, जो जनादेश को तोड़ने की कोशिश है।” अखिलेश ने यह भी आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया खास समुदायों को मतदाता सूची से हटाने के लिए बनाई गई है।
प्रियंका गांधी का बयान
कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे पर अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने इतना बड़ा खुलासा किया है, लेकिन चुनाव आयोग जांच करने की बजाय हलफनामा मांग रहा है। हम डेटा दिखा रहे हैं, फिर भी आयोग अपना ही डेटा मानने को तैयार क्यों नहीं है?” उन्होंने सवाल उठाया कि आयोग मतदान से जुड़े वीडियो सबूत नष्ट क्यों कर रहा है।
विपक्ष का दावा: वोटर वेरिफिकेशन एक साजिश
विपक्ष का कहना है कि बिहार में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिए गरीबों, दलितों, आदिवासियों और प्रवासी मजदूरों को मतदाता सूची से हटाने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र और हरियाणा में पहले ही ऐसी गड़बड़ियां हो चुकी हैं, और अब बिहार में भी वही "महाराष्ट्र मॉडल" दोहराया जा रहा है।
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा, “राहुल गांधी ने ऐसे तथ्य सामने रखे हैं जिन्हें कोई नकार नहीं सकता। एक व्यक्ति का नाम कई मतदान केंद्रों पर दिखाई देता है। हम इलेक्ट्रॉनिक डेटा की मांग कर रहे हैं ताकि सॉफ्टवेयर से यह जांचा जा सके कि एक ईपीआईसी नंबर पर कितने वोट डाले गए।”
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बीजेपी सांसद प्रताप चंद्र सारंगी ने कहा, “कुछ लोग आंदोलन के शौकीन होते हैं। राहुल गांधी एक गैर-मुद्दे को मुद्दा बना रहे हैं। चुनाव आयोग को बदनाम करने की उनकी कोशिश निंदनीय है।” केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा, “2003 में भी वोटर लिस्ट की समीक्षा हुई थी, तब कोई हंगामा नहीं हुआ। अब ये लोग रोहिंग्याओं और बांग्लादेशियों की फर्जी वोटिंग बंद होने से परेशान हैं।”
चुनाव आयोग का पक्ष
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बिहार की ड्राफ्ट मतदाता सूची से किसी भी मतदाता का नाम बिना नोटिस और सुनवाई के अवसर के नहीं हटाया जाएगा। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून उसे ड्राफ्ट सूची में शामिल न किए गए लोगों की अलग सूची साझा करने के लिए बाध्य नहीं करता।
हालांकि, विपक्ष का कहना है कि बिहार जैसे राज्य में, जहां साक्षरता दर कम है और गरीब आबादी अधिक है, अतिरिक्त दस्तावेजों की मांग (जैसे जन्म प्रमाणपत्र, मैट्रिक सर्टिफिकेट) वोटर लिस्ट से लोगों को हटाने का बहाना बन सकता है।
बिहार में पहले भी हुआ विरोध
यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने वोटर वेरिफिकेशन के खिलाफ आवाज उठाई है। 9 जुलाई 2025 को पटना में राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के नेतृत्व में एक मार्च निकाला था, जिसमें रेल और सड़क यातायात बाधित हुआ। उस दौरान भी राहुल ने कहा था, “बिहार में लोग संविधान के लिए शहीद हुए हैं। यह गरीबों के वोट छीनने की साजिश है, लेकिन बिहार की जनता ऐसा नहीं होने देगी।”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 11 अगस्त को शाम 4:30 बजे 24 अकबर रोड पर महासचिवों और राज्य प्रभारियों की बैठक बुलाई, जिसमें वोट चोरी के मुद्दे पर राष्ट्रीय कैंपेन और गठबंधन की रणनीति पर चर्चा हुई। इसके बाद शाम 7:30 बजे खड़गे ने इंडिया गठबंधन के सांसदों के लिए डिनर का आयोजन किया, जिसमें उपराष्ट्रपति चुनाव और एसआईआर मुद्दे पर आगे की रणनीति तय की गई। विपक्ष ने इस मुद्दे को संसद से सड़क तक ले जाने की योजना बनाई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल इसे देशव्यापी आंदोलन बनाने की तैयारी में हैं।



